भारत और चीन के बीच 11वें दौर की सैन्य वार्ता हुई. चुशुल-मोल्डो में हुई इस बैठक में पूर्वी लद्दाख में बचे फ्रिक्शन पाइंट से सेनाओं को पीछे हटाने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई.
सेना से जुड़े सूत्रों ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि, दोनों देशों के कॉर्प्स कमांडर्स के बीच चली इस बैठक में अन्य फ्रिक्शन पाइंट गोगरा हाइट्स, हॉट स्प्रिंग्स और डेपसांग से डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया को लेकर बात हुई.
रक्षा मंत्रालय ने जारी किया बयान
भारत और चीन के बीच 11वें दौर की सैन्य वार्ता पर रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी किया है.
डिफेंस मिनिस्ट्री ने अपने बयान में कहा कि, दोनों देश ने तय समझौतों और प्रोटोकॉल के तहत मौजूदा मसलों को हल करने पर सहमति जताई. इस बैठक में इस बात को रेखांकित किया गया कि अन्य क्षेत्रों से डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया पूर्ण होने से दोनों सेनाओं के बीच तनाव कम होगा.
भारत-चीन के बीच कॉर्प्स कमांडर्स लेवल की वार्ता चुशुल-मोल्डो बॉर्डर पर 9 अप्रैल को शुरू हुई थी. इस बैठक में दोनों ओर से कई मुद्दों पर चर्चा हुई. जिसमें पूर्वी लद्दाख के अन्य फ्रिक्शन पाइंट से सैनिकों के पीछे हटने को लेकर बातचीत हुई.
अप्रैल 2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया था. इसके बाद से ही भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक वार्ता का दौर जारी है. जून 2020 में गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के हमले में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे.
इससे पहले भारतीय और चीनी सेना ने 20 फरवरी को एलएसी के पास तनाव को कम करने और हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा तथा 900 वर्ग किमी डेपसांग मैदान जैसे क्षेत्रों में सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमति के लिए 10वें दौर की सैन्य वार्ता की थी.
अब तक पैंगोंग झील के दोनों किनारों पर सैनिकों की पीछे हटने की प्रक्रिया हुई है. 10 फरवरी को चीन ने एक घोषणा की थी कि नई दिल्ली और बीजिंग पैंगोंग झील में अपने-अपने सैनिकों को पीछे हटाने को लेकर सहमत हो गए हैं.
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