40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले बिजनेस को GST से छूट
जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद राजस्व सचिव से गुफ्तगू करते वित्त मंत्री जेटली 
जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद राजस्व सचिव से गुफ्तगू करते वित्त मंत्री जेटली (फोटो:PTI)

40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले बिजनेस को GST से छूट

जीएसटी काउंसिल की बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने छोटे कारोबारियों को राहत की खबर दी है. 32वीं जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में वित्त मंत्री ने कई बड़े फैसले लिए. अब 40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन से मुक्ति मिल गई है. इससे पहले यह सीमा 20 लाख रुपये की थी. कई लाख छोटे कारोबारियों के लिए यह एक बड़ी राहत है.

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जीएसटी काउंसिल के बड़े फैसले

जीएसटी काउंसिल ने कारोबारियों के लिए कुछ बड़े फैसले लिए हैं. काउंसिल ने जीएसटी की सीमा में भी कई बदलाव किए हैं. इन बदलावों से सबसे ज्यादा फायदा छोटे राज्यों के व्यापारियों को मिलेगा. छोटे व्यापारी जीएसटी के दायरे में नहीं आएंगे.

अरुण जेटली ने कहा कि काउंसिल में रियल इस्टेट और लॉटरी पर जीएसटी को लेकर मतभेद सामने आने के बाद अब इस मामले के लिए 7 मंत्रियों का समूह बनाया गया है, इस मामले को अगली जीएसटी काउंसिल की बैठक में रखा जाएगा.  

बढ़ाई गई जीएसटी लिमिट

कारोबारियों के लिए जीएसटी काउंसिल की बैठक में सबसे बड़ी राहत यह दी गई है कि अब 40 लाख रुपये से ऊपर के सालाना टर्नओवर वाले कारोबारी ही जीएसटी के दायरे में आएंगे. पहले 20 लाख तक सालाना कमाई करने वाले व्यापारियों को जीएसटी के दायरे से छूट मिली थी. वहीं छोटे राज्यों में जहां पहले जीएसटी लिमिट 10 लाख थी उसे बढ़ाकर अब 20 लाख रुपये कर दिया गया है. इन छोटे कारोबारियों को अब जीएटी रजिस्ट्रेशन की झंझट से छुटकारा मिल जाएगा.

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कंपोजिशन स्कीम में बदलाव

जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में कंपोजिशन स्कीम की सीमा को बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये करने को भी मंजूरी दे दी गई है. इस स्कीम में यह नई सीमा 1 अप्रैल 2019 से लागू होगी. इसके अलावा कारोबारियों को एक और राहत दी गई है. अब अप्रैल से कारोबारियों को साल में एक ही रिटर्न भरना होगा. इसके अलावा हर तीन महीने में टैक्स फाइल करने की इजाजत दी गई है.

इसके अलावा केरल के लिए एक फीसदी आपदा सेस को भी मंजूरी दी गई है. केरल के बाढ़ प्रवाहित क्षेत्रों को दोबारा से विकसित करने के मकसद से यह फैसला लिया गया है. केरल को 2 साल तक के लिए यह सेस लगाने की इजाजत दी गई है.

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