सबसे खतरनाक रूप में कोरोना, कुंभ में फिर भी जुटी भीड़

हरिद्वार में 12 अप्रैल के ‘शाही स्नान’ में 30 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया था

उत्तराखंड के हरिद्वार में कुंभ 2021 के दौरान मंगलवार को चैत्र पूर्णिमा के स्नान के लिए घाटों पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु दिखे. कुंभ के पिछले स्नानों की तुलना में इस बार भले ही भीड़ कम दिखी हो, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग जैसे COVID-19 से बचाव के नियमों की धज्जियां फिर से उड़ी हैं.

यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने कोरोना संकट के चलते कुंभ को ‘प्रतीकात्मक’ रखने के लिए कहा था. देश में पिछले कई दिनों से हर रोज COVID-19 के 3 लाख से ज्यादा नए कन्फर्म्ड केस सामने आ रहे हैं.

हरिद्वार में 12 अप्रैल को कुंभ के सोमवती अमावस्या के दूसरे ‘शाही स्नान’ में 30 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया था. इतनी ज्यादा भीड़ के चलते, कोरोना वायरस महामारी के भारी कहर के बावजूद भी प्रशासन ने सोशल डिस्टेंसिंग को लागू करने से हाथ खड़े कर दिए थे.
हरिद्वार में 12 अप्रैल के शाही स्नान की एक तस्वीर
हरिद्वार में 12 अप्रैल के शाही स्नान की एक तस्वीर
(फोटो: @UTDBofficial/ट्विटर)

इसके बाद जब हरिद्वार में COVID-19 के केस बढ़े और कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ने को लेकर देशभर में आलोचना शुरू हुई तो प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘अब कुंभ को कोरोना के संकट के चलते प्रतीकात्मक ही रखा जाए. इससे इस संकट से लड़ाई को एक ताकत मिलेगी.’’

न्यूज एजेंसी पीटीआई की 23 अप्रैल की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि हरिद्वार कुंभ ड्यूटी में तैनात चिकित्सकों समेत 65 स्वास्थ्यकर्मियों की जांच में उनके COVID-19 से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. कुंभ क्षेत्र में 336 डॉक्टरों सहित कुल 751 स्वास्थ्यकर्मियों को COVID-19 टीकाकरण के बाद ड्यूटी पर तैनात किया गया था.

1 अप्रैल से हरिद्वार में महाकुंभ मेले की औपचारिक शुरुआत हुई थी. मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उत्तराखंड सरकार ने दिशानिर्देश भी जारी किए थे, जिनमें रजिस्ट्रेशन के साथ ही उन्हें 72 घंटे पहले की COVID-19 संबंधी जांच रिपोर्ट अनिवार्य रूप से लाने के लिए कहा गया, जिसमें संक्रमण की पुष्टि न हुई हो. हालांकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स से इसे लेकर लापरवाही का पता चला था.

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