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NMC LOGO: नेशनल मेडिकल कमीशन के लोगो में 'आयुर्वेद के देवता', आलोचक क्या कहा रहे?

NMC के आयुर्वेद देवता वाले नए लोगो की चिकित्सा जगत में 'अनसेक्युलर' होने के कारण आलोचना हो रही है.

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राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (NMC) के नए लोगो पर हिंदू देवता धन्वंतरि की तस्वीर बनी हुए है. मेडिकल फील्ड के सदस्यों ने इसकी कड़ी आलोचना की है और कई लोगों ने इसे 'अनसेक्युलर' बताया है.

नए लोगो में धन्वंतरि, एक हिन्दू देवता जो आयुर्वेद से संबंधित हैं, की इमेज और 'इंडिया' के बजाय 'भारत' शब्द शामिल है. अधिकारियों के अनुसार, एक साल से उपयोग में है और अब केवल इमेज को स्पष्ट करने के लिए इसे नया रूप दिया गया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार NMC के एक अधिकारी ने कहा, "पहले, यह काले और सफेद रंग में था और इसलिए, प्रिंट आउट में दिखाई नहीं देता था. हमने बस लोगो में एक रंगीन फोटो का उपयोग किया है."

हालांकि, बदलाव की घोषणा करने वाला कोई ऑफिशियल नोटिफिकेशन नहीं आया है. पब्लिक नोटिस में ये हाल ही में आया जब नए लोगो को NMC के सोशल मीडिया पोस्ट पर ऑनलाइन दिखाया गया.
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'पूरी तरह से आपत्तिजनक'

'रीवैम्प' किए गए 'लोगो' की मेडिकल फील्ड के सदस्यों ने आलोचना की. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के केरल चैप्टर ने एक बयान जारी कर NMC के कदम को "पूरी तरह से आपत्तिजनक" बताया.

बयान में जहां लोगो को वापस लेने का आह्वान किया गया था, वहीं उसमें आगे लिखा था, "एक धार्मिक प्रतीक को लोगो पर इस्तेमाल करना एक ऐसे संगठन के लिए खतरनाक है, जिसे वैज्ञानिक सोच के साथ धर्मनिरपेक्ष रूप से काम करना चाहिए. यह निर्णय मॉडर्न साइंटिफिक कम्युनिटी के लिए अस्वीकार्य है और IMA मांग करता है कि इसे तुरंत वापस लिया जाए."

NMC के आयुर्वेद देवता वाले नए लोगो की चिकित्सा जगत में 'अनसेक्युलर' होने के कारण आलोचना हो रही है.

चिकित्सा बिरादरी के दूसरे लोगों ने भी ऑनलाइन बदलाव पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है, 'X' पर एक डॉक्टर ने कहा, "इससे भी अधिक दुख की बात यह है कि NMC के मॉडर्न मेडिसिन के लोगो पर अब आयुर्वेद, जो एक तरह का अल्टरनेट मेडिसिन है, के संस्थापक धन्वंतरि की तस्वीर होगी."

डॉ. फिलिप एबी को ऑनलाइन 'द लिवरडॉक' के नाम से जाना जाता है. वे आयुर्वेद और हर्बल उपचारों में 'अल्टरनेट मेडिसिन' और यूएनसिएंटिफ़िक प्रोसेस का आह्वान करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने भी इस कदम की आलोचना करते हुए कड़े शब्दों में एक पोस्ट डाला, जिसमें कहा गया, "यदि NMC सदस्य, जिसने यह काम किया है, में थोड़ी भी शर्म है, तो वे लोगो को बदल कर कोई दूसरा सेक्युलर लोगो चुनेंगे... जो धर्म और आस्था से नहीं, बल्कि विज्ञान और रैशनैलिटी से प्रेरित हो."

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अन्य लोगों ने आशंका व्यक्त की है कि यह कदम "मेडिकल शिक्षा में हिंदुत्व को शामिल करने" की ओर एक और कदम हो सकता है.

दूसरी ओर, कुछ लोगों ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि मेडिसिन का अंतरराष्ट्रीय सिंबल, जिसका इस्तेमाल WHO के एम्ब्लम पर भी किया जाता है, भी एक धार्मिक प्रतीक है (एस्क्लेपियस की छड़ी - हीलिंग के ग्रीक देवता).

यह पहली बार नहीं है जब NMC को बड़े बदलावों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है.

पिछले साल फरवरी में NMC को मेडिकल कॉलेज के करिक्युलम में बदलावों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था, जिसमें हिप्पोक्रेटिक शपथ की जगह ‘चरक शपथ’ को शामिल करना भी था..

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