ADVERTISEMENT

‘उड़न-छू’ होने में माहिर नीरव मोदी कानून की गिरफ्त में कब आएगा?

भारतीय बैंक और केंद्र सरकार अमेरिकी कोर्ट पहुंचे

Published
भारत
6 min read
किस मोड़ तक पहुंचा है नीरव मोदी का मामला?
i
  1. एंटवर्प की अदालत ने नीरव मोदी की फर्म को दिवालिया घोषित किया (इंडियन एक्सप्रेस, 29 अप्रैल 2018)
  2. न्यूयॉर्क में है नीरव मोदी, रद्द पासपोर्ट पर कर रहा है यात्राएं : सूत्र (एनडीटीवी, 26 अप्रैल 2018)
  3. मोदी-चोकसी मामला: पीएनबी ने 1.9 अरब डॉलर के LoU का भुगतान किया, बैंक के प्रमुख सुनील मेहता का बयान (फाइनेंशियल एक्सप्रेस, 28 अप्रैल, 2018)
  4. IPO बाजार में नए इश्यू का अकाल, नीरव मोदी है कसूरवार (द इकनॉमिक टाइम्स, 28 अप्रैल 2018)
ADVERTISEMENT

किस मोड़ तक पहुंचा है नीरव मोदी का मामला?

ये कुछ अहम सुर्खियां हैं, जो भगोड़े ज्वैलर नीरव मोदी ने पिछले कुछ दिनों के दौरान भारतीय मीडिया में बटोरी हैं. नीरव मोदी का नाम फरवरी के महीने से ही लगातार सुर्खियों में है, जब पहली बार खुलासा हुआ था कि उसने और उसके मामा मेहुल चोकसी ने घोटाला करके पंजाब नेशनल बैंक में जमा हजारों करोड़ रुपये हड़प लिए हैं.

आइए देखते हैं कि तब से अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ है:

नीरव मोदी की कंपनियों के बुरे दिन

जैसा कि ऊपर दी गई पहली हेडलाइन से साफ है, नीरव मोदी की कंपनियां भारत ही नहीं, दूसरे देशों में भी संकट में घिरी हुई हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बेल्जियम के एंटवर्प की एक कमर्शियल कोर्ट ने नीरव मोदी की फर्म फायरस्टार डायमंड BVBA को दिवालिया घोषित कर दिया है. अखबार के मुताबिक, रूस, आर्मेनिया और दक्षिण अफ्रीका की तीन कंपनियों का नियंत्रण फायरस्टार डायमंड के पास है. एंटवर्प की अदालत ने इस कंपनी के लिक्विडेशन के लिए एक्सपर्ट भी नियुक्त कर दिए हैं.

ADVERTISEMENT

कंपनियां पस्त, नीरव मोदी मस्त

नीरव मोदी की कंपनियां भले ही संकट में हों, लेकिन मीडिया में आ रही खबरों से लगता है कि खुद नीरव मोदी पर अब तक कोई बड़ी आंच नहीं आई है. एनडीटीवी की सूत्रों पर आधारित जिस खबर का जिक्र हमने ऊपर दूसरी हेडलाइन में किया है, उसके मुताबिक नीरव मोदी अब भी भारतीय पासपोर्ट पर बड़े मजे से अंतरराष्ट्रीय यात्राएं कर रहा है, जबकि भारत सरकार उसका पासपोर्ट रद्द करने का ऐलान फरवरी में ही कर चुकी है.

‘उड़न-छू’ होने में माहिर नीरव मोदी कानून की गिरफ्त में कब आएगा?
फोटो: क्विंट हिंदी 

कब, कहां मौजूद रहा नीरव मोदी?

इसी खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि नीरव मोदी ने 1 जनवरी को ही भारत छोड़ दिया था. वो मुंबई से पहले यूएई, फिर हॉन्‍गकॉन्‍ग और फिर लंदन गया. मार्च के महीने में उसने ब्रिटेन भी छोड़ दिया और फिलहाल वो अमेरिका के न्यूयॉर्क में है.

एनडीटीवी की इस खबर में उसकी यात्राओं से जुड़ी अहम तारीखें भी बताई गई हैं. इसके मुताबिक, नीरव मोदी 2 फरवरी को यूएई से हॉन्‍गकॉन्‍ग गया और 14 फरवरी को उसने वो ठिकाना भी छोड़ दिया.

