सीरम इंस्टीट्यूट में बनने वाली कोविड वैक्सीन को WHO से मंजूरी

ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन को पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में मैन्युफैक्चर किया जा रहा है.

ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन को WHO ने दी मंजूरी
i

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन (COVID-19 Vaccine) को इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है. वैक्सीन को मंजूरी मिलने से गरीब देशों को टीका मुहैया कराने के WHO के प्रोग्राम में अब तेजी आएगी. WHO ने दक्षिण कोरिया में बनने वाली एस्ट्राजेनेका-SKBio और भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में बनने वाली वैक्सीन को मंजूरी दी है.

WHO ने वैक्सीन को मंजूरी देने के बाद कहा कि अब जिन देशों के पास वैक्सीन नहीं है, वो अपने स्वास्थ्य कर्मचारियों और जनता को वैक्सीन दे पाएंगे.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश-स्वीडिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को भारत के पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में मैन्युफैक्चर किया जा रहा है. भारत में ये ‘कोविशील्ड’ नाम से बिक रही है. भारत सरकार ने जनवरी महीने में इस वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी थी.

SAGE ने की थी वैक्सीन की सिफारिश

WHO के एक्सपर्ट पैनल, स्ट्रैटेजिक एडवाइजरी ग्रुप ऑफ एक्सपर्ट्स (SAGE) ने वैक्सीन के इस्तेमाल की सिफारिश की थी. पैनल ने कहा था कि वैक्सीन सभी उम्र के लोगों के लिए सही है. पैनल ने अपनी सिफारिश में कहा है कि वैक्सीन को दो डोज में दिया जाना चाहिए, और इसके बीच में 8 से 12 हफ्तों तक का अंतर होना चाहिए.

ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन पर उठे थे सवाल

ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका द्वारा मिलकर बनाई गई इस वैक्सीन पर दक्षिण अफ्रीका ने रोक लगा दी है. रिसर्चर्स ने पाया था कि ये वैक्सीन नए वैरिएंट के खिलाफ ‘न्यूनतम सुरक्षा’ देती है. कुछ यूरोपीय देशों में भी वैक्सीन पर सवाल खड़े हुए हैं, जिसके बाद, फ्रांस, जर्मनी समेत कई देशों ने 65 साल से ऊपर के लोगों को ये वैक्सीन नहीं देने का फैसला लिया था.

WHO से वैक्सीन को कैसे मिलती है मंजूरी?

WHO का इमरजेंसी यूज लिस्टिंग (EUL) कोविड-19 वैक्सीन की गुणवत्ता, सुरक्षा और एफिशिएसी का आंकलन करता है. COVAX प्रोग्राम के तहत वैक्सीन की गुणवत्ता जानना अहम है. इस प्रोग्राम के तहत WHO कम आय वाले देशों में कोविड वैक्सीन पहुंचा रही है.

EUL देशों को आयात करने और वैक्सीन देने के लिए खुद के रेगुलेटरी अप्रुवल की भी अनुमति देता है.

EUL प्रक्रिया के तहत, WHO ने दोनों ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की गुणवत्ता, सुरक्षा, रिस्क मैनेजमेंट और एफिशिएसी डेटा का अध्य्यन किया. इसमें वैक्सीन के डिस्ट्रीब्यूशन, जैसे स्टोरेज जैसे विषयों पर भी ध्यान दिया जाता है. इस प्रक्रिया में करीब चार हफ्तों का समय लगता है.

दुनिया में कोविड के मामले 11 करोड़ के करीब

अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के ट्रैकर के मुताबिक, दुनिया भर में कोरोना वायरस के मामले 10.91 करोड़ पहुंच गए हैं. इसमें सबसे ज्यादा मामले अमेरिका (2.76 करोड़), भारत (1.09 करोड़) और ब्राजील (98 लाख) हैं. कोविड से सबसे ज्यादा मौतें अमेरिका (4.86 लाख), ब्राजील (2.39 लाख) और मेक्सिको (1.74 लाख हुई हैं.) भारत में अब तक 1.55 लाख लोग कोरोना वायरस के कारण जान गंवा चुके हैं.

(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram चैनल से जुड़े रहिए यहां)

Published: 
क्विंट हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

120,000 से अधिक ग्राहक जुड़ें!