धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट कर रहा है पुनर्विचार
धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट कर रहा है पुनर्विचार(फोटो: ट्टिटर)
  • 1. क्या है धारा 377?
  • 2. इस केस में कब क्या हुआ?
  • 3. सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में क्या संकेत दिए?
  • 4. क्या है LGBTQ समुदाय?
  • 5. किन देशों में नहीं है अपराध?
धारा 377 क्या है? कानून और कोर्ट में कब क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान बेंच ने फैसला दे दिया है अब समलैंगिकता अपराध नहीं है. धारा 377 को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया है. लेकिन ये सफलता आसानी से नहीं मिली है. इसके लिए एलजीबीटी समुदाय को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी है. इस मामले में कई मोड़ आ चुके हैं. आपको बताते हैं ये पूरा मामला है क्या, कौन किस तरह प्रभावित है. आइए बताते हैं क्या है धारा 377

  • 1. क्या है धारा 377?

    भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में समलैंगिकता को अपराध बताया गया है. आईपीसी की धारा 377 के मुताबिक, जो कोई भी किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ प्रकृति की व्यवस्था के खिलाफ सेक्स करता है, तो इस अपराध के लिए उसे 10 वर्ष की सजा या आजीवन कारावास से दण्डित किया जा सकेगा. उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा.

    ये भी पढ़ें- धारा-377: समलैंगिक सेक्स अब अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट कर रहा है पुनर्विचार
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