कोर्ट में मर्डर, BJP MLA मांग रहे सिक्योरिटी, वेलकम टू यूपी

आप कहेंगे कि कमाल करते हैं जनाब. एक वारदात से पूरे राज्य का नाम कैसे खराब हो सकता है, तो जवाब यहां है

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भारत
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वीडियो एडिटर: विशाल कुमार

जज साहब अदालत में सुनवाई कर रहे थे. वकील जिरह कर रहे थे. तभी तड़ातड़ गोलियां चलने लगती हैं. खुद चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट जान बचाने कर भागने लगते हैं.अदालत के अंदर हुए इस गोलीबारी में हत्या का एक आरोपी मारा जाता है.ये अदालत है बिजनौर में. उत्तर प्रदेश के बिजनौर में,उसी उत्तर प्रदेश में जिसे किसी ने उत्तम प्रदेश बताया तो कभी किसी ने रामराज्य लाने के दावे किए. आप जरा सोचिए कि जहां इंसाफ के मंदिर में ही धांय-धांय हो जाए, वहां आम आदमी इंसाफ मांगने के लिए जाए तो कहां जाए? इस मामले में फिलहाल 18 पुलिसवाले सस्पेंड कर दिए गए हैं और सूबे के डीजीपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलब कर लिया है.

सिर्फ यही वारदात उदाहरण नहीं है, पूरी लिस्ट है

आप कहेंगे कि कमाल करते हैं जनाब. एक वारदात से पूरे राज्य का नाम कैसे खराब हो सकता है. तो हम आपसे कहेंगे कि इसे एक अलहदा केस मानना,गफलत हो सकती है. जिस दिन बिजनौर की अदालत में ये सब हुआ, उसी दिन बीजेपी के ही 100 विधायक विधानसभा में धरने पर बैठ गए. बीजेपी विधायक लोनी के विधायक नंद किशोर गुर्जर पुलिस उत्पीड़न से बचाने की गुहार लगा रहे थे और बाकी विधायक अपने साथी विधायक के सपोर्ट में खड़े थे, यानी धरने पर बैठे थे. यानी अदालत में गोली चल रही है, पुलिस वाले लापरवाही के लिए सस्पेंड हो रहे हैं और सत्ताधारी पार्टी के विधायक धरने पर बैठ रहे हैं क्योंकि उन्हें पुलिस परेशान कर रही है.

ताज्जुब की बात ये जिस दिन यूपी में अदालत में गोलियां चल रही थीं और विधानसभा में विधायक धरने पर बैठे थे, उसी दिन सूबे के सीएम आदित्यनाथ योगी झारखंड में बीजेपी और बीजेपी सरकार के कामों का बखान कर रहे थे. झारखंड की चुनावी रैली में झारखंड के वोटर को समझा रहे थे कि बीजेपी को क्यों जिताना चाहिए?

कोर्ट ने जो कहा, उससे खड़े होते हैं कई सवाल

हाल ही में यूपी से बीजेपी के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को दिल्ली की अदालत ने रेप और अपहरण के मामले में दोषी माना. कोर्ट ने आदेश में जो कहा वो यूपी में कानून-व्यवस्था और शासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है. कोर्ट ने कहा- जब उन्नाव रेप सर्वाइवर ने कुलदीप सेंगर के खिलाफ सीएम ऑफिस को चिट्ठी लिखी तो उसके परिवार के खिलाफ मामले दर्ज होने लगे.

कोर्ट ने ये भी टिप्पणी कि सर्वाइवर को परेशान करने की कार्रवाई में सेंगर का असर साफ दिखता है. जब ये बात लिखी जा रही तो इसी उन्नाव की एक बेटी इस वक्त कानपुर के हैलट अस्पताल में जिंदगी की जद्दोजहद कर रही है.

16 दिसंबर को इस रेप सर्वाइवर ने दबंग आरोपियों पर एक्शन न होने से आजिज आकर एसपी दफ्तर में घुसकर खुद को आग लगा ली थी. इसी अस्पताल में फतेहपुर की एक और रेप सर्वाइवर है, जो 85 फीसदी जल चुकी है. उसे भी रेप के बाद जला दिया गया है.उन्नाव की एक और बेटी कुछ दिन पहले दिल्ली के अस्पताल में दम तोड़ चुकी है. उसने जिन लोगों पर रेप का आरोप लगाया था, उन्होंने ही उसे जला दिया. इसी केस में इंसाफ मांगने के लिए वो उन्नाव से रायबरेली की अदालत जा रही थी.

ऐसे घटनाओं की लिस्ट इतनी लंबी है कि यहां सबको गिनाना मुश्किल है. छोटे में बिग पिक्चर समझना हो तो NCRB का लास्ट डेटा देख लीजिए, जो कि 2017 का है. 2017 में देश में करीब 30 लाख केस दर्ज किए गए. इनमें से सबसे ज्यादा यूपी में ही दर्ज हुए. संख्या थी करीब तीन लाख.

आखिर ये चल क्या रहा है?

और फिर ये भी याद कर लीजिए कि इसी प्रदेश में अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस ठांय-ठांय का नाटक करने को मजबूर हो जाती है इसी प्रदेश में ट्रेनिंग के लिए घोड़े न मिले तो हैरी पॉटर स्टाइल में लाठी को ही घोड़ा मानकर तबड़ाक-तबड़ाक करने को मजबूर होते हैं पुलिस वाले. यूपी की हालत पर प्रियंका गांधी ने कहा है

यहां कानून के राज को अपराधराज में तब्दील कर दिया है. अब अपराधी सीधे कोर्ट में घुसकर गोली मार रहे हैं और जज को अपनी जान बचानी पड़ रही है. पता नहीं जो लोग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को हर रोज "अपराधमुक्त प्रदेश" होने के तमगे देते हैं उनकी आंखों में कौन सी. धूल झोंकी गई है.

अखिलेश यादव ने कहा है कि जज के सामने सरेआम हत्या ने साबित कर दिया है कि प्रदेश की ‘एनकाउंटरवाली सरकार’ का बदमाशों पर कितना प्रभाव है. ये तो बहरहाल सियासत है, क्योंकि एसपी के राज में भी यूपी में कानून व्यवस्था की हालत कुछ ज्यादा अच्छी नहीं थी.

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