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Sanjay Rawat की कहानी: दाऊद पर रिपोर्टिंग, ठाकरे परिवार के संकटमोचक से ED तक

Sanjay Raut को मुंबई की विशेष अदालत ने 4 अगस्त तक ED की हिरासत में भेज दिया है

Published
भारत
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संजय राउत...शिवसेना की तीखी ‘तलवार’ और ठाकरे परिवार के विश्वासपात्र आज मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. वैसे वो एक 'सामना' के जरिए अपने विरोधियों पर वार करते हैं. एक पत्रकार के रुप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले संजय राउत (Sanjay Raut) पत्रकारिता की वजह से ही राजनीति में आये कैसे वो आगे बताएंगे. अच्छी-बुरी चीजों के लिए हमेशा चर्चाओं में रहने वाले राउत अब ED के शिकंज में हैं. उद्धव की शिवसेना उनके समर्थन में खड़ी है, लेकिन उद्धव ठाकरे को सीएम बनाने के सूत्रधार के रूप पहचान रखने वाले संजय राउत शिवसेना के बागी गुट से समर्थन नहीं जुटा पाए हैं.

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तो चलिए देखते हैं, सजय राउत कौन हैं और उनका यहां तक का सफर कैसा रहा है? इसके अलावा संजय राउत के जीवन के कुछ विवादों पर भी नजर डालेंगे.

संजय राउत का जन्म और शिक्षा

पिछले कुछ समय से शिवसेना में संजय राउत की काफी हनक रही है. उनका जन्म 15 नवंबर 1961 को अलीबाग, महाराष्ट्र में हुआ था. संजय राउत सोमवंशी क्षत्रीय पठारे जाति से आते हैं. उनकी माता का नाम सविता और पिता का नाम राजाराम राउत है. इसके अलावा उनके छोटे भाई सुनील राउत जो शिवसेना से जुड़े हैं. संजय राउत ने मुंबई के वडाला में डॉ. अंबेडकर कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स से बीकॉम किया है. इसके बाद वो पत्रकारिता में आ गये.

पत्रकारिता लाई बालासाहेब के करीब

संजय राउत अपने करियर के शुरुआती दिनों में क्राइम रिपोर्टिंग करते थे. वो लोकप्रभा पत्रिका में उस वक्त के फेमस डॉन दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन और अंडरवर्ल्ड पर लिखे अपने आर्टिकल्स से काफी चर्चाओं में रहते थे. यही वजह थी कि संजय राउत को जल्द ही लोग जानने लगे थे. और संजय राउत की यही चर्चा उन्हें बालासाहेब ठाकरे करीब लेकर आई.

कहा जाता है कि बालासाहेब की नजर राउत पर ऐसी पड़ी कि मातोश्री में उनका आना-जाना काफी बढ़ गया. इसी बीच बाला साहेब ठाकरे ने महज 29 साल के संजय राउत को शिवसेना के मुखपत्र सामना का कार्यकारी संपादक बनाने की पेश कर ही और उन्होंने तुरंत स्वीकार भी कर लिया. तब से अब तक करीब 30 साल बीत गए हैं लेकिन संजय राउत अभी भी सामना के संपादक हैं.
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संजय राउत का राजनीतिक करियर

साल 1992 में बतौर पत्रकार शिवसेना से जुड़ने वाले संजय राउत पार्टी की अंदरूनी गतिविधियों में काफी पहले से सम्मिलित रहते थे लेकिन 2004 में उन्हें पहली बार राज्यसभा भेजा गया. इसके बाद से लगातार वो राज्यसभा में सांसद के तौर पर जाते रहे हैं.

उद्धव ठाकरे को सीएम बनाने में मुख्य सूत्रधार

संजय राउत को महाराष्ट्र में एमवीए सरकार का सूत्रधार कहा जाता है और उद्धव ठाकरे को उस सरकार का मुख्यमंत्री बनाने में उनकी भूमिका खास रही है. इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता. 2019 में जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी शिवसेना से ज्यादा सीटें लेकर आई और देवेंद्र फडणवीस को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाने की बातें होने लगीं.

लेकिन, वो संजय राउत ही थे, जिन्होंने बीजेपी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुआ कहा था कि, उद्धव ठाकरे को सीएम बनाने की बात चुनाव से पहले हुई थी. जिससे बीजेपी हमेशा इनकार करती रही.

बहरहाल, यहां से महाराष्ट्र में एमवीए सरकार की नींव पड़ी और संजय राउत के जरिए ही कांग्रेस और एनसीपी से शिवसेना को वो मेल हुआ. जिसे नदी के दो छोर कहा जा रहा था. वो बात अलग है कि अब एमवीए सरकार गिर चुकी है, शिवसेना टूट चुकी है और संजय राउत ED का सामना कर रहे हैं.

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