JNU ही नहीं देशभर में युवा कर रहे हल्लाबोल, 9 प्रदर्शनों की कहानी

देशभर में छात्र कहां-कहां विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं

Updated
भारत
6 min read
JNU ही नहीं देशभर में युवा कर रहे हल्लाबोल, 9 प्रदर्शनों की कहानी
i

आज देश के युवा सड़कों पर हैं. दिल्ली से लेकर बिहार और राजस्थान से लेकर गुजरात तक, देशभर में युवा पढ़ाई और नौकरी के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. कहीं पर छात्र बढ़ी फीस के खिलाफ धरने/अनशन पर बैठे हैं, तो कहीं पर टीचरों ने सैलेरी न मिलने की वजह से प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कहीं पर एग्जाम से पहले पेपर लीक हो जाता है, तो कहीं पर रिजल्ट आ जाने के बाद भी उम्मीदवारों को ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिल रहा है.

दिल्ली

राजधानी दिल्ली में इस वक्त JNU, DU, IIMC छात्रों के अलावा मंडी हाउस सर्कल पर देश के कोने-कोने से आए सैकड़ों विकलांग युवा भी दो हफ्तों से प्रदर्शन कर रहे हैं. ठंड और प्रदूषण के बावजूद खुले आसमान के नीचे दिन रात बैठे हुए हैं. रेलवे भर्ती में हुई धांधली के खिलाफ न्याय की गुहार लगा रहे हैं.

2018 में 60,000 पदों के लिए रेलवे भर्ती निकली थी जिसके परिणाम को लेकर विकलांग उम्मीदवारों का कहना है कि उनका चयन होने के बावजूद वंचित कर दिया गया. अक्टूबर में रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने 14 दिनों के अंदर इनके साथ न्याय करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्यवाई नहीं हुई.

रेलवे भर्ती परीक्षा में धांधली का आरोप
रेलवे भर्ती परीक्षा में धांधली का आरोप
(फोटो: द क्विंट)

उधर JNU और IIMC के छात्र फीस बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. JNU के छात्र पिछले डेढ़ महीने से सुर्खियों में हैं. कई बार सैकड़ों छात्र राजधानी की सड़क पर उतरकर संसद भवन, एचआरडी मिनिस्ट्री और राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकाल चुके हैं. इस दौरान पुलिस का लाठी चार्ज, पुलिस-छात्रों की झड़क और दिल्ली का चक्का जाम जैसी खबरें मेनस्ट्रीम मीडिया में रही.

JNU छात्रों का राष्ट्रपति भवन तक मार्च
JNU छात्रों का राष्ट्रपति भवन तक मार्च
(फोटो: ट्विटर)

IIMC के छात्र फीस स्ट्रक्चर में बढ़त के खिलाफ 3 दिसंबर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इसके साथ ही छात्र सभी के लिए हॉस्टल सुविधा, लाइब्रेरी 24 घंटे खोले रखने, सैनिटरी नैपकीन मशीन की भी मांग छात्र कर रहे हैं. छात्रों ने क्विंट से कहा कि किसी भी मिडिल क्लास परिवार के छात्र के लिए फीस दे पाना बहुत मुश्किल है. ऐसे में कई छात्रों को पहले सेमेस्टर के बाद ही कोर्स छोड़ना पड़ सकता है.

IIMC में छात्रों का विरोध प्रदर्शन
IIMC में छात्रों का विरोध प्रदर्शन
(फोटो: twitter)

जयपुर

RPSC School Lecturer Exam को लेकर राजस्थान यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर बड़ी संख्या में बेरोजगार छात्र पिछले 10 दिनों से डटे हुए हैं. प्रशासन की अनसुनी के बाद इनमें से तीन युवा आमरण अनशन पर हैं. आमरण अनशन पर बैठे युवा छात्र ईरा बोस ने क्विंट को बताया, करीब 50 एमएलए ने लिखित में उनकी मांगो को जायज ठहराया है लेकिन शिक्षा मंत्री के आगे सब झुके हुए हैं.

प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगे-

  • जनवरी में होने वाले एग्जाम की तारीख आगे बढ़ाई जाए
  • भर्ती में बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों का कोटा 5 फीसदी निर्धारित करने की मांग
  • पदों को बढ़ाकर 10 हजार किया जाए

'युवा हल्ला बोल' के कॉर्डिनेटर गोविंद मिश्रा ने क्विंट से कहा-

“अकाउंटिबिलिटी किसी सरकार में नहीं है, न केंद्र न राज्य सरकार में. शिकायत करने के लिए कोई सेल नहीं बना हुआ है, जहां लड़के अपनी शिकायत दर्ज करा सके. अपनी मांगों के लिए हर बार प्रोटेस्ट करना पड़ता है. अब लड़के पढ़ाई करे या धरने की तैयारी करे.”
“अब मन में कहीं न कहीं ये बैठ गया है कि जब धरना देंगे तब ही नौकरी निकलेगी, धरना देंगे तो एग्जाम होगा, फिर पेपर लीक के खिलाफ धरना देंगे, फिर रिजल्ट के लिए धरना देंगे. सरकारी नौकरी पाने के लिए अब धरना देना तो कॉमन हो गया है.”
‘युवा हल्ला बोल’ के कॉर्डिनेटर गोविंद मिश्रा

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में MPPSC के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए 27 साल बाद दिसंबर 2017 वेकैंसी आई. अगले साल अगस्त तक रिजल्ट भी आ गया. लेकिन इसके डेढ़ साल का समय बीत गया, किसी भी उम्मीदवार को ज्वाइंनिंग लेटर नहीं दिया गया. जब उम्मीदवारों ने प्रशासन के खिलाफ 'संविधान यात्रा' के नाम से बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया, तो करीब 850 उम्मीदवारों को ज्वाइंनिंग लेटर दे दिया गया. अब भी करीब 2000 लोगों को लेटर मिलना बाकी है.

