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कानून लाते वक्त प्रभाव का आकलन नहीं करती विधायिका, बनता है बड़ा मुद्दा:CJI रमना

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने भी जजों से "कोर्ट रूम्स में अपने बयानों में अत्यधिक विवेक का प्रयोग करने" को कहा

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भारत
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<div class="paragraphs"><p>कानून के प्रभाव का आकलन नहीं कर रही विधायिका,बनते हैं बड़े मुद्दे : CJI रमना</p></div>
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भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना (Chief Justice NV Ramana) ने शनिवार, 27 नवंबर को कहा कि विधायिका पारित कानूनों का अध्ययन नहीं करती है या उनके प्रभाव का आकलन नहीं करती है, जिसके कारण कभी-कभी "बड़े मुद्दे" सामने आते हैं और परिणामस्वरूप न्यायपालिका पर मामलों का बोझ बढ़ जाता है.

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CJI रमना ने यह बात राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू की उपस्थिति में संविधान दिवस के समापन समारोह में कही.

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने भी यहां मौजूद जजों से "कोर्ट रूम्स में अपने बयानों में अत्यधिक विवेक का प्रयोग करने" का आह्वान करते हुए कहा कि "अविवेकपूर्ण टिप्पणी, भले ही अच्छे इरादे से की गई हो, न्यायपालिका को दरकिनार करने के लिए संदिग्ध व्याख्याओं को जगह देती है".

बुनियादी ढांचे का निर्माण किए बिना मौजूदा अदालतों की ब्रांडिंग से लंबित मामलों पर कोई प्रभाव नहीं- CJI

जजों और वकीलों को संबोधित करते हुए CJI रमना ने कहा, "हमें याद रखना चाहिए कि हमें जो भी आलोचना या बाधा का सामने करने पड़े, न्याय प्रदान करने का हमारा मिशन नहीं रुक सकता है.

“हमें न्यायपालिका को मजबूत करने और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपने कर्तव्य का पालन करने के लिए आगे बढ़ना होगा."
CJI रमना

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के सामने लंबित केसों की प्रकृति बहुआयामी है और उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान मिले सुझावों पर विचार करेगी और मौजूदा समस्याओं का समाधान करेगी.

"एक दूसरा मुद्दा यह है कि विधायिका कानूनों का अध्ययन नहीं करती है या उनके प्रभाव का आकलन नहीं करती है. यह कभी-कभी बड़े मुद्दों की ओर जाता है. नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 की शुरूआत इसका एक उदाहरण है. अब पहले से ही बोझ तले दबे मजिस्ट्रेट के सामने इन हजारों मामलों का बोझ हैं. इसी तरह विशेष बुनियादी ढांचे का निर्माण किए बिना मौजूदा अदालतों को वाणिज्यिक अदालतों के रूप में फिर से ब्रांडिंग करने से लंबित मामलों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा."

गौरतलब है कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 बैंक एकाउंट्स में अपर्याप्त धन की स्थिति में चेक के अनादर से संबंधित है.

CJI रमना ने इस मौके पर केंद्रीय कानून मंत्री की उस घोषणा की सराहना की कि सरकार ने न्यायिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 9,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं.

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हमारे पास ऐसे जजों की विरासत का एक समृद्ध इतिहास- राष्ट्रपति कोविंद

विज्ञान भवन में संविधान दिवस समारोह के समापन सत्र में बोलते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि भारतीय परंपरा में जजों को 'स्थितप्रज्ञा' के समान शुद्धता और अलगाव के मॉडल के रूप में देखा जाता है.

“हमारे पास ऐसे जजों की विरासत का एक समृद्ध इतिहास है, जो अपनी दूरदर्शिता और तिरस्कार से परे आचरण से भरे बयानों के लिए जाने जाते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए पहचान बन गए हैं”

यह कहते हुए कि भारतीय न्यायपालिका उन उच्चतम मानकों का पालन कर रही है, राष्ट्रपति ने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपने अपने लिए एक उच्च स्तर निर्धारित किया है".

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