सरकार, मंत्री, सांसद, प्रवक्ता, Koo ऐप पर जाने को क्यों हैं आतुर?

सरकारी एजेंसियों से लेकर बीजेपी के दिग्गज नेता कू एप पर

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सरकार, मंत्री, सांसद, प्रवक्ता, Koo ऐप पर जाने को क्यों हैं आतुर?

अकाउंट्स की ब्लॉकिंग को लेकर ट्विटर के साथ जारी गतिरोध के बीच भारत सरकार ने कू (Koo) का इस्तेमाल कर ट्विटर को निशाने पर लिया है. वहीं दूसरी तरफ अब सरकारी एजेंसियों से लेकर बीजेपी के दिग्गज नेता कू एप पर भी अकाउंट खोल रहे हैं. सरकारी संस्था नीति आयोग से लेकर बीजेपी के दिग्गज सांसदों, मंत्रियों ने अपने मौजूदा ट्विटर अकाउंट पर कू का प्रचार किया है.

सरकारी संस्थान नीति आयोग ने ट्विटर पर लिखा-

"भारत से, दुनिया के लिए. नीति आयोग कू एप का हिस्सा होने को लेकर उत्साहित है. आत्मनिर्भर भारत के एप इनोवेशन चैलेंज के तहत सोशल केटेगरी में ये एप विजेता रहा है. नीति आयोग से जुड़े कामों के देखने के एप पर आएं. स्वागत नहीं करोगे हमारा"

भारतीय जनता पार्टी के सबसे युवा सांसद तेजस्वी सूर्या ने सख्त लहजे में लिखा है कि- "ट्विटर खुद को भारतीय कानूनों के ऊपर देखता है, वो अपनी मर्जी से तय कर रहे हैं कि क्या मानना है और क्या नहीं. मैं ये मुद्दा कल लोकसभा के शून्य काल में उठाने का तय किया था, लेकिन कल शून्यकाल आयोजित ही नहीं हुआ. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय से गुजारिश है कि सख्ती से काम ले."

इसके अलावा कई सारे दूसरे बीजेपी नेताओं, प्रवक्ताओं ने कू एप के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है.

बता दें कि ट्विटर ने बुधवार को बताया कि भारत सरकार ने उसे जिन अकाउंट्स पर रोक लगाने के लिए लिस्ट भेजी थी, उनमें से उसने कुछ पर ही कार्रवाई की है. ट्विटर ने इस मामले को लेकर एक ब्लॉग पोस्ट में अभिव्यक्ति की आजादी पर भी जोर दिया.

क्या है कू, कब लॉन्च हुआ था?

कू ट्विटर की तरह ही एक माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म है. यह वेबसाइट के तौर पर उपलब्ध होने के साथ-साथ iOS और गूगल प्ले स्टोर पर ऐप के तौर पर भी मौजूद है. इस पर कैरेक्टर लिमिट 400 की है. कू पर ऑडियो और वीडियो आधारित पोस्ट भी किए जा सकते हैं. यह यूजर्स को ट्विटर की तरह हैशटैग के इस्तेमाल की भी सुविधा देता है. इस पर बाकी यूजर्स को @ सिंबल का इस्तेमाल करके टैग भी किया जा सकता है, जैसा कि ट्विटर पर भी होता है.

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