कांग्रेस में बड़े फेरबदल, आजाद, खड़गे, अंबिका सोनी अब नहीं महासचिव

वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और गुलाम नबी आजाद ने उठाया था नेतृत्व पर सवाल

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पॉलिटिक्स
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और गुलाम नबी आजाद ने उठाया था नेतृत्व पर सवाल
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कांग्रेस ने आखिरकार पार्टी से नाराजगी जताने वाले सीनियर नेता गुलाम नबी आजाद के खिलाफ कदम उठा लिया है. आजाद को पार्टी ने महासचिव पद से हटा दिया है. उनके अलावा इस लिस्ट में उन नेताओं का नाम भी शामिल है, जिन्होंने हाल ही में पार्टी नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए थे. जिनमें अंबिका सोनी, मोती लाल वोहरा, लुजेनियो फलारियो और मल्लिकार्जुन खड़गे को भी पार्टी महासचिव पद से हटाया गया है.

कांग्रेस ने अपनी वर्किंग कमेटी में भी बदलाव किए हैं. हालांकि मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद और अंबिका सोनी अब भी कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य हैं. हालांकि वर्किंग कमेटी से कांग्रेस के सीनियर नेता शशि थरूर, पृथ्वीराज चव्हाण और कपिल सिब्बल जैसे नाम भी गायब हैं.

अगर कांग्रेस वर्किंग कमेटी में हुए बदलाव की बात करें तो इसमें कुछ नेताओं को सीडब्ल्यूसी का रेगुलर मेंबर बनाया गया है, उनमें वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम, जितेंद्र सिंह, तारीक अनवर और रणदीप सिंह सुरजेवाला शामिल हैं. देखिए कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्यों की पूरी लिस्ट -

कांग्रेस में बड़े फेरबदल, आजाद, खड़गे, अंबिका सोनी अब नहीं महासचिव
वहीं कांग्रेस ने कई और बड़े फेरबदल किए हैं. कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को पूरे उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त कर दिया है. साथ ही रणदीप सिंह सुरजेवाला को कर्नाटक की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं जितिन प्रसाद को पश्चिम बंगाल का प्रभारी बनाया गया है. कांग्रेस अध्यक्ष को सलाह देने के लिए 6 सदस्यों की एक उच्च स्तरीय कमेटी भी बनाई गई है. 

कांग्रेस ने सोनिया गांधी को राय देने के लिए जो उच्च स्तरीय कमेटी बनाई है, उसमें कांग्रेस नेता एके एंटनी, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, केसी वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक और रणदीप सिंह सुरजेवाला शामिल हैं.

आजाद समेत 23 नेताओं ने लिखी थी चिट्ठी

बता दें कि हाल ही में सीडब्ल्यूसी की बैठक से ठीक पहले कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद समेत 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को एक चिट्ठी लिखी थी. जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस को पूर्णकालिक नेतृत्व मिलना चाहिए जो जमीन पर सक्रिय हो और कांग्रेस मुख्यालय और प्रदेश कांग्रेस कमेटियों के मुख्यालय में भी उपलब्ध हो. असंतुष्ट नेताओं ने प्रदेश इकाइयों के सशक्तिकरण और केंद्रीय संसदीय बोर्ड के गठन जैसे सुधार लाकर संगठन में बड़ा बदलाव करने का अनुरोध भी किया था. इस चिट्ठी के बाद खूब बवाल भी हुआ था, लेकिन कांग्रेस ने अंत में कहा कि परिवार का मनमुटाव था जो अब शांत हो चुका है.

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