क्या है सिंधु जल समझौता?
क्या है सिंधु जल समझौता?(फोटो: द क्विंट)
  • 1. क्या है सिंधु जल समझौता?
  • 2. पानी रोके जाने का पाकिस्तान पर क्या होगा असर?
  • 3. क्या है नितिन गडकरी के बयान का मतलब?
  • 4. अपने हिस्से का कितना पानी इस्तेमाल करता है भारत?
पाकिस्तान को क्या वाकई प्यासा कर देगा भारत? जानिए सिंधु नदी समझौता

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी कह रहे हैं कि भारत अब पाकिस्तान की तरफ जाने वाले अपने हिस्से के पानी को रोक लेगा. पुलवामा आतंकी हमले के बाद इसे पाकिस्तान के खिलाफ भारत के बड़े कदम के तौर पर देखा जाने लगा है.

नितिन गडकरी के मुताबिक, ये उनका नहीं बल्कि भारत सरकार का फैसला है. गडकरी के बयान के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर हुआ सिंधु जल समझौता चर्चा में आ गया. समझिए क्या है पूरा मामला और इसका पाकिस्तान पर असर:

  • 1. क्या है सिंधु जल समझौता?

    भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद दोनों देशों के बीच साल 1960 में 6 नदियों के इस्तेमाल को लेकर एक समझौता हुआ था. इसे ही सिंधु जल समझौता कहा जाता है. इस समझौते पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे.

    जल समझौते में सिंधु घाटी की जिन नदियों को शामिल किया गया है, वो तिब्बत से निकलकर भारत होते हुए कराची (पाकिस्तान) के दक्षिण में अरब सागर में जाकर मिलती हैं. ये नदियां हैं- सिंधु, झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलुज.

    वर्ल्ड बैंक के हस्तक्षेप पर हुए सिंधु जल समझौते में 6 नदियों में से 3 पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम और चेनाब) पाकिस्तान को दे दी गईं, जबकि 3 पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास और सतलुज) भारत को मिलीं. हालांकि, भारत को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पश्चिमी नदियों का पानी इस्तेमाल करने का सीमित अधिकार भी मिला. समझौते में यह भी कहा गया है कि कुछ विशेष मामलों को छोड़कर, भारत पश्चिमी नदियों पर कोई स्टोरेज सिस्टम या इरीगेशन सिस्टम नहीं बना सकता.

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