बिहार के 55% लोग नहीं चाहते सुशांत की मौत बने चुनावी मुद्दा: सर्वे

बिहार चुनाव में एक ही मुद्दा ऐसा है जिसपर सारे राजनीतिक दल एकजुट हैं. वो मुद्दा सुशांत सिंह राजपूत की मौत का है

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बिहार चुनाव 2020
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55% बिहार के लोग नहीं चाहते सुशांत की मौत बने चुनावी मुद्दा: सर्वे

बिहार विधानसभा चुनाव में एक ही मुद्दा ऐसा है जिसपर सारे राजनीतिक दल एकजुट हैं. वो मुद्दा सुशांत सिंह राजपूत की मौत का है. खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस केस को लेकर काफी आक्रामक नजर आ रहे हैं. जेडीयू से नाराज नजर आ रही है एलजेपी लेकिन सुशांत के मामले में दोनों का स्टैंड एक ही जैसा है.

ऐसे में ये तो हो गई राजनीतिक पार्टियों की बात. लेकिन जनता जिसे वोट करना है वो क्या सोचती है, इसे जानने के लिए मुंबई बेस्ड मार्केट रिसर्च एजेंसी 'प्रश्नम' ने बिहार में एक सर्वे कराया, जिसके मुताबिक, 55 फीसदी लोग ये मानते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत केस विधानसभा चुनाव के लिए मुद्दा नहीं होना चाहिए.

वहीं सर्वे में शामिल 80 फीसदी लोगों को सुशांत सिंह राजपूत केस के बारे में पता था. इस सर्वे में 3208 रजिस्टर्ड वोटर्स की राय ली गई थी, जो राज्य के 239 सीटों से आते हैं.

बता दें कि 2014 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के कैंपेन में सक्रिय भागीदारी निभा चुके टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर राजेश जैन का 'प्रश्नम' एक ऐसी मार्केट रिसर्च एजेंसी है जो सर्वे के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस इस्तेमाल करती है.

पार्टियों को इसकी परवाह नहीं ?

एक तरफ तो ताजा सर्वे ये बता रहा है कि सुशांत सिंह राजपूत को एक मुद्दे के तौर पर बिहार के लोग देखना पसंद नहीं करते. दूसरी तरफ इस केस से जुड़े हर पहलू पर जमकर राजनीति हो रही है. सुशांत सिंह राजपूत केस को जब सीबीआई के हाथों सौंपा गया तब इस सीबीआई जांच का क्रेडिट लेने की होड़ में मुख्य विपक्षी दल आरजेडी भी शामिल रही. आरजेडी की तरफ से कहा गया, "सबसे पहले किसी नेता ने सुशांत सिंह की दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में मौत पर जनभावना की मांग के अनुरूप सीबीआई जांच की मांग की तो, वो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ही थे, जिन्होंने 30 जून की अपनी प्रेसवार्ता में ही इसकी मांग उठाई थी. बीते 19 अगस्त को तेजस्वी यादव का दिया यह बयान भी काबिलेगौर है.''

वहीं सत्ताधारी जेडीयू और बीजेपी तो इसे अपनी जीत पहले ही बता चुके हैं. बीजेपी की तरफ से कुछ पर्चे भी बांटे गए, जिसमें सुशांत की मौत का जिक्र था. ऐसे में साफ था कि जनता की राय जाने बगैर ये पार्टियां पुरजोर तरीके से इसे विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाने में जुटी हैं.

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