राफेल सौदे पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के नए खुलासे से सनसनी 
राफेल सौदे पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के नए खुलासे से सनसनी (फोटो: Reuters)
  • 1. राफेल डील क्या है?
  • 2. क्या एनडीए सरकार ने राफेल के लिए यूपीए की तुलना में महंगा...
  • 3. मोदी सरकार सौदे के तथ्यों को क्यों नहीं बता रही?
  • 4. फ्रांस की सरकार ने क्या कहा?
  • 5. कांग्रेस के आरोप पर बीजेपी का क्या कहना है?
राफेल सौदे पर क्यों मचा है हंगामा? ये हैं 5 बड़ी वजह

राफेल सौदे को लेकर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने सनसनीखेज खुलासा किया है. उन्होंने कहा है कि भारत सरकार ने राफेल डील के दौरान राफेल मैन्यूफैक्चरिंग में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को पार्टनर बनाने के लिए कहा था. ओलांद के खुलासे के कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष को मोदी सरकार के खिलाफ एक नया हथियार हाथ लग गया है. मोदी सरकार विपक्ष के उन आरोपों से इनकार करती रही है कि पीएम मोदी ने राफेल सौदे में रिलायंस को फायदा पहुंचाया है.

संसद में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान राफेल सौदे में सरकार को तथ्यों को छिपाने का आरोप लगा. राहुल गांधी ने कहा था कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव में आकर सौदे को लेकर झूठ बोला. राहुल ने कहा कि इस सौदे में पीएम मोदी ने अपने एक ऐसे मित्र उद्योगपति को फायदा पहुंचाया, जिनकी कंपनी के पास राफेल विमान बनाने का कोई अनुभव ही नहीं था. आइए जानते हैं क्या है राफेल सौदा और क्यों इसे लेकर सरकार और विपक्ष के बीच घमासान मचा है.

  • 1. राफेल डील क्या है?

    राफेल सौदे पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के नए खुलासे से सनसनी 
    (फोटो: PTI)

    एनडीए सरकार ने फ्रांस से 36 फाइटर प्लेन खरीदने के लिए 7.87 अरब यूरो यानी 59 हजार करोड़ में सौदा किया था. इसके तहत फ्रांस को कुछ ऑफसेट ऑब्लिगेशन निभाने थे. यानी फ्रांसीसी कंपनियों को सौदे की 50 फीसदी राशि भारतीय निजी और सरकारी डिफेंस कंपनियों के साथ ज्वाइंट वेंचर में लगानी थी. इस सौदे के तुरंत बाद अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप और राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन के बीच ज्वाइंट वेंचर का ऐलान किया और कहा कि ऑफसेट कांट्रेक्ट में इनकी बड़ी हिस्सेदारी होगी. इसी पर कांग्रेस को आपत्ति है.

    कांग्रेस ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाया. आखिर ऑफसेट डील के तुरंत बाद ज्वाइंट वेंचर कैसे बन गया. उस पर से अनिल की कंपनी को फाइटर प्लेन बनाने का कोई अनुभव नहीं है. विमान बनाने का ठेका हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से लेकर अनिल के रिलायंस ग्रुप को दे दिया गया.

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