कोरोनोवायरस: भारतीय समर वेकेशन कर रहे रद्द, बिजनेस पर भी असर

कोरोनावायरस का बिजनेस पर कैसा असर?

Published
भारत
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कोरोनोवायरस: भारतीय समर वेकेशन कर रहे रद्द, बिजनेस पर भी असर
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कोरोनावायरस नाम का संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है. चीन में कोरोनावायरस से एक महीने में 1800 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. वहीं 71000 से ज्यादा से ज्यादा लोग इस वायरस के शिकार हो गए हैं. भारत में अभी तक कोरोनावायरस के तीन ही मामले सामने आए हैं, लेकिन फिर भी भारतीयों में इस वायरस को लेकर डर है. एक सर्वे में 72 फीसदी भारतीय लोगों ने कहा है कि वो कोरोनावायरस को लेकर अलर्ट हैं और इसके लिए सावधानी बरत रहे हैं. वहीं 41 फीसदी लोग समर वेकेशन प्लान को लेकर चिंतिंत हैं.

Local Circles नाम की कंपीनी ने अपने सर्वे में 7,185 लोगों से पूछा कि कोरोनावायरस को आप किस तरह देखते हैं? इस पर 72 फीसदी लोगों ने कहा कि वो कोरोनावायरस के बारे में जानते हैं और सावधानी बरत रहे हैं. जबकि 16 फीसदी लोगों को भरोसा नहीं है कि ये वायरस उन्हें प्रभावित कर सकता है. वहीं 3 फीसदी लोगों का मानना

है कि ये वायरस उन्हें बिल्कुल प्रभावित नहीं कर सकता है.

Local Circles ने इसके अलावा कई अलग-अलग सवाल भी अपने सर्वे में पूछे और लोगों की राय जानने की कोशिश की है.

समर वेकेशन प्लान पर कोरोनावायरस का क्या असर?

समर वेकेशन करीब है. लेकिन भारतीयों में कोरोनावायरस का डर इतना है कि इससे उनके समर वेकेशन प्लान पर भी असर पड़ा है. 39 फीसदी लोगों ने कोरोनावायरस की वजह से समर वेकेशन का प्लान ही नहीं बनाया है. जबकि 31 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने अभी तक बुकिंग नहीं की है, पूरी स्थिति देखने के बाद ही बुकिंग करेंगे. 10 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने बुकिंग की है, लेकिन स्थिति की गंभीरता के आधार पर बुकिंग कैंसिल कर सकते हैं.

हालांकि सर्वे में नौ फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने समर वेकेशन प्लान किया है और बिना किसी की परवाह किए बगैर यात्रा करेंगे. Local Circles ने टियर 1, टियर 2, टियर 3 सिटीज में 6,944 लोगों से ये सवाल पूछा कि उनके समर वेकेशन पर कोरोनावायरस के खतरे का क्या असर होगा? इस सवाल के आधार पर ही रिपोर्ट जारी की गई है.

दुनियाभर के कई देशों ने चीन और कोरोनावायरस से प्रभावित दूसरे देशों से आने वाले यात्रियों के लिए परामर्श और प्रतिबंध जारी किए हैं, जिसके कारण हजारों लोगों ने आगामी महीनों के लिए अपनी यात्रा कैंसिल कर दी है.

कोरोनावायरस को बढ़ने से कैसे रोका जाए?

Local Circles ने अपने सर्वे में 7,213 लोगों से ये भी सवाल किया कि कोरोनावायरस को बढ़ने से रोकने के लिए क्या एहतियाती उपाय किए जा सकते हैं. इसपर लोगों ने अलग-अलग राय रखी.

  • 70 फीसदी लोगों ने कहा कि सरकार को उन सभी लोगों की हेल्थ मॉनिटरिंग करना चाहिए जो पिछले 30 दिनों में चीन और सिंगापुर से आए हैं.
  • 9 फीसदी लोगों ने कहा कि सरकार को सार्वजनिक स्थानों जैसे रेस्तरां, सिनेमाघरों, मॉल, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों आदि के लिए प्रतिबंध या दिशानिर्देश जारी करने चाहिए.
  • 10 फीसदी ने कहा कि सभी सार्वजनिक और निजी अस्पतालों और उनके अधिकारियों को जागरूक किया जाना चाहिए ताकि संदिग्ध लोगों से वायरस और न फैले
  • 6 फीसदी का मानना

    है कि इनमें से कोई भी उपाय सही नहीं है
  • 2 फीसदी का कहना है कि इस तरह के कदमों की जरूरत नहीं है क्योंकि भारत में कोरोनवायरस का असर अभी बहुत कम है

चीन, हांगकांग, सिंगापुर से आने वाले लोगों से डर?

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में एक एडवाइजरी जारी है, जिसमें लोगों को चीन जाने से परहेज करने का आग्रह किया गया है. सरकार ने चीनी पासपोर्ट धारकों के लिए ई-वीजा सुविधा भी अस्थायी रूप से निलंबित कर दी है.

पिछले एक महीने से चीन, हांगकांग और सिंगापुर से आने वाले हर यात्री की एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग की जा रही है. ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि उनमें कोरोनावायरस का कोई लक्षण नहीं है. Local Circles के सर्वे में 15 फीसदी लोगों ने कहा कि भारत सरकार को इन देशों से आने वाले लोगों की लगातार स्क्रीनिंग होनी चाहिए.

वहीं 53 फीसदी लोगों ने कहा कि ऐसा किया जाना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है. उन्होंने सरकार से ऐसा करने के लिए अनुरोध भी किया. 7 फीसदी ने भी कहा कि ऐसा नहीं किया जा रहा है, लेकिन किया जाना चाहिए और सरकार इसे करने में सक्षम नहीं होगी. 4 फीसदी लोगों ने कहा कि इन देशों से आने वाले लोगों की लगातार स्क्रीनिंग नहीं हो रही है और इसकी जरूरत भी नहीं है.

कोरोनावायरस का बिजनेस पर क्या असर?

Local Circles ने 3,833 व्यापारियों और एसएमई से सवाल किया कि वो अगले 3 महीनों में कोरोनावायरस का उनके बिजनेस को किस तरह प्रभावित करते देखते हैं. इस पर 45 फीसदी लोगों ने कहा कि वे अपने बिजनेस पर कोरोनावायरस का कोई प्रभाव नहीं देखते हैं. तीन फीसदी लोग प्रोडक्ट की सप्लाई में कोई समस्या आने या सप्लाई कोस्ट में बढ़ोतरी की उम्मीद करते हैं जबकि 10 फीसदी को लगता है कि कोरोनावायरस की वजह से उनके प्रोडक्ट / सर्विस की मांग में कमी आ सकती है.

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