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कांग्रेस के लिए कर्नाटक से निकला MP में जीत का फॉर्मूला, BJP का काउंटर प्लान?

कांग्रेस मध्य प्रदेश में भी कर्नाटक की तर्ज पर बीजेपी को घेरने का प्लान बना रही है.

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कर्नाटक (Karnataka) में कांग्रेस को मिली बंपर जीत के बाद पार्टी मध्य प्रदेश में भी कर्नाटक की तर्ज पर बीजेपी को घेरने का प्लान बना रही है. कर्नाटक में कांग्रेस, बीजेपी को कमीशनखोरी, करप्शन, महंगाई, कट्टरवाद के मामले में घेरने में सफल रही है और पार्टी सूत्रों की मानें तो मध्य प्रदेश में भी बीजेपी को हराने के लिए पार्टी इसी लाइन पर स्ट्रेटजी तैयार कर रही है. बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने इसके लिए एक आरोप पत्र तैयार किया है जिसमें लगभग 400 बिंदुओं को रखा गया है. इसमें आर्थिक अनियमितता, कुशासन और कुप्रबंधन के मामले शामिल हैं. 

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बीजेपी को चुनौती देने की रणनीति तैयार

इतना ही नहीं गांव और मंडल स्तर की कमेटियों के माध्यम से भी बीजेपी-संघ के संगठन शक्ति को भी चुनौती देने का मसौदा तैयार किया जा रहा है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बाकी हैं. ऐसे में कांग्रेस अभी से तैयारियों में जुट गई है. पिछली बार सत्ता हाथ से निकलने के बाद कांग्रेस इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ कई बार कह चुके हैं कि उनकी सरकार धोखाधड़ी से गिराई गई है.

एमपी में बीजेपी को घेरने का क्या है प्लान?

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस, बीजेपी को CAG रिपोर्ट, लोकायुक्त की कार्रवाई और अन्य घोटालों को तथ्यात्मक तरीके से सोशल मीडिया और डोर टू डोर कैंपेन के माध्यम से जनता तक पहुंचाने की कोशिश करेगी.

बता दें कि पिछले वर्ष CAG की एक रिपोर्ट में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अंतर्गत आने वाले विभाग में पोषण आहार योजना में बड़ा घोटाला सामने आया था.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस योजना के तहत करीब 49 लाख रजिस्टर्ड बच्चों और महिलाओं को दिए जाने वाले पोषण आहार में घोटाले पर कैग की विस्तृत रिपोर्ट आई थी. 

हजारों किलो वजनी पोषण आहार जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी गई है वो कागजों में ट्रक से आया तो लेकिन जांच में पाया गया कि कागजों में जिन ट्रकों के नंबर बताए गए थे वो दरअसल मोटरसाइकिल, ऑटो, कार, टैंकर के थे.

इसी रिपोर्ट में बताया गया कि करोड़ों का राशन उन बच्चों के नाम पर बांट दिया गया जो स्कूल ही नहीं जाते हैं.

कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हफीज ने कहा कि

क्विंट हिंदी से बात करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हफीज ने कहा कि "जैसे कर्नाटक में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा, वैसे ही मध्य प्रदेश में ये पहले से ही बड़ा मुद्दा है. इसके अलावा हमारी योजनाओं में महंगाई से राहत एक अहम लक्ष्य है. हम गैस सिलेंडर और डायरेक्ट महिलाओं के खाते में सम्मान राशि जमा करने को लेकर पहले ही घोषणा कर चुके है." इसके अलावा कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक मध्यान्ह भोजन, अवैध खनन, नर्सिंग कॉलेज में तीन साल से एक ही क्लास में रुके हुए बच्चे, पैरामेडिकल छात्रवृत्ति, सड़क एवं बांध निर्माण के अलावा टोल टैक्स और परिवहन नाकों में कथित तौर पर चल रहे कमीशन के खेल को जनता तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे.