नीरव मोदी की हॉन्‍गकॉन्‍ग यात्रा का रहस्य

नीरव मोदी के 14 फरवरी को हॉन्‍गकॉन्‍ग से रवाना होने की खबर दिलचस्प है, क्योंकि संसद में दिए लिखित जवाब के मुताबिक, भारत सरकार ने 23 मार्च को हॉन्‍गकॉन्‍ग से अनुरोध किया था कि नीरव मोदी को गिरफ्तार करके हमारे हवाले किया जाए. यानी एनडीटीवी की खबर अगर सच है, तो भारत सरकार के ये अनुरोध करने से पहले ही नीरव मोदी हॉन्‍गकॉन्‍ग से रफूचक्कर हो चुका था.

अगर ऐसा है, तो विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का 12 अप्रैल का वो बयान भी हैरान करने वाला है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हॉन्‍गकॉन्‍ग सरकार नीरव मोदी को गिरफ्तार करके सौंपने के भारत सरकार के अनुरोध पर अब भी विचार कर रही है!

देश की जनता उठा रही है घोटाले का बोझ

अब जरा फाइनेंशियल एक्सप्रेस की उस खबर पर गौर कीजिए, जो हमने ऊपर तीसरी हेडलाइन के तौर पर दी है. इस खबर में बताया गया है कि पंजाब नेशनल बैंक अब तक नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के घोटालों से जुड़े 1.9 अरब डॉलर (12,680 करोड़ रुपये) के फर्जी LoU यानी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग का भुगतान कर चुका है. ये जानकारी खुद बैंक के प्रमुख सुनील मेहता ने दी है.

यानी नीरव मोदी और उसके मामा ने जो फर्जीवाड़ा किया, अब उसकी कीमत एक सरकारी बैंक को चुकानी पड़ रही है. ये रकम चाहे बैंक अपने संसाधनों से अदा करे या सरकार से मिलने वाली मदद के जरिये चुकाए, इसका बोझ आखिरकार तो जनता पर ही पड़ना है.

ध्यान रहे कि पंजाब नेशनल बैंक को घटते मुनाफे के चलते 2013-14 से लगातार सरकारी मदद मिलती रही है. 2017-18 में भी केंद्र सरकार पीएनबी को पूंजी के रूप में 5473 करोड़ रुपये की मदद दे चुकी है. ऐसे में सुनील मेहता के इस बयान का कोई खास मतलब नहीं है कि पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की रकम का भुगतान सरकारी मदद के बिना, अपने संसाधनों से करेगा.

कहां तक फैला है घोटाले का असर?

अब जरा गौर फरमाइए द इकनॉमिक टाइम्स की उस हेडलाइन पर, जो हमने ऊपर चौथे नंबर पर दी है. ये खबर बता रही है कि नीरव मोदी के घोटाले की वजह से आज IPO बाजार में अकाल जैसी हालत है.

जाहिर है, ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि पीएनबी घोटाले की वजह से निवेशकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है. घोटाला सामने आने से पहले 12 फरवरी, 2018 को पीएनबी का शेयर 161 रुपये 65 पैसे पर बंद हुआ था, जो 27 अप्रैल तक गिरकर 93 रुपये 50 पैसे पर आ चुका था. इस दौरान बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन 39,210 करोड़ रुपये से घटकर 25,783 करोड़ रुपये रह गया. इसमें निवेशकों के करीब साढ़े 13 हजार करोड़ रुपये डूब गए.

मेहुल चोकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स के जिस शेयर का भाव 12 फरवरी को 62 रुपये 85 था, उसे आज सवा तीन रुपये में भी खरीदार मिलना मुश्किल है. निवेशकों का ये नुकसान ऐसा है, जिसकी भरपाई कोई नहीं करने वाला.

‘उड़न-छू’ होने में माहिर नीरव मोदी कानून की गिरफ्त में कब आएगा?
(फोटोः Altered By Quint)

नीरव मोदी दिवालिया घोषित होना चाहता है

इस बीच नीरव मोदी अमेरिका के न्यूयॉर्क में अपनी प्रमुख कंपनी फायरस्टार डायमंड इनकॉरपोरेडेट और उसकी दो अन्य सहयोगी कंपनियों को दिवालिया घोषित करवाने का एप्लीकेशन दाखिल कर चुका है. उसने ये कदम इसलिए उठाया, क्योंकि अमेरिकी कानूनों के मुताबिक दिवालियेपन का एप्लीकेशन देने वाली कंपनी को बकाया रकम चुकाने के लिए लेनदार तंग नहीं कर सकते.

