‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ की स्टोरी कमजोर, लेकिन विकी में है कौशल
‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ की स्टोरी कमजोर, लेकिन विकी में है कौशल 

Review: ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ की स्टोरी कमजोर, लेकिन विकी में है कौशल

सर्जिकल स्ट्राइक शब्द तब पॉपुलर हुआ जब भारत ने उरी हमले का बदला लेने का फैसला लिया. पाकिस्तान बोला ऐसा कुछ नहीं हुआ. आदित्य धर ने बोला मैं इसपर फिल्म बनाउंगा.

भई फिल्म तो इन्होंने बना ली. फिल्म की शुरुआत उरी हमले से पहले शुरू होती है और जय हिंद के नारों के साथ खत्म.

उरी के पास यही चैलेंज था कि हमले के बारे में सबकुछ जानती ऑडियंस को एंगेज कैसे किया जाए.

तो इन्होंने क्या किया, विकी कौशल को ले लिया. बड़ा ही अच्छा किया. विकी के कैरेक्टर का नाम है मेजर विहान शेरगिल. विकी का कैरेक्टर काफी स्ट्रॉन्ग है. उनके शानदार परफॉर्मेंस में थोड़ा योगदान इस बात का भी है कि इस किरदार को लिखने में बहुत काम किया गया. फिल्म का पूरा फोकस ही उनपर है, बाकी बस चेहरे हैं.

हां कई चेहरे काफी जाने-पहचाने लगते हैं. रजत कपूर को देखकर मोदी जी की याद आएगी, और नेशनल स्कियोरिटी एडवाइजर अजित डोभाल की तरह हैं परेश रावल. और जो मनोहर परिकर बने हैं वो तो बिल्कुल परिकर लग रहे हैं.

मोहित रैना, यामी गौतम और कीर्ति कुल्हाड़ी हैं लेकिन न के बराबर. फिल्म में जो चीज बांधे रखती है वो है मितेश मीरचंदानी का कैमरावर्क. नाइट शॉट और जवानों की फाइट काफी बढ़िया है. गोलियां चलना काफी रियल लगता है, लेकिन फिल्म में वो बात नहीं आ पाती.

विकी के कौशल के लिए एक बार देखी जा सकती है. फिल्म अगर थोड़ी छोटी होती और बेहतर लिखी होती तो और अच्छी लगती.

मैं इसे 5 में से 3 क्विंट देती हूं.

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