पाताल लोक रिव्यू:पूरी बेबाकी से समाज के कड़वे सच दिखाती वेब सीरीज

‘पाताल लोक’ देखने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

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पाताल लोक रिव्यू:पूरी बेबाकी से समाज के  कड़वे सच दिखाती वेब सीरीज
‘’दुनिया...ये एक नहीं तीन दुनिया हैं. सबसे ऊपर स्वर्ग लोक, जिसमें देवता रहते हैं. बीच में धरती लोक, जिसमें आदमी रहते हैं और सबसे नीचे पाताल लोक, जिसमें कीड़े रहते हैं.’’

इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी (जयदीप अहलावत) के मुताबिक, वैसे तो यह बात शास्त्रों में लिखी हुई है, लेकिन उन्होंने वॉट्सऐप पर पढ़ी. हाथीराम दिल्ली के जिस थाने में तैनात हैं, वह उसे पाताल लोक मानते हैं, क्योंकि वहां उन्हें न तो हाई प्रोफाइल केस मिल रहे हैं और न ही उनके प्रमोशन की गाड़ी आगे बढ़ रही है.

इसी बीच, एक दिन डीसीपी भगत की अगुवाई में यमुना पुल पर पुलिस एक गाड़ी का पीछा करके 4 लोगों ( हथौड़ा त्यागी, तोप सिंह, चीनी, कबीर एम) को पकड़ती है. यह पुल जिस थाने के अंतर्गत आता है, उसी में हाथीराम तैनात होते हैं. ऐसे में हाथीराम मौके पर पहुंचते हैं और डीसीपी उनसे चारों लोगों को गिरफ्तार करने के लिए कहते हैं. डीसीपी कहते हैं कि उन्हें लीड मिली थी कि ये चारों किसी की हत्या की साजिश बना रहे थे. डीसीपी इस केस की जांच भी हाथीराम के हवाले कर देते हैं.

तभी, अचानक मीडिया में खबरें आने लगती हैं कि जिन चार लोगों को पकड़ा गया है, वो शायद जाने-माने पत्रकार संजीव मेहरा (नीरज काबी) की हत्या करना चाहते थे. ऐसे में यह केस उसी तरह का हाई प्रोफाइल केस बन जाता है, जिसकी हाथीराम को हमेशा से तलाश थी. 

तो क्या वाकई संजीव मेहरा की हत्या की साजिश रची जा रही थी या फिर मामला कुछ और था? ‘पाताल लोक’ की कहानी जब इस सवाल का जवाब तलाशते हुए आगे बढ़ती है तो राजनीति और सिस्टम की साठगांठ के बीच समाज के कई चेहरे बेनकाब हो जाते हैं.

9 ऐपिसोड में सस्पेंस को पूरी तरह बरकरार रखते हुए जिस बेबाकी से ‘पाताल लोक’ कई गंभीर सामाजिक पहलुओं को उजागर कर देती है और हर किरदार के सफर से एक खास संदेश दे जाती है, उससे इसकी कसी हुई स्क्रिप्ट और मजबूत डायरेक्शन का पता लगता है.

बात किरदारों की करें तो बेशक, ‘पाताल लोक’ की सबसे मजबूत कड़ी है हाथीराम का किरदार. इस किरदार के कई पहलू हैं-

  • बात-बात पर पिता की मार खाकर बड़ा हुआ लड़का
  • भ्रष्ट सिस्टम के बीच संघर्ष करता एक इंस्पेक्टर
  • जिद्दी और गलत संगत की तरफ बढ़ रहे एक बेटे का बाप
  • धर्म के नाम पर भेदभाव का सामना करते जूनियर का हौसला बढ़ाने वाला सीनियर
  • पति-पत्नी के रिश्ते में नाजुक मोड़ पर नारी शक्ति का सम्मान करने वाला पति

'पाताल लोक' की कहानी में हाथीराम के किरदार को वास्तविकता देने की हर संभव कोशिश की गई है.

