लगातार तीसरे साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद, इकनॉमी को मिलेगी रफ्तार
इस साल मॉनसून सामान्य रहने के आसार हैं
इस साल मॉनसून सामान्य रहने के आसार हैं

लगातार तीसरे साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद, इकनॉमी को मिलेगी रफ्तार

देश में लगातार तीसरे साल मॉनसून सामान्य रहेगा. अर्थव्यवस्था की रफ्तार में मॉनसून की भूमिका बेहद अहम होती है. उम्मीद है कि तीसरे साल भी अच्छा मॉनसून ग्रोथ के लिए बेहतर साबित होगा. भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक देश को इस बार लंबी अवधि की औसत बारिश का 97 फीसदी हासिल होगा.

भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश ने कहा:

हमें लगता है कि भारत में लगातार तीसरे साल सामान्य मॉनसून की बारिश होगी. देश में 2018 में मॉनसून की बारिश कम रहेगी, इसकी आशंका कम ही है.  

पिछले साल दक्षिण को मिला था सामान्य मॉनसून

मौसम विभाग ने कहा कि मॉनसून का अगला अनुमान वह जून में पेश करेगा. 15 मई को वह यह बताएगा कि मॉनसून केरल में कब तक पहुंचेगा.

पिछले साल देश मॉनसून की बारिश में लंबी अवधि के औसत का 95 फीसदी था. हालांकि मॉनसून की यह बारिश पूरे देश में एक जैसी नहीं थी. हालांकि दक्षिण के राज्यों में मॉनसून सामान्य रहा था. पूर्वी, उत्तरी, पूर्वोत्तर और मध्य भारत में लांग टर्म एवरेज से कम बारिश हुई थी.

अच्छा मॉनसून कृषि क्षेत्र को मजबूती दे सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी. 
अच्छा मॉनसून कृषि क्षेत्र को मजबूती दे सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी. 
(फोटो: रॉयटर्स)

बेहतर मॉनसून से रूरल इकनॉमी को बूस्ट

मौसम विभाग के मुताबिक, लॉन्‍ग पीरियड एवरेज की बारिश 96 से 104 फीसदी रहेगी. इसे सामान्य मॉनसून कहा जाता है. इस अनुमान में सिर्फ पांच फीसदी गलती का मार्जिन है. देश का आधे से ज्यादा हिस्सा मॉनसून की बारिश पर निर्भर है. भारत में सालाना बारिश का 70 फीसदी जुलाई से सितंबर में हो जाता है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहायक गतिविधियों के लिए मॉनसून अहम भूमिका अदा करता है.

आर्थिक सर्वे के मुताबिक, कृषि क्षेत्र देश में 50 फीसदी लोगों को रोजगार देता है. जीडीपी में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 16 फीसदी है. अच्छी बारिश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलता है. नोटबंदी और जीएसटी से अस्त-व्यस्त हुई भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मॉनसून की अच्छी बारिश काफी बड़ी भूमिका निभाएगी. उम्मीद है कि योजनाकारों को इससे सहूलियत होगी.

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