अच्छे दिन आने वाले हैं
कालाधन वापस आएगा, तो 15 लाख रुपये हर व्यक्ति के खाते में होंगे
हर साल 2 करोड़ लोगों को नौकरियां देंगे
ये वादे आपको कुछ सुने-सुने से लग रहे होंगे. दरअसल ये बीजेपी के 2014 के वादों का फ्लैशबैक है. पांच साल पहले कुछ ऐसे ही वादे कर बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई थी. इसके लिए बकायदा एक चमकदार मेनिफेस्टो भी जारी किया गया था.
बीजेपी सोमवार को लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अपना मेनिफेस्टो जारी करेगी. इस मेनिफेस्टो में पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा, किसान कल्याण, युवा और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर खास जोर दे सकती है. लेकिन क्या पिछले मेनिफेस्टो के वादे पूरे हो पाए? क्या इस बार भी दोहराए जाएंगे वही पुराने वादे? यहां जानिए इन सभी सवालों के जवाब.
इन 5 बड़े वादों के साथ आई थी बीजेपी
रोजगार देने का वादा
नरेंद्र मोदी पीएम बनने से पहले अपनी हर रैली में बड़ी तादाद में नौकरियां देने और विकास की बात करते थे. इसीलिए उनके मेनिफेस्टो में भी रोजगार का वादा प्रमुखता से छापा गया था. लेकिन अभी तक इसका कोई डेटा बाहर निकलने को तैयार नहीं है. एनएसएसओ के एक लीक डेटा ने तो मोदी जी के वादे की पोल खोलकर रख दी, जिसमें कहा गया था कि पिछले 45 साल में नौकरियों का सबसे बुरा हाल है.
किसानों की समस्या
मोदी सरकार ने सत्ता में आने से पहले किसानों को भी अपने मेनिफेस्टो में अच्छा सम्मान दिया था. किसानों के लिए कई वादे किए गए थे. ब्लैक मार्केटिंग के लिए स्पेशल कोर्ट, नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट, फसलों का उचित मूल्य, एमएसपी सहित कई वादे शामिल थे. लेकिन क्या पिछले 5 साल में किसानों की दशा सुधरी है?
कृषि मंत्री की तरफ से लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, देश में साल 2014 से 2016 तक, तीन साल में 36 हजार किसानों ने आत्महत्या कर ली.
भारत के कई राज्यों में रोज किसान आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी केंद्र सरकार का कहना है कि उनके पास इसका कोई भी डेटा नहीं है. बेरोजगारी की तरह 2016 के बाद किसानों की आत्महत्या का सही डेटा भी अभी तक किसी के सामने नहीं आ पाया है.
भ्रष्टाचार पर करेंगे वार
बीजेपी ने अपने चुनावी वादों या फिर जुमलों में करप्शन को भी सबसे ऊपर जगह दी थी. कांग्रेस के लंबे शासनकाल में कई घोटालों का शोर हुआ. इसके बाद नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी रैलियों में इन्हें अच्छी तरह भुनाया और यहां तक कह दिया कि वे विदेशों से कालाधन वापस लेकर आएंगे और अगर ये वापस आ गया, तो हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपये आ सकते हैं.
लेकिन कालेधन की बजाय मोदी सरकार ने नोटबंदी कर अलग-अलग रंग के नोट लोगों को देकर 'रंगीन धन' जरूर दे दिया.
कल्चरल हेरिटेज और राम मंदिर
बीजेपी के मेनिफेस्टो और चुनावी वादों में एक चीज हमेशा देखी गई है, वो है राम मंदिर. 2014 में भी अयोध्या में राम मंदिर बनाने का वादा किया गया था. संवैधानिक तरीके से मंदिर बनाने की बात कही गई थी. लेकिन सरकार चार साल तक इस पर चुप्पी साधे रही.
मेनिफेस्टो के इसी सेक्शन में 'मां गंगा' भी शामिल थीं, जिन्हें साफ करने की कसमें तक खा ली गईं. उमा भारती ने कहा था कि 2018 तक अगर गंगा साफ नहीं हुई, तो वो जल समाधि ले लेंगी. लेकिन गंगा की हालत क्या है, ये सबको पता है. गंगा की साफ-सफाई आज भी लक्ष्य से कोसों दूर है.
चुनाव नजदीक आते ही राम मंदिर पर एक बार फिर हवा बनाने की और इसे चुनावी मुद्दा बनाकर पेश करने की कोशिश शुरू हुई. लेकिन तभी अचानक सेना और पाकिस्तान जैसे मुद्दों ने एंट्री की और राम का नाम सबकी जुबान से गायब हो गया. लेकिन निराश मत होइए, आपको एक बार फिर मेनिफेस्टो में भगवान राम जरूर नजर आ सकते हैं
कश्मीरी पंडितों की वापसी का वादा
बीजेपी के मेनिफेस्टो में कश्मीरी पंडितों के बारे में भी एक लाइन लिखी गई थी. मेनिफेस्टो में लिखा गया था कि कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए कदम उठाए जाएंगे और पीओके रिफ्यूजियों को भी उनके हक मिलेंगे.
लेकिन कश्मीरी पंडितों का हाल अब भी वही है. आज भी कश्मीरी पंडित अपने घर छोड़कर कहीं और रहने को मजबूर हैं. हालांकि एक बार फिर कश्मीरी पंडितों की याद नए मेनिफेस्टो में ताजा हो सकती है.
चुनावी नारों की बात करें तो पिछले साल सबकी जुबान पर ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ का स्लोगन चढ़ा था. लेकिन पांच साल बाद सरकार ‘अच्छे दिन आ गए हैं’ की बजाय ‘चौकीदारी’ पर ज्यादा जोर दे रही है. अब बीजेपी ‘मैं भी चौकीदार’ जैसे नारों से साथ चुनावी मैदान में उतरी है
ये था सत्ता में काबिज बीजेपी सरकार के मेनिफेस्टो का एक छोटा सा फ्लैशबैक, लेकिन यही फ्लैशबैक आपको मेनिफेस्टो जारी होने के दौरान भी मिल सकता है. ज्यादातर वादे तो पूरे हुए नहीं, तो एक बार फिर बीजेपी मेनिफेस्टो तैयार करने वालों को वादे लिखकर मेहनत करने की बजाय पुराने मेनिफेस्टो से कॉपी पेस्ट करने में आसानी जरूर होगी.
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