रेल पार्टियों पर कब्जा करके गुर्जरों की आंदोलन करने की शैली पुरानी है
रेल पार्टियों पर कब्जा करके गुर्जरों की आंदोलन करने की शैली पुरानी है(फोटो: ANI)
  • 1. 13 साल पुराना है गुर्जर आरक्षण आंदोलन
  • 2. क्या है गुर्जर समुदाय की मांग?
  • 3. सरकार ने क्या एक्शन लिया?
  • 4. क्यों नहीं हो पाई गुर्जरों की मांग पूरी?
  • 5. गुर्जरों के आंदोलन का तरीका वही पुराना!
गुर्जर समुदाय आखिर क्यों बार-बार आंदोलन करने लगता है?

राजस्थान में गुर्जर आंदोलन एक बार फिर जोर पकड़ता जा रहा है. नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 5 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर इस आंदोलन ने राज्य और केंद्र सरकार की नाक में दम कर दिया है.

लेकिन गुर्जरों का ये कोई पहला आंदोलन नहीं है. पिछले 13 सालों में ये छठा मौका है, जब आंदोलनकारी रेल पटरियों पर बैठकर सरकार से आरक्षण की मांग कर रहे हैं. पिछले एक दशक में ये आंदोलन कभी नेशनल हाइवे पर उतरा, तो कभी रेल पटरियों पर जम गया. लेकिन अभी तक इस आंदोलन को अपनी मंजिल न मिल सकी.

8 फरवरी से गुर्जरों ने राजस्थान के सवाई माधोपुर के मलारना रेलवे स्टेशन के पास पटरियों पर अपना कब्जा जमाकर छठी बार आंदोलन शुरू किया. आंदोलनकारी पटरी पर ही टैंट लगाकर बैठ गए हैं, जिस कारण दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर खासा असर पड़ा है.

आइए जानते हैं, आखिर क्यों बार-बार आंदोलन करने लगता है गुर्जर समुदाय? क्या है इतिहास, क्यों नहीं हो पाई गुर्जरों की मांग पूरी?

  • 1. 13 साल पुराना है गुर्जर आरक्षण आंदोलन

    रेल पार्टियों पर कब्जा करके गुर्जरों की आंदोलन करने की शैली पुरानी है
    सरकारी प्रॉपर्टी को आग के हवाले करके गुर्जरों ने अपने आंदोलन को खूब हवा दी है
    (फोटो: ट्विटर)

    देश में आरक्षण की चिंगारी तो जब-तब भड़कती ही रही है. लेकिन राजस्थान में गुर्जरों ने सबसे पहले आरक्षण के लिए आंदोलन की शुरुआत साल 2006 में की थी. तब से अब तक गुर्जर छह बार आंदोलन कर चुके हैं. 2006 के बाद 2007, 2008, 2010, 2015 और अब 2019 में गुर्जरों का आंदोलन भड़क उठा है.

    इस बीच राज्य और केंद्र में अलग-अलग पार्टियों की सरकारें रहीं. लेकिन कोई भी सरकार गुर्जरों की इस मांग का कोई स्थाई समाधान नहीं ढूंढ पाई.

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