ADVERTISEMENT

PM ने लिया भारत बायोटेक की वैक्सीन का डोज,सेफ्टी पर उठ रहे थे सवाल

एम्स के डायरेक्टर ने कहा- पीएम मोदी ने बताया दोनों वैक्सीन सुरक्षित और कारगर

Updated
भारत
3 min read
PM मोदी ने AIIMS में ली कोरोना वायरस वैक्सीन की पहली खुराक
i

भारत में वैक्सीनेशन का काम तेजी से चल रहा है, अब खुद पीएम मोदी ने वैक्सीन की पहली डोज लेकर दूसरे चरण के वैक्सीनेशन की शुरुआत की. पीएम मोदी को स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन लगाई गई. इससे लोगों को ये मैसेज देने की कोशिश की गई कि भारत बायोटेक की वैक्सीन पूरी तरह से सेफ है. पीएम ने वैक्सीन की पहली डोज लेने के साथ-साथ लोगों से भी वैक्सीन लगवाने को कहा. इसे लेकर एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने भी कहा है कि, पीएम ये दिखाना चाहते थे कि दोनों ही वैक्सीन सेफ और कारगर हैं.

गुलेरिया बोले- दोनों वैक्सीन कारगर और सुरक्षित

पहले आपको बता दें कि एम्स में पीएम मोदी के वैक्सीन लगवाने के बाद एम्स डायरेक्टर ने क्या कहा है. एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा,

“पीएम मोदी ने भारत में बनी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन ली है. इससे उन्होंने ये दिखाया है कि दोनों ही वैक्सीन कारगर और सुरक्षित हैं. हमें आगे आना चाहिए और जो भी वैक्सीन उपलब्ध हो, उसे लेना चाहिए. एक वैक्सीन की दूसरी वैक्सीन से तुलना पर जो विवाद शुरू हुआ था, उसका भी आज अंत हो गया है.”

स्वदेशी वैक्सीन को लेकर क्या था विवाद?

अब आपको बताते हैं कि रणदीप गुलेरिया जिस विवाद की बात कर रहे थे, वो आखिर था क्या...

ADVERTISEMENT

दरअसल भारत में कोरोना की दो वैक्सीन को एक साथ मंजूरी दी गई. पहली वैक्सीन ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की थी, जिसे भारत में कोविशील्ड नाम से लॉन्च किया गया, वहीं दूसरी वैक्सीन भारत बायोटेक और आईसीएमआर ने मिलकर तैयार की थी. जिसे कोवैक्सीन के नाम से हम जानते हैं. सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड को मंजूरी के बाद लोगों ने खुशी जाहिर की और राहत भी महसूस की. लेकिन जैसे ही भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी मिली, तमाम तरह के सवाल खड़े होने लगे. कहा गया कि ट्रायल पूरे होने से पहले ही कैसे वैक्सीन को मंजूरी दे दी गई? साथ ही इसके ट्रायल डेटा की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठे थे.

कई डॉक्टरों-नर्सों ने भी किया था इनकार

इस डर का सबसे बड़ा उदाहरण तब सामने आया था जब वैक्सीनेशन का पहला चरण शुरू हुआ. इस चरण में डॉक्टरों, नर्सों और तमाम फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगना था. लेकिन वैक्सीन को लेकर तमाम तरह के सवालों के बीच खुद डॉक्टरों और नर्सों ने टीका लगवाने से इनकार कर दिया. खुद सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात का खुलासा किया था. नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने कहा था,

“अगर आपको वैक्सीन लगवाई जा रही है और आप इससे इनकार कर रहे हैं तो इसका मतलब आप समाज के प्रति अपना कर्तव्य नहीं निभा रहे. पूरी दुनिया वैक्सीन के लिए संघर्ष कर रही है. यहां पर वैक्सीन मिल गई, देश ने अपने दम पर बनाई. बहुत अच्छे दो-दो वैक्सीन बनाए और फिर हम नहीं ले रहे हैं तो ये गलत है. खासतौर पर जब हमारे हेल्थकेयर वर्कर्स डॉक्टर-नर्सेस वैक्सीन लेने से इनकार कर रहे हैं तो ये दुख की बात है. मैं सरकार की तरफ से विनती करता हूं कि प्लीज वैक्सीन लगवाइए.”
ADVERTISEMENT

प्राइवेट हॉस्पिटल में वैक्सीनेशन

तो कुल मिलाकर देश में बनी वैक्सीन को लेकर लोगों के दिमाग में जो डर था, उसे पीएम ने दूर करने की कोशिश की है. इससे अब प्राइवेट हॉस्पिटलों में होने जा रहे वैक्सीनेशन पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि यहां लोग पैसे देकर वैक्सीन की डोज लेंगे, ऐसे में अब दोनों वैक्सीन पर लोगों का भरोसा होगा और कोवैक्सीन लगवाने में लोग ज्यादा संकोच नहीं करेंगे. बता दें कि दूसरे चरण के बाद अब 250 रुपये प्रति डोज के हिसाब से प्राइवेट हॉस्पिटल वैक्सीन लगा सकते हैं. इसके लिए लोगों को CoWIN पोर्टल पर खुद का रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. जिसमें आप अपना नजदीकी हॉस्पिटल चुन सकते हैं और अपॉइंटमेंट बुक करवा सकते हैं.

(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram चैनल से जुड़े रहिए यहां)

ADVERTISEMENT
Published: 
ADVERTISEMENT
क्विंट हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

120,000 से अधिक ग्राहक जुड़ें!
ADVERTISEMENT