आर्टिकल 370:अलगाववादियों के सुर में सुर मिला रही कांग्रेस- जावडेकर

बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस ‘भारत को बांटो के हथकंडे’ पर वापस आई : नड्डा

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पॉलिटिक्स
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प्रकाश जावडेकर
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आर्टिकल 370 को बेअसर करने के मुद्दे पर एक बार फिर सियासी घमासान छिड़ गया है. कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की ओर से जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली की मांग उठाए जाने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोला है. केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता प्रकाश जावडेकर ने कांग्रेस पर अलगाववादियों के सुर में सुर मिलाने का आरोप लगाया है.

जावडेकर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे चीन और पाकिस्तान की तारीफ करते हैं.

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने शनिवार को कहा, "जो लोग कह रहे हैं कि आर्टिकल 370 हटाने का का फैसला गलत था, इसलिए कांग्रेस इसे वापस लेगी. क्या कांग्रेस बिहार चुनाव के घोषणापत्र में यह कहेगी? 370 हटाने के फैसले का जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश की जनता ने स्वागत किया. एक साल में जम्मू-कश्मीर में कितनी तरक्की हुई, यह सभी ने देखा है. फिर भी जो थोड़े अलगाववादी हैं, उनके सुर में सुर मिलाकर कांग्रेस बोल रही है."

इसके अलावा जावडेकर ने कहा, "कांग्रेस अब एक संकीर्ण पार्टी बन चुकी है. इसलिए वो देश की जनता की भावनाओं के खिलाफ भूमिका ले रही है." केंद्रीय मंत्री ने कहा, "राहुल गांधी पाकिस्तान की तारीफ करते हैं. किसी भी विषय पर इनको, चीन की प्रशंसा करना अच्छा लगता है. यही कांग्रेस का रूप है."

जावडेकर ने कहा, “आर्टिकल 370 को लेकर संविधान ने भी कहा था कि थोड़े समय में यह चला जाएगा, लेकिन 70 साल रहा. आर्टिकल 370 हटाने से अलगाववाद खत्म हुआ. वहां दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, ओबीसी सभी समुदायों को आरक्षण का लाभ मिला. देश में जनता के हितों के अनेक कानून कश्मीर में लागू हुए. ये फायदा होकर भी आज कांग्रेस इसके खिलाफ बोल रही है.”

बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस ‘भारत को बांटो के हथकंडे’ पर वापस आई : नड्डा

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस के पास सुशासन के एजेंडे पर बात करने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए बिहार चुनाव से पहले वो ‘भारत को बांटो के गंदे हथकंडे’ पर वापस आ गई है.

नड्डा ने यह टिप्पणी कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के बयान पर की, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी जम्मू-कश्मीर के दर्जे और अधिकारों की बहाली के साथ खड़ी है और मोदी सरकार द्वारा पांच अगस्त 2019 को लिया गया फैसला ‘मनमाना और अंसवैधानिक’ था और उसे रद्द किया जाना चाहिए.

(इनपुट्स: IANS से भी)

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