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तिरुपति बालाजी के मुख्य पुजारी ने नहीं कहा-ना दो दान, दूसरे धर्मों पर होता खर्च

दावा है कि तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी ने कहा ''दान का पैसा ईसाई और मुस्लिम समुदाय पर होता है खर्च''

Updated

एक वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी ने हिंदुओं से मंदिर की दान पेटी में कोई दान न देने की अपील करते हुए कहा है कि ''मंदिर का पैसा हिंदुओं पर नहीं ईसाई और मुस्लिम समुदाय पर खर्च होता है''. वायरल मैसेज को मुख्य पुजारी की तरफ से जारी की गई अपील की तरह शेयर किया जा रहा है.

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हमारी पड़ताल में ये दावा भ्रामक निकला. ये सच है कि तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी कई बार मंदिर के प्रबंधन पर दान का सही उपयोग न करने के आरोप लगा चुके हैं. एक इंटरव्यू में वे लोगों से दान न करने को भी कह चुके हैं. लेकिन, न तो मैसेज में बताया गया सांप्रदायिक एंगल सच है. न ही मुख्य पुजारी ने आंध्र प्रदेश सीएम YS जगनमोहन रेड्डी पर ऐसा कोई आरोप लगाया है, जैसा कि वायरल मैसेज में दावा है.

क्विंट से बातचीत में भी मुख्य पुजारी एवी रमन दीक्षितुलु ने पुष्टि की कि उन्होंने मंदिर में आने वाले दान का सही उपयोग न होने को लेकर चिंता जरूर जाहिर की है. लेकिन, ये नहीं कहा कि मंदिर में आने वाला दान मुस्लिम और ईसाई समुदाय पर खर्च होता है. न ही किसी पर कोई राजनीतिक आरोप लगाया है.

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दावा

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा मैसेज है -

तिरुपति बालाजी मंदीर के मुख्य पुजारी ने लोगों से हाथ जोड़कर निवेदन किया है कि तिरुपति बालाजी मंदिर के दान पेटी में कोई हिंदू श्रद्धालु पैसे दान न करे, क्योंकि मंदिर की एक फूटी कौड़ी भी हिंदू मंदिर और हिंदू समाज के कल्याण में उपयोग नहीं होता है. ये पैसा आंध्र प्रदेश के कन्वर्टेड ईसाई मुख्यमंत्री जगमोहन रेड्डी मुस्लिम और ईसाई लोगो पर खर्चा करते हैं. हिंदू मंदिर का पैसा हिंदुओं के कब काम आयेगा?

फेसबुक और ट्विटर पर कई यूजर्स ने इस मैसेज को शेयर किया. अर्काइव यहां, यहां, यहां और यहां देखे जा सकते हैं.

मैसेज वॉट्सऐप पर भी वायरल है

वॉट्सऐप पर भी वायरल है मैसेज

फोटो : स्क्रीनशॉट/वॉट्सऐप

कई यूजर्स ने दावे के साथ इंटरव्यू का एक 2 मिनट का वीडियो भी शेयर किया.

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पड़ताल में हमने क्या पाया?

मैसेज में किए गए सांप्रदायिक और राजनीतिक दावों की पुष्टि के लिए हमने मुख्य पुजारी पीवी रमन दीक्षितुलु से ही संपर्क किया. क्विंट से बातचीत में उन्होंने बताया कि मंदिर में आने वाले दान का सही उपयोग न होने को लेकर वे चिंता जाहिर कर चुके हैं. यही वजह है कि उन्होंने इंटरव्यू में श्रद्धालुओं से अपील की थी कि दान ऐसी जगह करें, जहां उसका सही उपयोग हो. दीक्षितुलु ने मैसेज में किए गए सांप्रदायिक दावे को भी गलत बताया.