हाथीराम के किरदार में जयदीप अहलावत
हाथीराम के किरदार में जयदीप अहलावत
(फोटो: यूट्यूब स्क्रीनशॉट)
एक आम इंसान की तरह हाथीराम भी काफी गलतियां करता है, मगर वो अपनी गलतियों को जिस तेजी से पहचानता है और उनसे ऊपर उठता है, वही बात और जयदीप अहलावत की बेहतरीन एक्टिंग इस किरदार को देखने लायक बनाती है.

गुल पनाग ने हाथीराम की पत्नी रेनू चौधरी का किरदार निभाया है. यह किरदार पूरी तरह होम मेकर होते हुए एक पत्नी, मां और बहन के तौर पर जिम्मेदारियां निभाने और सही समय पर बिना किसी डर के फैसले लेने वाली महिला का है.

अभिषेक बनर्जी ने शानदार एक्टिंग के बलबूते खूंखार अपराधी हथौड़ा त्यागी के किरदार को काफी अच्छे से निभाया है. यह किरदार ऐसा है, जिसमें दूर-दूर तक अच्छाई और इंसानियत की एक बात नजर नहीं आती, लेकिन कहानी का सस्पेंस जब खत्म होने की तरफ बढ़ता है, तो त्यागी के किरदार में भी इंसानियत की एक झलक दिखाई देने लगती है.

हथौड़ा त्यागी के किरदार में अभिषेक बनर्जी
हथौड़ा त्यागी के किरदार में अभिषेक बनर्जी
(फोटो: यूट्यूब स्क्रीनशॉट)
त्यागी और उसके साथ पकड़े गए बाकी तीन आरोपियों के ‘अपराध की दुनिया में कदम रखने की वजहें’ और उनके अंजाम की छोटी-छोटी कहानियां जब एक साथ मिलती हैं, तो ‘पाताल लोक’ भारतीय क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज के इतिहास में नया मुकाम हासिल करते हुए दिखती है.

जाति-धर्म के आधार पर भेदभाव, लाचारी की हालात में करप्ट सिस्टम से भरोसा डिगने और गरीबी के चलते बचपन की मासूमियत छिनने के समाज को क्या-क्या नुकसान झेलने पड़ सकते हैं, उसे 'पाताल लोक' कई कड़वे सच के जरिए सामने लाती है.

इसके अलावा लोकप्रियता की चकाचौंध, राजनीति के असर और नैतिकता के बीच खड़े कई किरदारों से 'पाताल लोक' पत्रकारिता की दुनिया का हाल भी बारीकी से बयां करती है.

‘पाताल लोक’ देखने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

बाकी कई क्राइम थ्रिलर की तरह 'पाताल लोक' में भी काफी हिंसा, गाली-गलौज और कुछ विचलित कर देने वाले दृश्य दिखाए गए हैं. ऐसे में कुछ दर्शकों की राय हो सकती है कि इन चीजों से बचा जा सकता था. हालांकि, दर्शकों का एक वर्ग इन चीजों को कहानी के असल हालात बयां करने के लिए अहम भी मान सकता है.

बहुत सी वेब सीरीज में बीच-बीच में ऐसे पल आते हैं, जिनको दर्शक रिपीट मोड में देखते हैं. मगर पाताल लोक में ऐसे मौके कम ही देखने को मिलते हैं. शायद कहानी के साथ न्याय करने के लिए ऐसा किया गया है. शुरू में कहानी थोड़ी स्लो भी है, लेकिन बाद में वो दर्शकों को अपने साथ बांधे रखने के स्तर पर पहुंच जाती है.

ऐसे में इन चीजों को ध्यान में रखते हुए अगर आप मजबूत किरदारों और सधी हुई कहानी वाली वेब सीरीज देखना चाहते हैं तो 'पाताल लोक' आपको निराश नहीं करेगी.

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