'इकनॉमी पस्त लेकिन बाजार मस्त', क्या हैं खतरे RBI गवर्नर ने बताया

रिपोर्ट में लिखा है कि दोनों बाजारों में बढ़ता फासला फाइनेंशियल सेक्टर के स्थायित्व के लिए एक चुनौती है

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रिजर्व बैंक ने अपनी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट (FSR) में फाइनेंशियल बाजार और रियल इकनॉमी में दिख रहे बढ़े फासले को लेकर अहम बात कही है. केंद्रीय बैंक का मानना है कि रिलय इकनॉमी और फाइनेंशियल मार्केट्स में जो अलगाव बढ़ता ही जा रहा है और ये दिन ब दिन खराब होता जा रहा है. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में लिखा है कि दोनों बाजारों में बढ़ता फासला फाइनेंशियल सेक्टर के स्थायित्व के लिए एक चुनौती बनकर उभरा है.

आरबीआई की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में लिखा है कि-

फाइनेंशियल संपत्तियों के वैल्युएशन में बढ़ोतरी से वित्तीय स्थिरता खतरे में आ जाती है. बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थानों को एक दूसरे से जुड़े हुए वित्तीय व्यवस्थाओं के इन खतरों के बारे में जानकारी होनी चाहिए.

पिछले साल अगस्त में रिजर्व बैंक ने किया था आगाह

बता दें कि ये पहली बार नहीं ही कि रिजर्व बैंक इस रिस्क के बारे में जानकारी दे रहा है. पिछले साल अगस्त में भी रिजर्व बैंक ने वित्तीय संस्थानों को इस बारे में चेताया था कि स्टॉक मार्केट में भी कभी भी करेक्शन देखने को मिल सकता है.

रिजर्व बैंक ने बताया है कि कैसे सरकार और केंद्रीय बैंक ने फाइनेंशियल मार्केट की स्थिरता के लिए जरूरी कदम उठाए हैं, लेकिन फिर भी फाइनेंशियल और शेयर बाजार के कुछ सेक्टर और रियल इकनॉमी में कुछ डिस्कनेक्ट देखने को मिल रहा है.

बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थानों को चेतावनी

रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में लिखा गया है कि अनिश्चितता के दौर में अगर कुछ ऊपर-नीचे होता है को बैंकिंग सेक्टर और इसके बैलेंसशीट पर खासा असर देखने को मिल सकता है. कुल मिलाकर रिजर्व बैंक ने बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थानों को चेतावनी दी है कि बाजार की तेजी अनिश्चित है और इसलिए अपनी बैलेंसशीट का खास ख्याल रखें.

भारत ही नहीं पूरे दुनियाभर के बाजारों में बीते दिनों में खासी तेजी देखने को मिली है. दुनियाभर की सरकारों ने कोरोना के बाद जो राहत पैकेज दिए हैं उसकी वजह से लिक्विडिटी बढ़ी है और लोग ज्यादा ब्याज वाले बाजारों में निवेश कर रहे हैं.

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