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एमपी का बुलडोजर 'इंसाफ': 1 महीने में 37 घर ढहें, इनमें 27 मुस्लिमों के हैं

Madhya Pradesh में 37 घरों को क्या आरोप लगाकर ढाहा गया है? जिनका आशियाना टूटा वे कौन हैं?

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भारत
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राज्य मध्य प्रदेश. महीना जून का और बुलडोजर एक्शन के मोड में मोहन यादव की सरकार. गोकशी, पुलिस पर हमला और हत्या के मामलों के आरोपियों के 37 घरों पर प्रशासन ने एक महीने में बुलडोजर चला दिया है. खास बात है कि जिन 37 घरों पर बुलडोजर चलाया गया, उनमें से 27 मुस्लिम परिवारों के थे.

मुहल्ले में बुलडोजर आया है.. आज से 5 साल पहले जब गली से यह आवाज आती थी तो मन में ख्याल आता था कि कहीं खुदाई चल रही है और अगर वक्त है तो चलो देख आते हैं. मीम्स बनते थे कि लोग कितने खलिहर हैं. लेकिन अगर आज मुहल्ले में बुलडोजर चलने की खबर आती है, खासकर यूपी और एमपी में, तो एक विचार यह भी आ सकता है कि प्रशासन एक्शन ले रहा है.

क्विंट हिंदी ने जून में सामने आए इन सभी मामलों को फॉलो किया है. आपको यहां बता रहे हैं कि इन 37 घरों को क्या आरोप लगाकर गिराया गया? जिनका आशियाना टूटा वे कौन हैं? प्रशासन का इनपर क्या कहना है?

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1 जून 2024, भोपाल (1 घर गिरा)

17 मई को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सेंट्रल जेल के गेट पर बीजेपी युवा मोर्चा के मंडल उपाध्यक्ष, सुरेंद्र कुशवाहा की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में लगभग 8 आरोपी अबतक गिरफ्तार किए जा चुके हैं और उन्हें कोर्ट में पेश किया जा चुका है.

इसके बाद 1 जून को इन आरोपियों में से एक, तंजील खान के 3 मंजिला मकान पर बुलडोजर चला. प्रशासन ने आरोप लगाया कि तीन मंजीला मकान बनाने की अनुमति नहीं थी.

11 जून 2024, दमोह (4 घर गिरे)

11 जून को दमोह जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के कसाई मंडी क्षेत्र में प्रशासन का बुलडोजर चला. प्रशासन ने एक्शन लेते हुए कहा कि 4 आदतन अपराधियों के अतिक्रमण हटाए गए हैं. दमोह प्रशासन ने अपने प्रेस रिलीज में बताया कि

"चारों आरोपी शांति भंग करने, मारपीट और गौतस्करी जैसे कई अपराधों में शामिल रहे हैं. अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई से 5 दिन पहले नोटिस दिया गया था."
Madhya Pradesh में 37 घरों को क्या आरोप लगाकर ढाहा गया है? जिनका आशियाना टूटा वे कौन हैं?

दमोह के एसपी श्रुत कीर्ति सोमवंशी ने क्विंट हिंदी से बात करते हुए कहा कि इन आरोपियों को पहले के अपराधों के आधार पर चिन्हित किया गया था. नगरपालिका और राजस्व की टीम ने इनके कब्जे वाली ऐसी संपत्ति पर बुलडोजर चलाया जो अवैध थीं. उन्होंने कहा कि जिले में ऐसे और भी आदतन अपराधी हैं जिनके अतिक्रमण वाले संपत्ति को चिन्हित किया जा रहा है और आगे एक्शन लिया जाएगा.

वहीं एक आरोपी, कल्लू कुरैशी के भाई ने क्विंट हिंदी से बात करते हुए कहा कि अगर प्रशासन को लगता है कि हमने गोकशी की है तो उसका केस बनाए, इसबार तो उन्होंने हमारा घर ही तोड़ दिया.

"कल्लू कुरैशी के यहां जबरदस्ती मामला बनाया गया. यहां उनका बाड़ा बना हुआ है और वह टूटा हुआ है. वहां खुला मैदान है और जानवर घुमते-फिरते हैं. पुलिस ने जबरदस्ती वीडियो बनाकर उनके (कल्लू) उपर केस बना दिया."
कल्लू कुरैशी के भाई

कल्लू कुरैशी जमानत पर जेल से बाहर आ चुके हैं.

