जैक मा के बाद भी तरक्की की सीढ़ियां चढ़ती रहेगी अलीबाबा
जैक मा
जैक मा(फोटो: फेसबुक/Aung Myo Naing)

जैक मा के बाद भी तरक्की की सीढ़ियां चढ़ती रहेगी अलीबाबा

जैक मा अगले हफ्ते चीन की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा का चेयरमैन पद छोड़ देंगे. हालांकि , इनोवेशन को बढ़ावा देने की संस्कृति से स्टार्टअप और दिग्गज ऑनलाइन शॉपिंग साइट अलीबाबा को नए युग में भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी.

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जैक मा अपने 55 वें जन्मदिन के मौके पर मंगलवार को कंपनी से विदा हो रहे हैं.

जैक मां की संपत्ति 41 अरब डॉलर है. वो अपनी बेशुमार दौलत शिक्षा पर खर्च करना चाहते हैं. आमतौर पर बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में करिश्माई फाउंडर्स के चले जाने के बाद शेयर कीमतों में उतार-चढ़ाव और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है लेकिन अलीबाबा के साथ ऐसा नहीं है.

जैक मा अलीबाबा को आगे ले जाने वाली ताकत है और कंपनी के लिए एंबेसडर की तरह है. उन्होंने दो साल पहले अलीबाबा की एजीएम में माइकल जैकसन से प्रेरित डांस किया था. उम्मीद है कि वह सलाहकार की भूमिका में बने रह सकते हैं.

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अभी भी इनोवेशन में लगे हैं जैक

पेचिंग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और इक्विटी निवेशक जैफरी टाउसन ने कहा , "जैक मा ने अलीबाबा में मजबूत कल्चर बनाया है और वे अब भी इनोवेशन में लगे हुए हैं "

उन्होंने कहा कि जैक मा की जगह सीईओ डेलियल झांग और कंपनी के सह - संस्थापक और कार्यकारी वाइस चेयरमैन जोसेफ त्साई जैसी शख्सियतें प्रौद्योगिकी कंपनी के उत्तराधिकारी योजना के लिए " स्वर्ण मानक " साबित हो सकते हैं।

सिर्फ 2000 डॉलर के कर्ज से शुरू की थी कंपनी

जैक मा ने चाइना टेलीकॉम के साथ ज्वाइंट वेंचर शुरू किया लेकिन यह चला नहीं. जैक मा अब अपनी ई-कॉमर्स बनाने का सपना देखने लगे.1999 में उन्होंने अपने अपार्टमेंट्स के 18 लोगों को जमा किया और उनसे अपने सपने के बारे में बात की. 80,000 डॉलर जमा हुए. इरादा ग्लोबल कंपनी बनाने का था. इसलिए नाम भी ग्लोबल रखा गया- अलीबाबा. अलीबाबा बोलने में आसान था. सिम-सिम खुल जा जैसा. छूते ही खुल जाए.

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)


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