NRC लिस्ट से बाहर लोगों पर कार्रवाई चाहते हैं लोग

एनआरसी की फाइनल सूचि आने के बाद असम के लोगों के बीच से आ रही है मिली जुली प्रतिक्रियाएं

Published02 Sep 2019, 04:16 PM IST
भारत
2 min read

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की अंतिम सूची जारी होने के अगले दिन रविवार को असम में इस ऐतिहासिक दस्तावेज के संदर्भ में विभिन्न मतों वाले लोगों ने अपने विचार साझा किए. असम समझौता होने के 34 सालों बाद राज्य में यह दस्तावेज जारी किया गया है. जहां कुछ लोग चाहते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार जल्द से जल्द अवैध विदेशियों की पहचान की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें निर्वासित कर दे, वहीं कुछ अन्य लोगों ने सूची से निकाले गए लोगों के लिए मानवीय पहलू देखने की अपील की.

हालांकि 31 अगस्त को जारी की गई एनआरसी की अंतिम सूची से 19,06,657 लोगों को निकाल दिया गया है, फिर भी उन लोगों को न हिरासत में लिया गया और न ही विदेशी घोषित किया गया है. सूची से निकाले गए लोगों को इस सूची के खिलाफ विदेशियों से संबंधित अधिकरण और उसके बाद उच्च अदालतों में अपील करने के लिए 120 दिनों का समय दिया गया है. एनआरसी की अंतिम सूची में 3,11,21,004 लोगों को शामिल किया गया है, जिन्हें उनके दस्तावेजों के आधार पर वैध पाया गया है.

“हम असम में अवैध विदेशियों के आंकड़ों से खुश नहीं हैं. और भी विदेशी हैं, जो एनआरसी में शामिल हो गए हैं. हालांकि, अब चूंकि एक कानूनी प्रक्रिया के बाद हमारे पास आंकड़े हैं तो सरकार को जल्द ही उनकी पहचान सुनिश्चित करने की औपचारिकता पूरी करनी चाहिए और उन्हें बाहर निकालने के लिए कदम उठाने चाहिए.” 
राजेन बरुआ(स्थानीय)

मानवीयता दिखाने की भी लोग कर रहे हैं वकालत

प्रसिद्ध विचारक हीरेन गोहैन ने कहा, ‘‘सरकार एनआरसी पर राजनीति करने की कोशिश कर रही है. हालांकि, एनआरसी पार्टी राजनीति से ऊपर है. हमें लंबी और थकाऊ प्रक्रिया के बाद एनआरसी मिली है. यह शत-प्रतिशत सही नहीं है, फिर भी एक संख्या के करीब पहुंचे हैं. ऐसी प्रक्रिया के बारे में शिकायत करना सही नहीं है.’’

गोहैन ने सभी लोगों से सूची से निकाले गए लोगों के साथ मानवीयता दिखाने की भी अपील की.

“अपनी नागरिकता सिद्ध करने में असफल हुए लोगों को नागरिकता देने का सवाल हालांकि नहीं है, लेकिन हमारे भीतर उनके लिए संवेदनाएं हैं. सरकार को उनके मामले संवेदनाओं और मानवीयता से देखने चाहिए और उनका कोई समाधान निकालना चाहिए.”
हीरेन गोहैन

‘इतने बड़े अभियान से दिक्कतें तो होंगी ही’

शिक्षाविद उदयादित्य भराली ने भी एनआरसी का स्वागत करते हुए कहा कि इतना बड़ा अभियान होने के कारण कुछ समस्याएं जरूर रही होंगी. भराली ने कहा, ‘‘एनआरसी ने कम से कम असम के लोगों को अवैध विदेशियों के प्रति रुख तो स्पष्ट बता दिया है.’’

उन्होंने सभी लोगों से राज्य की शांति के लिए खतरनाक गतिविधियों से दूर रहने की अपील की है. सीनियर पत्रकार हैदर हुसैन ने कहा कि एनआरसी के बाद असम के लोगों के पास कम से कम अवैध विदेशियों से संबंधित एक संख्या तो है.

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