ADVERTISEMENT

International Men's Day: मर्दों की दुनिया में मर्द को बहुत दर्द होता है

International Men's Day: मर्द भी पितृसत्तात्मक सोच के शिकार होते हैं.

Published

रोज का डोज

निडर, सच्ची, और असरदार खबरों के लिए

By subscribing you agree to our Privacy Policy

ADVERTISEMENT

International Men's Day: 'लड़के रोते नहीं' से लेकर 'घर चलाना मर्द की जिम्मेदारी होती है...', समाज के ये 'अनकहे' नियम बताते हैं कि मर्द भी पितृसत्तात्मक सोच के शिकार होते हैं. पुरुषों को अपनी भावनाओं को खुलकर कहने नहीं दिया जाता, हाउस हसबैंड बनने पर उन्हें ताने दिए जाते हैं.

ADVERTISEMENT

हमारे समाज में पुरुषों को लेकर भी एक अजीब तरह की सोच बन गई है. अगर आंखों से आंसू छलक पड़े तो आपको कमजोर समझा जाता है. अगर आप अपना परिवार नहीं चला पा रहे हैं तो लोग नकारा कहने लगते हैं. अगर अपनी भावना खुलकर बता दी तो हंसी के पात्र बना दिए जाते हैं. ऐसे में इंटरनेशनल मेंस डे पर क्विंट के पत्रकार कह रहे हैं कि पितृसत्ता की इन जंजीरों को तोड़ दें.

क्यों मनाते हैं International Men's Day?

पुरुषों के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनकी सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों को उजागर करने के लिए 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है.

(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram चैनल से जुड़े रहिए यहां)

ADVERTISEMENT
सत्ता से सच बोलने के लिए आप जैसे सहयोगियों की जरूरत होती है
मेंबर बनें
500
1800
5000

or more

प्रीमियम

3 माह
12 माह
12 माह
मेंबर बनने के फायदे
अधिक पढ़ें
ADVERTISEMENT
क्विंट हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

120,000 से अधिक ग्राहक जुड़ें!
ADVERTISEMENT
और खबरें
×
×