मुख्य पुजारी होने के नाते मेरा फर्ज बनता है कि मैं ये भी देखूं कि श्रद्धालुओं का दान किया गया पैसा सही जगह पर खर्च हो रहा है या नहीं. कांक्रीट का जंगल बनाने या बड़ी संख्या में सैलरी बांटना श्रद्धालुओं के दान का सही उपयोग नहीं है. न ही धर्म परिषद को पैसे देना सही उपयोग है. इसीलिए मैंने अपील की थी कि तिरुपति बालाजी मंदिर में दान न करें. मैंने ऐसा कभी नहीं कहा कि मंदिर में आने वाला दान मुस्लिम और ईसाई समुदाय पर खर्च होता है. मेरे बयान को गलत तरीके से प्रोपैगेट किया जा रहा है.
एवी रमन दीक्षितुलु, मुख्य पुजारी तिरुपति बालाजी मंदिर
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4 साल से ट्रस्ट पर दान में भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं मुख्य पुजारी 

हमने ऐसी मीडिया रिपोर्ट्स सर्च करनी शुरू कीं जिनसे पता चल सके कि तिरुपति बालाजी ट्रस्ट और मुख्य पुजारी के बीच की अनबन का पूरा मामला क्या है

2018 की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स हमें मिलीं, जिनसे पता चलता है कि तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी एवी रमन दीक्षितुलु ने संस्था के एडमिनिस्ट्रेशन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था.
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द न्यूज मिनट की 16 मई, 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य पुजारी एवी रमन दीक्षितुलु ने मंदिर में आए दान का ऑडिट कराए जाने की मांग की थी. उन्होंने इस संबंध में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा था.

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दीक्षितुलु ने मंदिर प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. आरोप था कि दान का सही उपयोग नहीं होता, मंदिर से कई आभूषण गायब हैं और मंदिर के प्राचीन ढांचे से छेड़छाड़ हुई. न्यूज मिनट की इस रिपोर्ट के जरिए एक बार इन आरोपों को विस्तार से देखते हैं.

  • एवी रमन दीक्षितुलु का आरोप था कि ''मंदिर प्रशासन ने मंदिर की कुछ पुरानी दीवारों पर वीआईपी लोगों के लिए एक अलग लेन बनाने के लिए ड्रिल मशीन चलाकर छेद किए, . इससे मंदिर की पवित्रता को ठेस पहुंची है''. दीक्षितुलु ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) से इस मामले में हस्तक्षेप की भी मागं की थी.

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  • मुख्य पुजारी का ये भी आरोप था कि मंदिर में दान किए गए कुछ आभूषण (Ornaments) गायब हैं. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था ''अब हमें सिर्फ वो नए आभूषण ही दिखते हैं, जो पवित्र यात्रा के दौरान मूर्ति पर चढ़ाए जाते हैं. हमें नहीं पता उन आभूषणों का क्या हुआ जो कृष्णदेवराय, राघोजी भोंसले, मैसूर के राजाओं और दीवानों ने दान किए थे''.

  • आरोप ये भी था कि मंदिर प्रशासन की तरफ से पुजारियों की नियुक्ति में हस्तक्षेप किया जाता है. कई बार प्रशासन से जुड़े लोग अपनी पसंद के मुताबिक पुजारियों की नियुक्ति करते हैं.

मुख्य पुजारी ने मंदिर में आने वाले दान में भ्रष्टाचार समेत कई आरोप लगाए, लेकिन इससे जुड़ी किसी भी मीडिया रिपोर्ट में ये जिक्र नहीं है कि उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि दान का पैसा ईसाई और मुस्लिम समुदाय पर खर्च होता है.
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हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य पुजारी के आरोपों के अगले ही दिन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के ट्रस्ट बोर्ड ने एक मीटिंग कर फैसला लिया था कि 64 वर्ष से ज्यादा उम्र के सभी पुजारियों को रिटाटर होना होगा. इस फैसले के बाद मुख्य पुजारी एवी रमन दीक्षितुलु समेत तीन पुजारियों को रिटायरमेंट लेना पड़ा. ट्रस्ट ने मुख्य पुजारी को नोटिस भी जारी किया था.

मैसेज में YS जगनमोहन रेड्डी पर लगाए गए आरोप कितने सच?

वायरल मैसेज में दावा है कि तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी ने सीएम जगन मोहन रेड्डी पर हिंदुओं के दान का इस्तेमाल मुस्लिमों और ईसाईयों पर खर्च करने का आरोप लगाया है. ये दावा सरासर गलत है. सच तो ये है कि तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रशासन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के बाद रिटायरमेंट के लिए मजबूर किए गए मुख्य पुजारी की वापसी YS जगन मोहन रेड्डी की सरकार में हुई.

