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कर्नाटक: 3 यात्राएं, 1 चुनाव- BJP,कांग्रेस, JDS की तैयारियां क्या इशारा कर रहीं?

Karnataka Poll 2023: तीन पार्टियों के नेतृत्व में हुई रैलियों से पता चलता है कि लड़ाई में क्या दांव पर लगा है.

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कर्नाटक (Karnataka) में इसी साल अप्रैल और मई के महीने में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं. राज्य में तीनों प्रमुख पार्टियों (BJP, INC, JD-S) के चुनावी दौरे चल रहे हैं. प्रदेश में बने चुनावी माहौल को देखते हुए अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीजेपी, कांग्रेस और जनता दल(एस) के बीच कड़ी टक्कर होने वाली है. पार्टियों द्वारा उठाए जा रहे कदम उनकी चुनावी तैयारियों की ओर इशारा कर रही हैं.

आइए समझते हैं कि कर्नाटक में बड़ी राजनीतिक यात्राओं पर, किन प्रमुख निर्वाचन क्षेत्र को ये कवर कर रहे है और 2023 के बड़े चुनावी युद्ध के लिए तैयारी कर रहे हर दल का नजरिया क्या है.

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BJP की तीन यात्राएं

कर्नाटक की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने विधानसभा चुनावों के लिए, तीन-आयामी यात्रा योजना बनाई है, जिसमें 'जन संकल्प यात्रा', 'रथ यात्रा' और 'विजय संकल्प यात्रा' को शामिल किया गया है. चुनाव से काफी पहले अक्टूबर 2022 में ही तैयारी शुरू हो गई थी और इसके बाद 24 फरवरी को रथ यात्रा और 1 मार्च को विजय संकल्प यात्रा शुरू हुई थी.

'जन संकल्प यात्रा' का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और मौजूदा मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई सहित बीजेपी के प्रमुख नेताओं ने किया था. 130 रथों वाली इस यात्रा को बोम्मई ने हरी झंडी दिखाई थी. इसके अलावा 'विजय संकल्प यात्रा' को गृह मंत्री अमित शाह ने हरी झंडी दिखाई और इसे पार्टी का सबसे बड़ा अभियान कार्यक्रम माना जा रहा है.

बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक पार्टी का नजरिया सरल था. एक सीनियर बीजेपी नेता ने द क्विंट को बताया, "हम आम लोगों तक पहुंच बनाने की ओर ध्यान देना चाहते थे. इसके बाद अपने मूल मतदाताओं की ओर रुख करते हुए, जीत की कोशिश के साथ यात्रा खत्म करना चाहते थे.

मतलब लगातार पार्टी अपने गढ़ और कमजोर इलाकों में एक साथ प्रचार करने की कोशिश करती रही है.

बीजेपी ने किन सीटों पर फोकस किया? इसके जवाब में पार्टी सूत्रों ने कहा कि उन्हें अब तक के सभी निर्वाचन क्षेत्रों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है. पार्टी के एक नेता ने बताया कि ज्यादा फोकस तटीय कर्नाटक, दक्षिण और उत्तरी कर्नाटक के निर्वाचन क्षेत्रों पर रहा है.

बीजेपी के एक सीनियर लीडर ने कहा कि तटीय कर्नाटक में हमें जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है. दक्षिण में भी जमीनी स्तर पर अच्छा सपोर्ट है क्योंकि बेंगलुरू हमेशा से हमारा फोकस क्षेत्र रहा है. उत्तरी कर्नाटक में, जहां बोम्मई वर्तमान में डेरा डाले हुए हैं, पार्टी जेडी(एस) को उखाड़ फेंकने की उम्मीद करती है.

क्या हैं बीजेपी के प्रमुख वादे?: बीजेपी फिलहाल किसानों को सिंचाई और बिजली के साथ समर्थन देने की बड़ी योजनाओं को छोड़कर नए वादों की एक लिस्ट के साथ आना बाकी है. उदाहरण के लिए, बेलगावी में सीएम बोम्मई ने दलित और आदिवासी स्कूली छात्रों के लिए शिक्षा में भारी निवेश करने का वादा किया है. वहीं कोप्पल में, पार्टी ने 100 फूड प्रोसेसिंग सेंटर (Food Processing Centre) बनाने का वादा किया है. लेकिन सवाल ये है कि क्या पार्टी विपक्ष की सत्ता विरोधी लहर पर टिक पाएगी?

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Congress की 'प्रजा ध्वनि यात्रा'

हाल के दिनों में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ 'भारत जोड़ो यात्रा' रही है, जिसका नेतृत्व राहुल गांधी ने किया था. बता दें पार्टी राज्य में इस यात्रा की सफलता की नकल "प्रजा ध्वनि यात्रा" के रूप में कर रही है.

