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गर्भपात की सीमा 20 से बढ़कर 24 हफ्ते, केंद्र सरकार ने कुछ मामलों में दी छूट

नए नियम इस साल मार्च में संसद में पारित मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत आते हैं.

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भारत
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<div class="paragraphs"><p>गर्भपात की सीमा 20 से 24 हफ्ते की</p></div>
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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 12 अक्टूबर को गर्भपात के लिए नए नियमों को नोटिफाई किया है, जिसके बाद अब कुछ मामलों में गर्भपात की सीमा 20 हफ्तों से बढ़ाकर 24 हफ्ते कर दिया गया है. मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) नियम, 2021 के मुताबिक, इन कैटेगरी में यौन उत्पीड़न, रेप, दिव्यांग महिलाएं शामिल हैं.

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नए कानून के तहत, इन महिलाओं को 24 हफ्ते तक गर्भपात की अनुमति दी गई है:

  • यौन उत्पीड़न, रेप, इंसेस्ट की शिकार

  • नाबालिग

  • प्रेगनेंसी के दौरान वैवाहिक स्थिति (विधवा या तलाक) में बदलाव

  • दिव्यांग महिलाएं

  • मानसिक रूप से अस्वस्थ्य महिलाएं

  • फीटल मैलफॉर्मेशन, जिससे जिंदगी का जोखिम होता है या बच्चा पैदा होता है तो वो गंभीर रूप से शारीरिक या मानसिक असामान्यताओं से पीड़ित हो सकता है

  • आपदा या आपातकालीन स्थिति

नए नियम इस साल मार्च में संसद में पारित मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत आते हैं.

इससे पहले, अगर 12 हफ्तों के अंदर गर्भपात कराना होता था तो इसके लिए एक डॉक्टर की राय की जरूरत होती थी, और अगर ये 12 से 20 सप्ताह के बीच किया जाता है तो दो डॉक्टरों की राय की जरूरत होती थी.

संशोधित अधिनियम में एक राज्य-स्तरीय मेडिकल बोर्ड का भी प्रावधान है, जो ये तय करने के लिए स्थापित किया जाएगा कि क्या फीटल मैलफॉर्मेशन मामलों में 24 हफ्ते के बाद गर्भ को खत्म किया जा सकता है, और अगर क्या इससे जीवन के लिए खतरा पैदा होने का जोखिम है.

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