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, नीरव मोदी ने ये एप्लीकेशन 26 फरवरी, 2018 को ही दाखिल कर दिया था. 29 मार्च को अमेरिकी कोर्ट ने उसे अपनी संपत्तियां नीलाम करने की इजाजत भी दे दी. ऐसी खबरें भी छपी हैं कि कोर्ट के आदेश पर नीलामी की प्रक्रिया 5 मई को शुरू होने वाली है.

भारतीय बैंक और केंद्र सरकार अमेरिकी कोर्ट पहुंचे

अमेरिका में नीरव मोदी की कंपनियों को दिवालिया घोषित किए जाने की प्रक्रिया को पहले भारतीय बैंकों ने और कुछ दिन पहले भारत सरकार ने भी चुनौती देने की प्रक्रिया शुरू की है. कुछ खबरों के मुताबिक, उनके पास इसके लिए 8 मई तक का वक्त है.

हालांकि कानून के जानकारों के मुताबिक, अभी ये बता पाना मुश्किल है कि उनकी ये कोशिश अमेरिकी कानूनों के तहत कितनी सफल हो पाएगी.

‘उड़न-छू’ होने में माहिर नीरव मोदी कानून की गिरफ्त में कब आएगा?
(फोटोः NiravModi.com)

नीरव मोदी-मेहुल चोकसी घोटाले से जुड़ी कुछ खास घटनाएं :

अब जरा संक्षेप में नजर डाल लेते हैं घोटाले से जुड़ी कुछ अहम घटनाओं और उनकी तारीखों पर:

  • 1 जनवरी - नीरव मोदी भारत छोड़कर गया.
  • 6 जनवरी - नीरव मोदी का मामा और गीतांजलि ग्रुप का मालिक मेहुल चोकसी भी देश छोड़कर चला गया.
  • 16 से 25 जनवरी - पंजाब नेशनल बैंक को LoU की जांच के दौरान नीरव मोदी ग्रुप की जालसाजी का पता चला.
  • 29 जनवरी - पीएनबी ने रिजर्व बैंक से नीरव मोदी ग्रुप के खिलाफ 281 करोड़ रुपये के घोटाले की शिकायत की. सीबीआई से FIR दर्ज करने को भी कहा.
  • 4 फरवरी - सीबीआई ने नीरव मोदी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया
  • 5 फरवरी - पीएनबी ने नीरव मोदी की कंपनियों से जुड़े 281 करोड़ के घोटाले की जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी.
  • 7 फरवरी - पीएनबी ने मेहुल चोकसी और उसकी कंपनियों के खिलाफ 65 करोड़ रुपये के फ्रॉड की शिकायत करते हुए सीबीआई में केस दर्ज कराया.
  • 12 फरवरी - बैंक को पता चला कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कंपनियों ने 11 हजार करोड़ से ज्यादा का घोटाला किया है.
  • 13 फरवरी - बैंक ने सीबीआई के पास नई एफआईआर दर्ज कराई. प्रवर्तन निदेशालय से भी शिकायत की.
  • 14 फरवरी - पीएनबी ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि उसे हजारों करोड़ रुपये के घोटाले का पता चला है.
  • 15 फरवरी - प्रवर्तन निदेशालय ने देशभर में छापे मारकर नीरव मोदी, मेहुल चोकसी की संपत्तियों को जब्त करना शुरू किया.
  • 16 फरवरी - विदेश मंत्रालय ने नीरव और मेहुल को कारण बताओ नोटिस जारी करके एक हफ्ते में जवाब मांगा.
  • 23 फरवरी - सरकारी नोटिस का जवाब नहीं देने पर नीरव मोदी, मेहुल चोकसी के पासपोर्ट रद्द कर दिए गए.

(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram चैनल से जुड़े रहिए यहां)

ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
क्विंट हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

120,000 से अधिक ग्राहक जुड़ें!
ADVERTISEMENT