14-15 जून 2024, रतलाम (4 घर गिरे)

एमपी के रतलाम में माहौल बिगाड़ने की कोशिश हुई. आरोप है कि जिले के जावरा में स्थित जगन्नाथ मंदिर में गौवंश का कटा हुआ सर मिला. इसके बाद 14 जून दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उसी दिन उनके घरों पर बुलडोजर चलाया गया. वहीं अगले दिन यानी 15 जून को इसी मामले में आरोपियों को गौवंश का सर मुहैया कराने के आरोप में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उसी दिन इनके घरों को भी अवैध बताकर तोड़ा गया.

चारों आरोपी मुस्लिम हैं. उनको राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत तीन महीने के लिए केंद्रीय जेल उज्जैन भेजा गया.

15 जून 2024, मंडला (11 घर गिरे)

 मंडला जिले में 15 जून को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर भैंसवाही गांव में 11 घरों पर दबिश दी थी.  FIR के मुताबिक, पुलिस को मुखबिर से गोवंश की हत्या और गोमांस की बिक्री की सूचना मिली थी. जिसके बाद पुलिस ने आधी रात को गांव में दबिश दी. इस दौरान 11 लोगों के घरों से भारी मात्रा में गोमांस, हड्डी, चर्बी सहित अन्य अवशेष मिले. इसके साथ ही पुलिस ने 150 से ज्यादा जीवित गोवंश भी पकड़ा.

प्रशासन ने इन 11 मुस्लिम आरोपियों के घरों को अवैध बताते हुए बुलडोजर से ढहा दिया.
Madhya Pradesh में 37 घरों को क्या आरोप लगाकर ढाहा गया है? जिनका आशियाना टूटा वे कौन हैं?

मंडला के भैंसवाही गांव में चला प्रशासन का बुलडोजर

(फोटो: क्विंट हिंदी)

जिनका घर प्रशासन ने गिराया, उनमें से एक सुल्ताना बी ने क्विंट से कहा कि, "उन्हें हमारे घरों में कुछ नहीं मिला. उन्होंने हमारे सामान को तहस-नहस कर दिया, फ्रिज खोला और कुछ नहीं मिला. मेरी सारी चीजें, मेरा आधार कार्ड, सब मलबे में दब गया है."

वहीं 18 वर्षीय ताजिया कुरैशी ने बताया, "उन्होंने हमारे घर में रखी कुरान भी फाड़ दी. कार्रवाई के बाद से मोहल्ला खाली हो गया है."

हालांकि, पुलिस और प्रशासन का कहना है कि घर अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बनाए गए थे और इन लोगों को बकायदा नोटिस भी जारी किया गया था.

18 और 22 जून 2024, देवास (9 घर गिरे)

13 जून को देवास जिले के सोनकच्छ ब्लॉक में दबिश देने गई पुलिस की टीम पर हमला किया गया. पुलिस यहां अवैध शराब जब्त करने पहुंची थी.

इस मामले में 8 आरोपी बनाए गए. इन 8 आरोपियों के परिजनों से उनके मकानों के 3 दिन में दस्तावेज मांगे गए और न देने पर 18 जून को 8 आरोपियों के मकानों पर बुलडोजर चला दिया गया. जब प्रशासन का बुलडोजर चल रहा था तब 3 महिलाओं ने अपना घर टूटते देख जहर भी पी लिया, जिसके बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

इसके अलावा देवास में ही 22 जून को आदिवासी युवती के अपरहण के मामले में एक मुस्लिम आरोपी के मकान पर बुलडोजर चला. देवास प्रशासन ने क्विंट हिंदी से इस बात की पुष्टि की है कि पुलिस ने युवती को बरामद कर लिया है और आरोपी के साथ-साथ उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया है.

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24 जून 2024, सिवनी (3 घर गिरे)

19 जून से लेकर 21 जून के बीच सिवनी जिले में 65 गोवंशों के मृत शरीर मिलें. इस मामले में पुलिस ने सभी 24 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने कहा कि गौवंश का वध करने आरोपी नागपुर से सिवनी आए थे. आगे जिले के कलेक्टर और एसपी पर भी गाज गिरी और दोनों का तबादला हो गया. इस मामले में 24 जून को तीन मुस्लिम आरोपियों के घर पर प्रशासन का बुलडोजर चला.

