ADVERTISEMENT

जानिए कितना फायदेमंद होता है प्रसाद में मिलने वाला ‘पंचामृत’

Updated
Fit Hindi
4 min read
जानिए कितना फायदेमंद होता है प्रसाद में मिलने वाला ‘पंचामृत’

रोज का डोज

निडर, सच्ची, और असरदार खबरों के लिए

By subscribing you agree to our Privacy Policy

बचपन से ही हर पूजा के बाद मुझे प्रसाद में मिलने वाले पंजीरी (आटे को भुन कर और उसमें मेवे और चीनी मिलाकर तैयार की गई डिश) और पंचामृत का इंतजार रहता था. पंचामृत, जिसमें शहद की मिठास, दही की खटास, घी और दूध का स्वाद सब एकसाथ मिलता है. एक चम्मच पंचामृत हमेशा मुझे पूजा, रीति-रिवाज और पारिवारिक कार्यक्रम की याद दिलाता है.

हिंदू धर्म में किसी भी पूजा के दौरान पंचामृत या पंचामृतम जरूरी होता है. ये भगवान को लगाए जाने वाला पवित्र भोग है और इसका अभिषेक में भी प्रयोग होता है. पंचामृत दो शब्दों से मिलकर बना है, पंच का मतलब है पांच और अमृत का मतलब अमरता देने वाला द्रव.

महाभारत के मुताबिक पंचामृत समुद्र मंथन, जिसे क्षीर सागर मंथन भी कहते हैं, के दौरान निकली चीजों में से एक था.

ADVERTISEMENT

दूध, शहद, दही, चीनी और घी के मिश्रण को देवताओं का पेय कहते हैं. पंचामृत में प्रयोग होने वाली सभी सामग्रियों के अपने प्रतीकात्मक अर्थ हैं.

दूध शुद्धता और धर्मपरायणता का प्रतीक है, मधुमक्खियों द्वारा पूर्ण समर्पण और सहयोग से तैयार शहद मीठी वाणी और एकता का प्रतीक है. चीनी मिठास और आनंद का प्रतीक है, दही समृद्धि दर्शाती है और घी ताकत और जीत के लिए है.

सेहत के लिए फायदेमंद है ये पंचामृत

आयुर्वेद के अनुसार ये पांच चीजें जब सही अनुपात में ली जाती हैं, तो सेहत को बहुत फायदा पहुंचाती हैं.

पंचामृत सप्त धातु का पोषण करता है- सात शारीरिक ऊतक, शुक्र धातु (प्रजनन ऊतक), मज्जा धातु (अस्थि मज्जा और तंत्रिका ऊतक), अस्थि धातु (हड्डी, दांत), मेदस धातु (वसायुक्त ऊतक), ममसा धातु (मांसपेशियों के ऊतक), रक्त धातु (रक्त) और रस धातु (शक्ति, प्रतिरक्षा और जीवन शक्ति के लिए प्लाज्मा).

ADVERTISEMENT
ये पित्त दोष को संतुलित करता है, इम्यूनिटी में सुधार लाता है, ब्रेन फंक्शन, याददाश्त और रचनात्मक क्षमता को बढ़ाता है. यह रंग साफ करता है और बालों को स्वस्थ रखता है.

प्रेग्नेंट महिलाएं अगर इसका सेवन करती हैं, तो इससे उनको और उनके होने वाले बच्चे की सेहत अच्छी होती है.

पंचामृत के पांच अमृत

दूध

पारंपरिक तौर पर पंचामृत गाय के दूध से मनाया जाता है.
(फोटो: iStock)

पारंपरिक तौर पर पंचामृत गाय के दूध से मनाया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार गाय का दूध शरीर और मन को ठंडक प्रदान करता है. ये ओज बढ़ाता है, जो सेहतमंद जीवन, चमक, शक्ति, जीवन शक्ति, इम्यूनिटी, मानसिक और भावनात्मक कल्याण के लिए जरूरी ऊर्जा है.

ADVERTISEMENT

दही

दही ही एकमात्र ऐसी किण्वित (फर्मेंटेड) चीज है, जिसे आयुर्वेद में सात्विक माना जाता है. ये एक प्रोबायोटिक है, जो पाचन में सुधार करता है और वात दोष को संतुलित करता है.

