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'मैं बिना डर के अब कहीं भी घूम सकता हूं': CAA के तहत नागरिकता पाने वाले क्या बोले?

CAA citizenship Certificates: केंद्र सरकार ने आवेदकों के मूल देश के बारे में अब तक नहीं बताया है.

Published
भारत
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"मैं 2013 से भारत में रह रही हूं, हम पाकिस्तान से आए थे...अब स्थिति बेहतर होगी क्योंकि नागरिकता मिल गई है. अब हमारे बच्चे पढ़ सकेंगे...हम नागरिकता के लिए PM मोदी और भारत का धन्यवाद करते हैं." ये बात नागरिकता प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले आवेदकों में से एक यशोदा ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कही.

दरअसल गृह मंत्रालय ने बुधवार, 16 मई को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA), 2019 के तहत आवेदन करने वाले 300 से अधिक लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र दिए हैं.

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गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा, दिल्ली में केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने कम से कम 14 लोगों को उनके प्रमाण पत्र सौंपे हैं. सरकार ने आवेदकों के मूल देश के बारे में नहीं बताया है.

'एक सपने के सच होने जैसा एहसास'

नागरिकता प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले आवेदकों में से एक हरीश कुमार ने बताया कि, "मैं पिछले 13-14 वर्षों से दिल्ली में रह रहा हूं. एक सपने के सच होने जैसा एहसास है, मैं बहुत खुश हूं. यह मेरे लिए एक नए जन्म जैसा है. मैं केंद्र सरकार का बहुत धन्यवाद करता हूं."

जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम की अधिसूचना जारी होने के करीब दो महीने बाद पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की गई.

सीएए के तहत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए बिना दस्तावेज वाले गैर-मुस्लिम प्रवासियों के लिए नागरिकता आवेदन की योग्यता अवधि 11 से घटाकर 5 वर्ष कर दी गई है.

सीएए को बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से प्रताड़ित गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान करने के लिए दिसंबर 2019 में अधिनियमित किया गया था. इनमें हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शामिल हैं.

'घर से बाहर नहीं निकल पाती थी'

नागरिकता प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले आवेदकों में से एक भावना ने बताया, "मुझे आज नागरिकता मिली है, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, अब हम आगे पढ़ सकेंगे... मैं 2014 में यहां आई थी. जब (CAA) पास हुआ था तब बहुत खुशी हुई थी...पाकिस्तान में हम लड़कियां पढ़ नहीं पाती थीं और घर से बाहर नहीं निकल पाती थी, अगर बाहर जाना होता था तो बुर्का पहन कर निकलती थीं..."

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'अब मेरे बच्चे पढ़ सकेंगे'

एक अन्य आवेदक अर्जुन ने कहा कि, "मैं 2014 में दिल्ली आया था, इससे पहले मैं 4 साल तक गुजरात में रहा...मुझे बहुत खुशी है कि मुझे नागरिकता मिल गई. मैं पढ़ाई नहीं कर सका क्योंकि मेरे पास सर्टिफिकेट नहीं था, मैं छोटी-मोटी नौकरियां कर रहा था, अब कम से कम मेरे बच्चे पढ़ सकेंगे...मैं पीएम मोदी और अमित शाह का आभारी हूं."

शीतल दास ने कहा कि, “मैं 2013 से यहां रह रहा हूं, लेकिन आज मुझे लगता है कि मैं इस देश का हूं. अब मैं इसे स्वतंत्र रूप से अपना कह सकता हूं और बिना किसी डर के कहीं भी घूम सकता हूं."

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