लोकसभा में BJP की सीटें घटकर 273, अब बहुमत से थोड़ा ही ज्यादा
अच्छी आर्थिक नीतियां भी राजनीतिक तौर पर बोझ साबित होती हैं
अच्छी आर्थिक नीतियां भी राजनीतिक तौर पर बोझ साबित होती हैं(Photo: PTI)

लोकसभा में BJP की सीटें घटकर 273, अब बहुमत से थोड़ा ही ज्यादा

2019 लोकसभा चुनाव में किस के हाथ आएगी सत्ता की चाबी? बहस और सर्वे शुरू हो चुके हैं. कई पॉलिटिकल पंडित अपने तर्क और कैलकुलेशन के हिसाब से जीत-हार के नतीजों की भविष्यवाणी में जुटे हैं. ऐसे में लोग क्या चाहते हैं, इसका सिर्फ और सिर्फ एक प्रमाणिक पैमाना है-चुनाव. 2014 लोकसभा चुनाव के बाद से अबतक हुए लोकसभा उपचुनाव कर्ई ट्रेंड बताते हैं. जैसे कि एक खास ट्रेंड ये है कि राष्ट्रीय पार्टियों में बीजेपी ने सबसे ज्यादा अपनी सीटिंग सीटें गंवाईं हैं.

जहां 2014 में नरेंद्र मोदी की पार्टी बीजेपी को 282 सीटें हासिल हुईं थी, उसका आंकड़ा संसद में अब घटकर 273 हो चुका है. 272 सीटें बहुमत के लिए हासिल करनी होती है. ये सीटें कम कैसे होती जा रही हैं? इसका बड़ा कारण है उपचुनाव में बीजेपी अपनी कई सीटों को बचाने में नाकाम रही है.

ऐसे में 2014 के बाद से अबतक हुए उपचुनावों में बीजेपी का परफॉर्मेंस कैसा रहा, डालते हैं एक नजर.

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  • बीजेपी के 5 सांसदों ने लोकसभा चुनाव के बाद दिया इस्तीफा
  • बीजेपी के 8 सांसदों की मौत के कारण खाली हुए सीट
  • 2014 के बाद से अबतक 8 बीजेपी की सीटों पर हुए उपचुनाव
  • 8 सीटों में 4 पर बीजेपी को मिली जीत, 4 पर हार
(फोटो: क्विंट हिंदी/रोहित मौर्य)
(फोटो: क्विंट हिंदी/रोहित मौर्य)

2014 में मोदी 'लहर' की बात की जा रही थी. ऐसे में 2014 में हुए बीड और नरेंद्र मोदी की सीट वडोदरा में बीजेपी ने करीब 7 लाख और 3 लाख वोटों से उपचुनाव जीता. 2015 में इस 'लहर' के रास्ते में रुकावट एमपी के रतलाम सीट पर आईं और बीजेपी ने वो सीट कांग्रेस के हाथों गंवा दी. साल 2017 और 2018 में हुए 3 लोकसभा उपचुनाव में इस लहर की रफ्तार कुंद पड़ी और बीजेपी ने गुरदासपुर, अलवर, अजमेर सीट खो दिए.

ऐसे में 2014 में बीजेपी की जीती हुई 9 सीटें फिलहाल उसके हाथ में नहीं है. ये सीटें हैं-

सीटें खाली होने के कारण
सीटें खाली होने के कारण
(फोटो: क्विंट हिंदी/तरुण अग्रवाल)

गोरखपुर, फूलपुर में होने हैं चुनाव

गोरखपुर और फूलपुर की लोकसभा सीटों के लिए 11 मार्च को वोटिंग होगी और नतीजे 14 मार्च को आएंगे. गोरखपुर सीट से योगी आदित्यनाथ और फूलपुर सीट से केशव प्रसाद मौर्य सांसद थे. बाद में योगी के सीएम और केशव प्रसाद मौर्य के डिप्टी सीएम बनने के बाद ये दोनों सीटें खाली हो गईं थीं. जहां गोरखपुर की सीटें पर हमेशा से 'गोरक्षपीठ' का दबदबा रहा है, ऐसे में उम्मीदवार कोई भी हो, योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा जाएगे. बता दें कि साल 1998 से सीएम आदित्यनाथ लगातार इस सीट से सांसद हैं.

वहीं फूलपुर में मुकाबला कड़ा है. ऐतिहासिक रूप से बेहद अहम इस सीट पर पहली बार बीजेपी का कब्जा हुआ है. लेकिन अब वहां बाजी पलट भी सकती है. विपक्ष अगर एक साथ खड़ा होकर चुनाव लड़ता है तो केशव प्रसाद मौर्य की ये सीट हाथ से फिसल सकती है.

गोंदिया सीट से सांसद बीजेपी से थे नाराज

गुजरात चुनाव से ठीक पहले बीजेपी सांसद नानाभाऊ पटेल ने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था. गुजरात के गोंदिया-भंडारा सीट के सांसद पटोले ने किसानों के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए इस्तीफा दिया था.

ये खाली सीट कुछ कहती हैं?

बीजेपी की सीटें उपचुनाव में लगातार कम हुईं, अलवर, अजमेर और रतलाम के बाद अगर फूलपुर की सीट बीजेपी के हाथ से जाती है, तो पार्टी के लिए राजस्थान, यूपी और मध्य प्रदेश की कुल 134 लोकसभा सीटों पर 2019 का चुनाव चुनौती बन जाएगा.