अतीत के आईने में आरक्षण, जानिए कैसे कमजोर है ‘आर्थिक’ आधार
अतीत के आईने में आरक्षण, जानिए कैसे कमजोर है ‘आर्थिक’ आधार(फोटोः The Quint)
  • 1. सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है आरक्षण का आर्थिक आधार
  • 2. आर्थिक आधार पर आरक्षण की कई कोशिशें रही हैं नाकाम
  • 3. जाटों को आरक्षण देने की कोशिशें भी हो चुकी हैं फेल
  • 4. आरक्षण पर संवैधानिक स्थिति
  • 5. कालेलकर आयोग
  • 6. मंडल आयोग
  • 7. आरक्षण की अधिकतम सीमा
  • 8. सबसे पहले कब उठी आरक्षण की मांग
  • 9. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आरक्षण की मांग
  • 10. न्यायिक समीक्षा के दायरे में होगा संविधान में संशोधन
अतीत के आईने में आरक्षण, जानिए कैसे कमजोर है ‘आर्थिक’ आधार

केन्द्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण लागू करने की पहल की है. अब इसके लिए संविधान में संशोधन की पहल होगी. दोनों सदनों में आवश्यक दो तिहाई बहुमत के साथ इसे पारित करना होगा. यह टेढ़ी खीर है. फिर भी, अगर यह लागू हो जाता है तो यह न्यायिक समीक्षा के दायरे में होगा और वहां भी इसे हरी झंडी मिल पाना मुश्किल लगता है.

  • 1. सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है आरक्षण का आर्थिक आधार

    संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण का जिक्र नहीं है। नरसिम्हा राव सरकार ने 25 सितंबर 1991 को सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण लागू किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार केस में इसे खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था.

    • आरक्षण का आधार आय व संपत्ति नहीं हो सकता
    • आरक्षण समूह को है, व्यक्ति को नहीं
    • आर्थिक आधार पर आरक्षण समानता के मूल अधिकार का उल्लंघन है
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