24 नवंबर से मध्य प्रदेश के महु से भोपाल तक निकाली पैदल यात्रा 
24 नवंबर से मध्य प्रदेश के महु से भोपाल तक निकाली पैदल यात्रा 
(फोटो: द क्विंट)

प्रदर्शन में शामिल एक उम्मीदवार सागर सेन ने क्विंट को बताया, 24 नवंबर से मध्य प्रदेश के महु से भोपाल तक पैदल यात्रा निकाली. कुछ लोग भूख हड़ताल पर भी बैठे, करीब 300 लोगों ने अपना सिर मुंडन भी कराया. इसके बाद सरकार ने करीब 850 लोगों को ज्वाइंनिंग लेटर भी दे दिया. बाकी लोगों को सरकार ने 15 दिसंबर तक लेटर देने का आश्वासन दिया है. अगर 15 तक बाकी सभी की ज्वाइनिंग नहीं होती है तो नवचयनित सहायक प्राध्यापक संघ फिर से आंदोलन करेगा.

गुजरात

गुजरात के गांधीनगर में छात्रों ने जूनियर क्लर्क और ऑफिस असिटेंट की भर्ती परीक्षा में धांधली का आरोप लगाया है. छात्र परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. हाल ही में छात्रों ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान कई प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में भी लिया गया.

छात्रों का कहना है कि जब तक सरकार परीक्षा रद्द नहीं करती, वो प्रदर्शन जारी रखेंगे. उन्होंने ये भी कहा कि राज्य सरकार को पेपर लीक और अनियमितता को लेकर सबूत भी दिए जा चुके हैं.

बिहार

बिहार सरकार ने डिप्लोमा इन एलिमेंटरी एजुकेशन (D.El.Ed) के तहत प्रशिक्षित शिक्षकों को साफ कह दिया है कि वो सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं हैं, क्योंकि केंद्र सरकार इस कोर्स को मान्यता नहीं देती. जबकि दो साल पहले ही सरकार ने 18 महीने के विशेष D.El.Ed कोर्स को मान्यता दी थी, लेकिन अब सरकार ने ही इसे अमान्य घोषित कर दिया है.

‘सरकार ने शिक्षकों के साथ धोखा  किया’
‘सरकार ने शिक्षकों के साथ धोखा किया’
(फोट:क्विंट हिंदी)

कई शिक्षकों ने इस कोर्स के बाद अपनी नौकरी तो बचा ली, लेकिन जब सरकारी नौकरी की बात आई तो सरकार के जवाब ने उन्हें अधर में छोड़ दिया.

वाराणसी

JNU ही नहीं देशभर में युवा कर रहे हल्लाबोल, 9 प्रदर्शनों की कहानी
(फोटो: PTI)

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के छात्रों ने संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (SVDV) में मुस्लिम टीचर फिरोज खान के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. अब खबर है कि विरोध के चलते मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान ने एक महीने बाद कथित तौर पर विभाग से इस्तीफा दे दिया. अब वह कला संकाय में संस्कृत विभाग को जॉइन कर चुके हैं

छात्रों का कहना था कि एक गैर-हिंदू शिक्षक संस्कृत संकाय में पूजा-पाठ नहीं सिखा सकता हैं. वह संस्कृत विभाग में भाषा तो पढ़ा सकते हैं, लेकिन पूजा-पाठ नहीं सिखा सकते. बीएचयू प्रशासन और छात्रों के बीच एक महीने से ज्यादा समय तक विवाद बना रहा.

क्या असल मुद्दों से बच रही है सरकार?

‘युवा हल्ला बोल’ के कॉर्डिनेटर गोविंद ने क्विंट से कहा, “आज बेरोजगारी बहुत बड़ा संकट है. लेकिन सरकार इस समस्या पर जवाब देने की बजाए सिटिजनशिप एमेंडमेंट बिल लाने में लगी हुई है. देश में इतनी नौकरियां खत्म हो रही हैं लेकिन सरकार लोगों को दूसरी बातों में उलझाकर मुख्य मुद्दों से बच रही है.”

गोविंद मिश्रा ने क्विंट से ये भी कहा कि वह युवा हल्ला बोल मूवमेंट के जरिए इस तरह के सभी प्रदर्शन को एक साथ एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर ऐसा हो गया तो देश में एक बहुत बड़ा प्रोटेस्ट होने वाला है. मुद्दा सिर्फ एक होगा- बेरोजगारी.

(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram चैनल से जुड़े रहिए यहां)

Published: 
क्विंट हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

120,000 से अधिक ग्राहक जुड़ें!