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अब यूपी में एंट्री की तैयारी में TMC, ललितेशपति त्रिपाठी थाम सकते हैं दामन

ललितेशपति कांग्रेस के दिग्गज नेता और यूपी के मुख्यमंत्री रहे कमलापति त्रिपाठी के परपोते हैं.

Published
<div class="paragraphs"><p>ललितेशपति त्रिपाठी यूपी कांग्रेस के उपाध्यक्ष रह चुके हैं.</p></div>
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यूपी कांग्रेस (Congress) के पूर्व उपाध्यक्ष ललितेशपति त्रिपाठी जल्द ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन थाम सकते हैं. त्रिपाठी मिर्जापुर के मनिहान सीट से विधायक भी रह चुके हैं.

सूत्रों के अनुसार 20 अक्टूबर के बाद उनके टीएमसी में शामिल होने की संभावना है. उधर टीएमसी ने त्रिपाठी के संपर्क में रहने की पुष्टि की है. पिछले महीने सितंबर में ही उन्होंने कांग्रेस छोड़ा था.

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ऐसे वक्त में जब अन्य पार्टियां चुनाव के पहले ब्राह्मणों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही हैं, ऐसे में उनका कांग्रेस छोड़कर जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था.

ललितेश यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके कमलापति त्रिपाठी के परपोते हैं, हालांकि उनका हालिया चुनावी सफर बहुत सफल नहीं कहा जा सकता है. मिर्जापुर-वाराणसी इलाके में त्रिपाठी का प्रभाव माना जाता है.

सूत्रों के अनुसार ललितेश कांग्रेस छोड़ने से पहले पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी से कोलकाता में 2 बार मुलाकात कर चुके हैं.

फिर प्रशांत किशोर ने फिर कांग्रेस को दिया झटका

यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए का करते वक्त चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ललितेश त्रिपाठी के संपर्क में आए थे. कांग्रेस से ललितेश की विदाई और टीएमसी में शामिल होने के पीछ प्रशांत किशोर की बड़ी भूमिका बताई जा रही है.

सूत्रों के अनुसार आईपैक की एक टीम लखनऊ में 2022 के विधानसभा चुनावों पर नजर रखेगी और इसीके आधार पर 2024 के लिए रणनीति तैयार करेगी.

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विधानसभा चुनाव नहीं, 2024 पर होगा फोकस

त्रिपाठी के टीएमसी में शामिल होने के बाद संभावना है कि उन्हें यूपी में पार्टी की जड़ें मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जाएगी, उनका फोकस 2022 विधानसभा चुनाव की जगह 2024 के लोकसभा चुनाव पर होगा.

एक सूत्र ने क्विंट हिंदी से कहा, ''प्रशांत किशोर का फोकस टीएमसी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाकर उसे मुख्य विपक्षी पार्टी बनाना बै. टीएमसी गोवा मेघालय जैसे राज्यों में अपना विस्तार कर रही है. यूपी में उनका फोकस 2024 की जमीन तैयार करने पर होगा.''

फिलहाल यूपी में टीएमसी का कोई असर नहीं है और पहली बार पार्टी राज्य में इतने बड़े स्तर पर विस्तार कर रही है.

हालांकि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने टीएमसी को समर्थन दिया था, इसलिए वो उम्मीद कर होगी कि यूपी विधानसभा चुनाव में टीएमसी पार्टी को समर्थन दे.

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