क्विंट हिंदी ने इस मामले में सिवनी की नई कलेक्टर संस्‍कृति जैन से भी बात की. उन्होंने भी तीन घरों पर बुलडोजर एक्शन की पुष्टि की है.

25 जून 2024, इंदौर (2 घर गिरे)

22 जून की आधी रात इंदौर में बीजेपी नेता मोनू कल्याणे की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इसके बाद पुलिस ने मामले में दो आरोपियों, अर्जून और पीयूष को गिरफ्तार किया और उनके घरों को अवैध बताते हुए बुलडोजर चलाया.

26 जून 2024, मुरेना (3 घर गिरे)

21 जून को सुबे के मुरेना जिले के नूराबाद थाना क्षेत्र में घर में गोवंश का मांस रखने के आरोप में पुलिस ने 9 लोगों को आरोपी बनाया. इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और आगे 26 जून को तीन आरोपियों- असगर, जब्बार खान और इकरार के घरों पर बुलडोजर चला. प्रशासन का आरोप था कि यह घर अवैध थे. प्रशासन ने कहा कि

"इन परिवार को जिला प्रशासन द्वारा शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने के आरोप में नोटिस जारी किया गया था. इनके द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया. इसके बाद जिला प्रशासन ने उन्हें 24 तारीख तक शासकीय भूमि को खाली करने का नोटिस दिया, किंतु इन तीनों व्यक्तियों ने शासकीय भूमि को खाली नहीं किया. इस पर जिला प्रशासन ने पुलिस के सहयोग से 26 जून को उस मकानों को जमींदोज कर दिया है."
Madhya Pradesh में 37 घरों को क्या आरोप लगाकर ढाहा गया है? जिनका आशियाना टूटा वे कौन हैं?

मुरेना में चलता प्रशासन का बुलडोजर

(फोटो- मुरेना प्रशासन)

एमपी सरकार को लताड़ चुका है हाई कोर्ट

आपराधिक मामलों में आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन पर कड़ी टिप्पणी करते हुए, इसी साल फरवरी में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि नागरिक अधिकारियों के लिए उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना घरों को ध्वस्त करना "फैशन" बन गया है.

जस्टिस विवेक रूसिया ने एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए डिमोलिशन को अवैध करार दिया और दो पीड़ितों को ₹ 1-1 लाख का मुआवजा देने का आदेश भी दिया. कोर्ट ने बुलडोजर चलवाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का भी आदेश दिया था.

अदालत ने कहा कि घरों को तोड़ने के बजाय निर्माण को नियमित/ रेगुलराइज कराने के लिए कहा जाना चाहिए. इसमें कहा गया है कि "डिमोलिशन आखिरी रास्ता होना चाहिए, वह भी घर के मालिक को इसे नियमित कराने का उचित अवसर देने के बाद".

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"यह सरकार के द्वारा गैर-संवैधानिक हिंसा है"

क्विंट हिंदी ने इस कथित बुलडोजर न्याय का वजह से हासिए पर जाते नेचुरल जस्टिस की भावना को समझने के लिए ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट हर्ष मंदर से बात की. उन्होंने कहा कि यह बुलडोजर एक्शन मुस्लिम समुदाय के खिलाफ सरकार के एक ऐसे युद्ध का संकेत है जहां कानून या संविधान कोई मायने नहीं रखता.

"देश में ऐसा कोई कानून नहीं है कि अगर किसी ने कोई अपराध किया है तो आप उनका घर तोड़ दो. साथ ही यह सिद्ध करना कि किसी ने कोई अपराध किया है, उसकी एक प्रक्रिया होती है. लेकिन सरकार ने उसे दरकिनार कर दिया है. अपराध सिद्ध होने तक बेकसूर मानने के विचार को पीछे कर दिया गया है. सरकार खुद यह तय कर रही है."
हर्ष मंदर

हर्ष मंदर के अनुसार जब से सरकार बुलडोजर चलाने लगी है तब से मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए किसी भीड़ या दंगाइयों की जरूरत नहीं है. सरकार ही अब संपत्ति का विनाश कर रही और अपराधी करार दे रही. पहले भी डिमोलिशन होता था लेकिन अब इसका इस्तेमाल नफरत की राजनीति के लिए हो रहा है.

(इनपुट- अब्दुल वसीम अंसारी)

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