संजय लीला ‘बैन-शाली’ के नाम खुला खत

..सेंसर से ओके लेकर भी जो फंस जाए वो भंसाली...

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भूतझोलकिया
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संजय द’लीला बैन-शाली,प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, संगीतकार और छोटे बाल वाली दाढ़ी के मालिक.
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सेवा में,

संजय द’लीला बैन-शाली,

प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, संगीतकार और छोटे बाल वाली दाढ़ी के मालिक,

मुंबई फिल्म इंडस्ट्री

विषय: प्रीमियर पद्‍मिनी मतलब रिलीज ऑफ पद्मावती

माननीय संजय द’लीला बैन-शाली,

चश्मे के अंदर घुस के प्रणाम!

मैं आपका बहुत पुराना, आपकी पहली फिल्म खामोशी के टाइम से आपका फैन हूं. तब से लेकर आज तक आपने जितनी भी, जैसी भी फिल्में बनाई, मैंने सब देखी हैं, यहां तक कि सांवरिया और गुजारिश जैसी फिल्मों में भी मैंने जान पर खेल कर थियेटर में ताली बजाई है.

अभी भी मुझे दिसंबर 2017 का बेसब्री से इंतजार है, जब आपकी पद्मावती रिलीज होगी. लेकिन इसी पॉइंट पर आकर मेरी बेसब्री के बेर मुझे खट्टे लगने लगते हैं. क्या हम पद्मावती देख पाएंगे? जिस हिसाब से लोग पद्मावती के पीछे पड़े हैं, उन्हें देख कर एक बार को अलाउद्दीन खिलजी भी पीछे हट जाता.

वैसे गलती भी तो आप ही की है! जब भी आपने रणवीर और दीपिका के साथ फिल्म बनाई, वो मुसीबत में फंसी ही है. चाहे रामलीला हो या बाजीराव मस्तानी हो.

बैन-शाली जी गलत मत समझिएगा, अगर इसी फिल्म में आपने बतौर हीरो-हिरोइन हरमन बावेजा और शमिता शेट्टी को रखा होता, तो आपकी फिल्म के खिलाफ मक्खी भी नहीं उड़ती. वो बात अलग है कि फिल्म देखने भी सिर्फ मक्खियां आती. लेकिन चूंकि आपने फिल्म इंडस्ट्री के बड़े स्टार्स को लिया तो ये बात तो आप भी समझते हैं कि बड़ी चीजों पे निशाना आसानी से लगता है. वो भी ऐसी सेना का जो बॉर्डर के अलावा हर कहीं उधम मचाते हैं.

हैरानी की बात ये है कि पद्मावती फिल्म के खिलाफ जो लोग आवाज उठा रहे हैं, उनकी आवाज देश में लड़कियों पर हो रहे अत्याचार के बारे में कभी सुनाई नहीं दी, और शायद यही वजह है कि उन इलाकों में अक्सर लड़कियां रिलीज होने से पहले ही सेंसर हो जाती हैं.

भला 14वीं शताब्दी में हुई बात को लेकर आज इनकी इज्जत की नकसीर क्‍यों फूट रही है. अगर इन्‍हें अलाउद्दीन खिलजी और पद्मावती पर इतनी आपत्ति है तो फिर तो इन्हें उन सारे मुगल शासकों से भी दिक्कत होनी चाहिए, जिन्होंने राजस्थान में रिश्ते बनाए!

इन विरोधियों का बस चले, तो ये बाज बहादुर और रानी रूपमति का भी डाइवोर्स करवा दें और उन पर बनी भारत भूषण की 1957 वाली फिल्म भी रिलीज होने के बाद सेंसर कर देते.

मुझे तो रानी पद्मावती के बारे में सोच कर बड़ा दुख होता है, जिन्‍हें कहानी में भी आग में जान देनी पड़ी और इतने सैकड़ों साल बाद भी फिल्मी किस्मत भी ऐसी फूटी की गुंडे पद्मावती दिखाते थियेटर को आग में झोंकने के लिए तैयार हैं.

फिल्म के एक्टर भी परेशान घूम रहे हैं, दीपिका रिग्रेशन का शिकार हो गयी हैं, रणवीर इस बात से दुखी हैं कि दीपिका और उनके भाप से भरपूर सीन कट गये और बचे शाहिद, तो रंगून फिल्म के फ्लॉप का सदमा शाहिद की शक्ल पर पद्मावती में भी साफ नजर आ रहा है.

संजय संजय द’लीला बैन-शाली जी, चाहे कोई आपको कितना भी मारे, पीटे, धकियाए, आप पद्मावती को टाइम से ही रिलीज कीजिएगा. ये पूरी फिल्म इंडस्ट्री की आजादी की जंग है, जिसकी युद्ध भूमि सिर्फ आपके सर पर है. ट्विटर, फेसबुक, इंटरनेट पर हम संभाल लेंगे आप बस शारीरिक तौर पर डटे रहिएगा.

आपका शुभ-चिंतित फैन,

अनंत

P.S: फिल्म को तलवार की नोक पर रिलीज करे वो भंसाली,

सेंसर से ओके लेकर भी जो फंस जाए वो भंसाली,

जिसकी पद्मावती, रामलीला और बाजीराव का सीक्वल लगे…वो भंसाली

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