शिक्षा नीति: तीन-भाषा फॉर्मूला क्या है?हर वो बात जो जानना जरूरी है

क्या छात्रों को अब अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करनी होगी?

Published30 Jul 2020, 11:15 AM IST
शिक्षा
3 min read

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने पांचवी क्लास तक की पढ़ाई के लिए निर्देशों का माध्यम मातृभाषा या स्थानीय भाषा में होने पर 'जोर' दिया है. वहीं आठवीं क्लास और उससे आगे के लिए इन्हें जारी रखना का सुझाव दिया गया है.

इसका तीन-भाषा फॉर्मूले से क्या लेना देना है? क्या छात्रों को अब अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करनी होगी? इस नीति के बारे में अब तक की जानकारी ये रही.

तीन-भाषा फॉर्मूला क्या है?

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) सुझाव देती है कि अब सभी छात्र अपने स्कूलों में इस 'फॉर्मूले' के तहत तीन भाषाएं सीखेंगे. इन तीन भषाओं में से कम से कम दो भारत की नेटिव होनी चाहिए.

उदाहरण के लिए, मुंबई में अगर कोई छात्र मराठी और अंग्रेजी सीख रहा है, तो उसे तीसरी भाषा कोई भारतीय पढ़नी होगी.

क्या NEP सभी राज्यों में हिंदी पढ़ने को अनिवार्य बनाती है?

पिछले साल जारी हुए NEP के ड्राफ्ट के मुताबिक, एक पैराग्राफ में ये कहा गया था कि तीन-भाषा फॉर्मूले के तहत, हिंदी पढ़ना/पढ़ाना ऐसे राज्यों में अनिवार्य होगा जहां ये सामान्य तौर पर बोली नहीं जाती है. तमिलनाडु जैसे गैर-हिंदी भाषी राज्यों के विरोध के बाद केंद्र ने हिंदी पढ़ने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया.

छात्र स्कूलों में कौनसी तीन भाषाएं पढ़ेंगे, ये कौन तय करेगा?

भाषा का चुनाव राज्य और छात्रों पर निर्भर करेगा. हालांकि, तीन भषाओं में से कम से कम दो भारत की नेटिव होना अनिवार्य है, और ये स्थानीय/क्षेत्रीय भाषा हो सकती हैं.

वहीं, शिक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि 'किसी भी छात्र पर कोई भाषा थोपी' नहीं जाएगी. लेकिन ये साफ नहीं है कि छात्र किस स्तर तक एक भाषा चुनने के लिए आजाद हैं.

क्या छात्र अब सभी विषय अपनी मातृभाषा में पढ़ेंगे?

'बहुभाषीयता और भाषा की ताकत' नाम के सेक्शन 5 में NEP कहती है कि 'जहां भी मुमकिन हो पाए, कम से कम क्लास 5 और हो सके तो क्लास 8 और उसके आगे तक पढ़ाने का माध्यम घर की भाषा/मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा हो.'

क्या इसका मतलब है कि इंग्लिश-मीडियम स्कूलों में पढ़ाने की भाषा बदल जाएगी?

जहां तक है ये नहीं बदलेगी. NEP में 'जहां भी मुमकिन हो पाए' का इस्तेमाल किया गया है. इसलिए स्कूलों में पहले वाली भाषा में ही पढ़ाई चलते रहने की संभावना है.

क्या ये पढ़ाने के माध्यम वाला नियम निजी और पब्लिक दोनों स्कूलों पर लागू होगा?

हां, NEP के मुताबिक ये दोनों ही स्कूलों पर लागू होगा.

NEP घर की भाषा/मातृभाषा/स्थानीय भाषा में पढ़ाए जाने पर क्या कहती है?

  • साइंस समेत सभी विषयों की उच्च-स्तर की टेक्सबुक इन भाषाओँ में उपलब्ध कराई जाएंगी.
  • जहां घर की भाषा में टेक्सटबुक मैटेरियल मौजूद नहीं है, वहां टीचरों और बच्चों के बीच पढ़ाई का माध्यम जहां तक मुमकिन हो घर की भाषा हो रहेगा.
  • टीचरों को द्विभाषीय पहुंच रखने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि जिन छात्रों की घर की भाषा पढ़ाई के माध्यम से अलग है उन्हें भी पढ़ाया जा सके. इसमें द्विभाषीय लर्निंग मैटेरियल भी शामिल होगा.

तीन-भाषा फॉर्मूले से जुड़े किन सवालों का जवाब NEP में नहीं मिला?

  • इंग्लिश-मीडियम स्कूल किस भाषा में पढ़ाएंगे?
  • उन बच्चों का क्या जिनके माता-पिता घर में दो अलग-अलग भाषा बोलते हैं? मातृभाषा किसे माना जाएगा?
  • क्या स्थानीय भाषा ऑटोमैटिक मातृभाषा बन जाएगी?
  • उन बच्चों का क्या जिनके पेरेंट्स की ट्रांसफर वाली नौकरी है? उनकी पढ़ाई की भाषा स्थानीय कैसे हो सकती है?
  • छात्रों को अपनी पढ़ाई की भाषा चुनने की कितनी आजादी मिलेगी?

कोरोनावायरस से जारी जंग के बीच तमाम अपडेट्स और जानकारी के क्लिक कीजिए यहां

(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram और WhatsApp चैनल से जुड़े रहिए यहां)

क्विंट हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

120,000 से अधिक ग्राहक जुड़ें!