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द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर ट्रस्ट के फैसले के बाद दो पुजारियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हाई कोर्ट ने ट्रस्ट के फैसले को रोकने का आदेश दिया. लेकिन, इस आदेश का पालन नहीं हो सका. तभी विपक्ष के नेता Y S जगनमोहन रेड्डी ने वादा किया था कि वो जैसे ही सत्ता में आएंगे, मंदिर से रिटायर होने के लिए मजबूर किए गए पुजारियों की वापसी होगी.

2019 में रेड्डी सत्ता में आए. इसके बाद राज्य सरकार ने मुख्य पुजारी की वापस नियुक्ति का आदेश दिया. इसके बाद YS जगनमोहन रेड्डी को वापस मंदिर का मुख्य पुजारी नियुक्त किया गया.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नियुक्ति के बाद अक्टूबर 2021 में फिर मुख्य पुजारी एवी रमन दीक्षितुलु ने ट्रस्ट के एडमिनिस्ट्रेशन पर मंदिर में आए दान का सही उपयोग न करने के आरोप लगाए.

गौर करने वाली बात ये है कि मुख्य पुजारी दीक्षितुलु ने इन आरोपों की शिकायत आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री YS जगमोहन रेड्डी से भी की थी. इसी से स्पष्ट होता है कि उन्होंने YS जगमोहन रेड्डी पर कोई आरोप नहीं लगाया, जैसा कि वायरल मैसेज में दावा किया गया है.
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क्विंट से बातचीत में एवी रमन दीक्षितुलु ने पुष्टि की कि उन्होंने सिर्फ मंदिर में आने वाले दान का सही उपयोग न आने की बात कही थी. कोई राजनीतिक बात नहीं कही.

हमने तिरुपति बालाजी मंदिर ट्रस्ट से भी संपर्क किया. संस्था की तरफ से क्विंट को मेल पर दिए जवाब में कहा गया कि ''वायरल मैसेज में किए गए दावे सच नहीं हैं. संस्था की तरफ से ऐसी कोई अपील जारी नहीं की गई है.''
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दावे के साथ वायरल हो रहे इस वीडियो का सच क्या है?

दावे के साथ इंटरव्यू का ये 2 मिनट का हिस्सा भी वायरल है

फोटो : Screenshot/फेसबुक

तेलुगु भाषा के इस वीडियो में मुख्य पुजारी ये कहते दिख रहे हैं कि ''मंदिर प्रशासन मंदिर में आए दान का पैसा स्टाफ, इंजीनियर्स, ठेकेदार और धर्म प्रचार परिषद के सदस्यों को सैलरी देने में खर्च कर रहा है. श्रद्धालुओं को मंदिर में दान नहीं देना चाहिए''

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हालांकि, इस वीडियो क्लिप में मुख्य पुजारी ने ऐसा कहीं नहीं कहा कि मंदिर का पैसा मुस्लिम और ईसाई समुदाय पर खर्च हो रहा है. न ही उन्होंने सीएम YS जगनमोहन रेड्डी पर ऐसा कोई आरोप लगाया जैसा मैसेज में दावा है. ''

जिस इंटरव्यू का 2 मिनट का क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, वो इंटरव्यू भी असल में 3 साल पुराना है. वायरल क्लिप में नीचे की तरफ हमें Encounter with Swetha Reddy लिखा दिखा. इससे जुड़े कीवर्ड्स सर्च करने पर हमें यूट्यूब पर ये पूरा इंटरव्यू मिला. ये पूरा इंटरव्यू यूट्यूब चैनल Bhavani HD Movies पर 6 मार्च, 2019 को अपलोड किया गया था.

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दीक्षितुलु ने क्विंट से बातचीत में वायरल हो रहे इस इंटरव्यू का भी जिक्र किया और कहा ''उस इंटरव्यू में भी मैंने दान के पैसे का सही उपयोग न होने की बात कही थी. साथ ही लोगों से अपील की थी कि दान ऐसी जगह दें जहां उसका सही उपयोग हो. न तो मैंने ये कहा कि मंदिर का पैसा ईसाई और मुस्लिमों पर खर्च होता है. न ही मुझे राजनीति से कोई मतलब है''

साफ है सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज में तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है. और मामले को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की गई है.असलियत में ये मामला कहीं से कहीं तक सांप्रदायिक नहीं है. ये मामला पूरी तरह एक मुख्य पुजारी की तरफ से मंदिर प्रशासन पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों का मामला है.

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