इस दौरे का नेतृत्व उत्तर कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और दक्षिण कर्नाटक में डीके शिवकुमार कर रहे हैं. कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष, प्रियांक खड़गे के मुताबिक एक बार जब उनके दौरे का पहला चरण समाप्त हो जाएगा, तो शिवकुमार उत्तर और सिद्धारमैया दक्षिण की यात्रा करेंगे.

उनका कहना है कि वो अपने चुनावी वादों के बारे में बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाने के साथ इसको फॉलो भी कर रहे हैं. उनके मुताबिक बीजेपी और JD(S) के गढ़ों में भी उन्हें जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है.

अब तक, कांग्रेस ने अपने वादों में- राज्य में हर घर 200 यूनिट फ्री बिजली, प्रत्येक महिला गृहिणी के लिए 2 हजार रुपये और राज्य में प्रत्येक गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवार को हर महीने 10 किलो चावल बांटना शामिल किया है.

खड़गे ने अपने बयान में कहा कि लोगों को हम अपने वादों की गारंटी देने वाले कार्ड बांट रहे हैं, क्योंकि राज्य में यात्राएं आगे बढ़ रही हैं.

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किन सीटों पर फोकस करेगी कांग्रेस?: इस सवाल पर खड़गे ने कहा कि सभी 224 निर्वाचन क्षेत्र हमारे लिए अहम हैं लेकिन हासन (Hassan) में चुनावी लड़ाई नजर आ रही है, जो JD(S) का गढ़ माना जाता है. उन्होंने आगे कहा कि हमने मैसूरु, मेंगलुरु उत्तर और उडुपी जैसे जिलों में अच्छा प्रदर्शन किया है, जहां बीजेपी का दबदबा रहा है.

पार्टी मुख्य रूप से बीजेपी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर पर जोर दे रही है और सरकारी भ्रष्टाचार पर ध्यान दे रही है. इससे पहले भी पार्टी ने '40% Sarkara' अभियान चलाया था, जिसके द्वारा बीजेपी नेताओं पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था.

अब इन बातों के बीच सवाल उठता है कि क्या कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस 120 से ज्यादा सीटें हासिल कर पाएगी?

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JD(S) की 'पंचरत्न यात्रा'

JD(S) के मुताबिक पार्टी के नेता एचडी कुमारस्वामी की 'पंचरत्न यात्रा' के रूप में पार्टी ने पहले ही 236 सभाएं की हैं और 90 निर्वाचन क्षेत्रों को कवर किया है. JD(S) के राष्ट्रीय प्रवक्ता तनवीर अहमद ने कहा कि हमें सभी निर्वाचन क्षेत्रों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है लेकिन हासन, चिक्कमंगलूर, तुमकुर, मैसूरु, मांड्या और रायचूर से भी जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है.

JD(S) ने कहा कि जहां बीजेपी और कांग्रेस ने 2022 में अपना अभियान शुरू किया, वहीं JD(S) ने सबसे लंबी दूरी तय की है.

पार्टी ने अपने पांच अहम वादों का ऐलान किया है, जिसमें हर ग्राम पंचायत के लिए 30 बेड वाला हॉस्पिटल, सभी ग्राम पंचायतों के छात्रों के लिए किंडरगार्टन (kindergarten) से बारहवीं क्लास तक इंग्लिश मीडियम की शिक्षा, किसानों के लिए सिंचाई में निवेश, प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है. ग्रामीण इलाकों में और पूरे कर्नाटक में फैले खास आर्थिक क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा देंगे.

अहमद ने कहा कि हमें उम्मीद है कि पार्टी जमीनी स्तर और शहरी जनता के बारे में ध्यान देने में सक्षम होगी.
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पार्टी से इस बात से घबराने की उम्मीद है कि कर्नाटक में JD(S) सिर्फ एक क्षेत्रीय पार्टी है, जों बीजेपी और कांग्रेस दोनों की कमियों को सामने लाती है. चुनाव से पहले JD(S) और कांग्रेस का गठबंधन नहीं हुआ है. 2018 में विधानसभा रिजल्ट का ऐलान होने के बाद दोनो पार्टियों ने हाथ मिलाया था.

पार्टी से इस तथ्य को भुनाने की कोशिश की है कि कर्नाटक में जेडी (एस) एकमात्र क्षेत्रीय पार्टी है और बीजेपी और कांग्रेस दोनों की कमियों को सामने लाती है.

फिलहाल पार्टी कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन तक नहीं पहुंची है, जिसके साथ उसने 2018 में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद हाथ मिलाया था.

अब सवाल है कि क्या जेडी (एस) अपने व्यापक अभियान से कांग्रेस के वोट काट लेगी?

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