शहद

शहद पाचन में सुधार लाता है, रंग साफ करता है और स्किन को चिकना बनाता है.
(फोटो: iStock)

आयुर्वेद के अनुसार शुद्ध शहद में सभी जरूरी एंजाइम होते हैं. शहद पाचन में सुधार लाता है, रंग साफ करता है और स्किन को चिकना बनाता है. ये आसानी से पच जाता है और सेवन करते ही रक्त में मिल जाता है. शहद अक्सर अनुपान के तौर पर इस्तेमाल होता है यानी आयुर्वेदिक दवाओं का वाहक या माध्यम बनता है.

चीनी

चीनी मधुरता और आनंद का प्रतीक है. आयुर्वेद मिश्री का इस्तेमाल करने को कहता है. ये कई आयुर्वेदिक नुस्खों और चूर्ण में इस्तेमाल होता है. मिश्री शरीर को ठंडक देता है.

घी

आयुर्वेद का सबसे कीमती फूड आइटम है, जिसमें शरीर और मन की चिकित्सा करने का गुण है. घी विटामिन ए, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंड्स से भरपूर होता है.

ADVERTISEMENT

पंचामृत तैयार करने का पारंपरिक तरीका

पंचामृत बनाना बेहद आसान है और इसमें कुछ भी पकाने की जरूरत नहीं होती.

पंचामृत तैयार करने के लिए ये सामग्रियां लें:

  • 4-5 चम्मच गाय का दूध

  • 1 चम्मच चीनी

  • 1 चम्मच शहद

  • 1 चम्मच दही

  • 2 चम्मच घी

ये सभी सामग्रियां चांदी के बर्तन में अच्छी तरह मिलाएं. ये चीजें जब आपस में सही अनुपात में मिलाई जाती हैं, तो एक-दूसरे के गुण में सुधार लाती हैं.

आयुर्वेद के अनुसार घी और शहद कभी भी एक समान मात्रा में नहीं मिलाना चाहिए.

पारंपरिक तौर पर पंचामृत चांदी के बर्तन में तैयार किया जाता है. इस धातु में एंटीमाइक्रोबियल, एंटीवायरल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और जख्म को ठीक करने का गुण बताया जाता है.

ADVERTISEMENT

पंचामृत तैयार करने की मूल विधि समान है, लेकिन कुछ क्षेत्रीय विविधताएं हो सकती हैं. कुछ स्थानों पर पंचामृत में तुलसी के पत्ते, सूखे मेवे और केले डाले जाते हैं. पंचामृत कब तक ठीक रहता है, ये जलवायु और मौसम पर निर्भर करता है.

सर्दियों में ये 12 घंटे तक अच्छा रहता है, लेकिन गर्मियों के मौसम में ये कुछ घंटों में ही खराब हो जाता है.

पंचामृत धार्मिक समारोह के लिए जरूरी होता है, लेकिन इसका सेवन रोज किया जा सकता है. आयुर्वेद प्रेग्नेंसी के 9 महीनों के दौरान रोजाना पंचामृत लेने की सलाह देता है.

पंचामृत, जीवन के लिए अमृत समान है, जिसमें पोषण, एनर्जी, अच्छी सेहत और खुशी देने की क्षमता है. अच्छी सेहत के लिए आप भी इस स्वादिष्ट और आयुर्वेदिक पेय का आनंद लें.

(नूपुर रूपा एक फ्रीलांस राइटर हैं और मदर्स के लिए एक लाइफ कोच हैं. वे पर्यावरण, फूड, इतिहास, बच्चों के पालन-पोषण और यात्रा जैसे विषयों पर लेख लिखती हैं.)

(ये लेख आपकी सामान्य जानकारी के लिए है, यहां किसी बीमारी के इलाज का दावा नहीं किया जा रहा, बिना अपने डॉक्टर की सलाह लिए कोई उपाय न करें. स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए फिट आपको डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह देता है.)

(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram चैनल से जुड़े रहिए यहां)

ADVERTISEMENT
Published: 
सत्ता से सच बोलने के लिए आप जैसे सहयोगियों की जरूरत होती है
मेंबर बनें
500
1800
5000

or more

प्रीमियम

3 माह
12 माह
12 माह
मेंबर बनने के फायदे
अधिक पढ़ें
ADVERTISEMENT
क्विंट हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

120,000 से अधिक ग्राहक जुड़ें!
ADVERTISEMENT
और खबरें
×
×