हालांकि बीजेपी सरकार ने अपने इस वर्ष के बजट में युवाओं को एक लाख नौकरी देने का वादा जरूर किया था लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मध्य प्रदेश विधानसभा के हालिया सत्र में कांग्रेस विधायक मेवाराम जाटव के सवाल पर जवाब देते हुए सरकार ने बताया की बीते तीन वर्षों में राज्य में सिर्फ 21 लोगों को नौकरी दी गई है. जबकि इस दौरान 39 लाख बेरोजगारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. ऐसे में कांग्रेस के पास बेरोजगारी भी एक बड़ा मुद्दा है और पार्टी इसको चुनावी मुद्दा बनाने और बीजेपी की खामियां गिनाने की भरपूर कोशिश करेगी.
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कांग्रेस का बूथ और मंडलम सेक्टर पर फोकस, बीजेपी-संघ के संगठन की काट? 

बीते लगभग 10 महीनों से मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी अपने सबसे नीचे वाले हिस्से से काम चालू किए हुए है. गांव-गांव में पार्टी के समर्थक, पार्टी के कार्यकर्ताओं को मनाने, साधने की कोशिश जारी है. इसी वर्ष फरवरी में हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में बूथ और मंडलम सेक्टर कमेटियों के आधिकारिक गठन पर मोहर लगाई गई थी. कांग्रेस से वर्तमान राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को कार्यकर्ताओं को साधने की जिम्मेदारी दी गई है. दिग्विजय बीते कई महीनों से विधानसभा वार इन कमेटियों की बैठक ले रहे हैं. कांग्रेस को यह भी पता है कि उसके संगठन के लोग पूरी ताकत से काम नहीं कर रहे हैं और यह बात खुद दिग्विजय सिंह ने कई बैठकों में कबूली है.

पार्टी को जड़ से मजबूत करने की जरूरत

कांग्रेस पार्टी के सूत्रों की मानें तो पार्टी की बात जनता तक पहुंचाने में निचली इकाई का सर्वप्रथम और सबसे बड़ा योगदान होता है. "जैसा कि बीजेपी और संघ का संगठन कार्य करता है, उनके कार्यकर्ता गांव-गांव में हैं और एक्टिव हैं. हमारे भी कार्यकर्ता हैं, समर्थक हैं लेकिन किन्हीं वजहों से काफी लोग एक्टिव नही हैं और अपनी इस इकाई को एक्टिवेट करके हम बीजेपी का असली चेहरा प्रदेश के हर व्यक्ति, हर घर तक पहुंचाना चाहते हैं. हमारे शीर्ष नेता इस काम में लगे हुए हैं," कांग्रेस पार्टी सूत्र.

राज्य के वरिष्ठ पत्रकारों की मानें तो कांग्रेस और बीजेपी के बीच इस बार मुकाबला बहुत जोरदार होने वाला है. दोनों ही दल अपनी पूरी ताकत झोंकने में लगे हुए हैं. राज्य के एक वरिष्ठ पत्रकार नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि "एमपी में कांग्रेस के पास इस वक्त पाने के लिए बहुत कुछ है. आई हुई सत्ता खिसक गई, जनता भी कहीं न कहीं 18 सालों से बीजेपी की सरकार देख रही है और शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बने हुए हैं, ऐसे में मुद्दों की कमी नही हैं. अब देखने की बात यह होगी की कांग्रेस कितने बेहतर तरीके से अपनी बात जनता तक पहुंचा पाती है."

बीजेपी भी लगा रहीं है पूरी ताकत

वहीं एक अन्य पत्रकार समूह का मानना है कि बीजेपी भी चुनाव कई फ्रंट पर लड़ने को तैयार है और इसी तरह से डाइवर्सिफाइड इलेक्शन बीजेपी की स्ट्रेटजी में भी दिखता है. "अगर बात करें बीजेपी की तो पार्टी इस समय, जातिगत समीकरण, धार्मिक समीकरण, महिलाओं और पुरुषों की अलग कैटेगरी, युवाओं को अलग तरह से लुभाने की कोशिश में है, आदिवासी और दलित समाज के लिए अलग योजनाएं हैं और भी कई तरह की योजनाओं को देखा जा रहा है, ऐसे में कांग्रेस के लिए चुनाव और कठिन बन सकता है".

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