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Chhattisgarh: भूपेश बघेल ने महिलाओं को परोसा खाना, कुपोषण दर में गिरावट

Chhattisgarh: तीन साल में कुपोषण दर में 5.61% की कमी आने का दावा

Published
राज्य
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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कुपोषण मुक्ति के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे काफी हद तक सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं. महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वजन त्यौहार 2022 के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं. इसके अनुसार प्रदेश में पिछले एक वर्ष में कुपोषण के दर में 2.1 प्रतिशत की कमी आई है. वजन त्यौहार के आंकड़े देखें तो साल 2019 में छत्तीसगढ़ में कुपोषण की दर 23.37 प्रतिशत थी, जो साल 2021 में घटकर 19.86 प्रतिशत रह गई. वहीं 2022 में घटकर ये आंकड़ा 17.76 प्रतिशत पर आ गया. इस प्रकार पिछले तीन सालों में कुपोषण की दर में 5.61 प्रतिशत की कमी दिखाई दी है.

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साल 2019 में हुई थी सुपोषण अभियान की शुरूआत

भूपेश बघेल ने साल 2019 में 02 अक्टूबर से छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति के लिए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान शुरू किया गया. सरकार का दावा है कि अभियान से प्रदेश के अबतक, लगभग 02 लाख 11 हजार बच्चे कुपोषण के चक्र से बाहर आ गए हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के 2020-21 में जारी रिपोर्ट के आंकड़े देखे जाएं, तो प्रदेश में 5 साल तक बच्चों के वजन के आधार पर कुपोषण की दर 6.4 प्रतिशत कम होकर 31.3 प्रतिशत हो गई है. ये दर कुपोषण की राष्ट्रीय दर 32.1 प्रतिशत से भी कम है.

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Chhattisgarh: तीन साल में कुपोषण दर में 5.61% की कमी आने का दावा

आंगनबाड़ी में बच्चों को स्वादिष्ठ और पौष्टिक आहार दिया जा रहा है.

(फोटो: क्विंट हिंदी)

क्या है "वजन त्यौहार" ?

राज्य में बच्चों में कुपोषण दर (Malnutrition Rate) के आंकलन हेतु हर साल वजन त्यौहार का आयोजन किया जाता है. वजन त्यौहार के दौरान प्रदेश के आंगनबाड़ियों में अभियान चलाकर बच्चों का वजन, ऊंचाई मापकर उनकी उम्र के आधार पर कुपोषण का आंकलन किया जाता है. इस दौरान बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाता है, फिर उन आंकड़ों को ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में एंट्री की जाती है.

इस साल छत्तीसगढ़ में अगस्त के महीने में वजन त्यौहार का आयोजन किया गया था. राज्य सरकार के आंकड़ों के हिसाब से प्रदेश के 33 जिलों के करीब 23 लाख 80 हजार बच्चों का वजन लिया गया. इनमें 19 लाख 56 हजार 616 बच्चे सामान्य पाए गए, जबकि 04 लाख 22 हजार 413 बच्चों में कुपोषण की स्थिति देखी गई. इनमें 86 हजार 751 बच्चे गंभीर कुपोषण और 03 लाख 35 हजार 662 बच्चे मध्यम कुपोषित मिले. इसी प्रकार बच्चों की ऊंचाई के आधार पर बौने बच्चों का भी आंकलन किया गया है.

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मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के परिणाम

बघेल की पहल पर मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के माध्यम से कुपोषण मुक्ति के लिए प्रदेशभर अभियान चलाया जा रहा है. महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य और सुपोषण को प्राथमिकता क्रम में रखते हुए इसके लिए राज्य में डीएमएफ, सीएसआर और अन्य मदों की राशि का उपयोग किये जाने की अनुमति मुख्यमंत्री बघेल ने दी. साथ ही जनसहयोग भी लिया गया है.

योजना के तहत कुपोषित महिलाओं, गर्भवती और शिशुवती माताओं के साथ बच्चों को गरम भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. राशन में आयरन और विटामिन युक्त फोर्टीफाइड चावल और गुड़ देकर लोगों के दैनिक आहार में विटामिन्स और मिनरल्स की कमी को दूर करने का प्रयास किया गया है.

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महिलाओं और बच्चों को फल, सब्जियों सहित सोया और मूंगफली की चिक्की, पौष्टिक लड्डू, अण्डा सहित मिलेट्स के बिस्कुट और स्वादिष्ठ पौष्टिक आहार के रूप में दिया जा जा रहा है. इससे बच्चों में खाने के प्रति रूचि जागने से कुपोषण की स्थिति में सुधार आया है. प्रदेश में कुपोषण मुक्ति के लिए विभिन्न विभागों के साथ योजनाओं कोे एकीकृत कर समन्वित प्रयास किये जा रहे हैं. इससे तेजी से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के साथ पोषण स्तर में सुधार देखा जा रहा है.

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