राम मंदिर या बाबरी मस्जिद के पक्ष में ‘वोटिंग’ वाला लिंक फेक है
वायरल लिंक फेक है सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा नहीं कहा है
वायरल लिंक फेक है सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा नहीं कहा है(फोटो: क्विंट)

राम मंदिर या बाबरी मस्जिद के पक्ष में ‘वोटिंग’ वाला लिंक फेक है

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वोटिंग लिंक तेजी से वायरल हो रहा है. इस लिंक के जरिए लोगों से पूछा जा रहा है कि अयोध्या में क्या बनना चाहिए- मंदिर या मस्जिद? लोगों से अपील की जा रही है कि वो मंदिर या मस्जिद के पक्ष में वोट करें.

इसी तरह का वोटिंग पैटर्न सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है
इसी तरह का वोटिंग पैटर्न सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है
(फोटो: सोशल मीडिया)

ऐसा लगता है कि इस लिंक को सांप्रदायिकता फैलाने के इरादे से वायरल किया जा रहा है. इस लिंक के साथ लिखा गया है कि राम मंदिर की तुलना में बाबरी मस्जिद के पक्ष में ज्यादा वोट पड़ रहे हैं. हिंदुओं से अपील की जा रही है कि मंदिर के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा वोट करें. वायरल मैसेज में आगे लिखा हुआ है:

‘’इस मैसेज को अपने कॉन्टेक्ट में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक भेजें. 90 करोड़ हिंदुओं शर्म करो. बाबरी मस्जीद और राम मंदिर की वोटिंग शुरू हो चुकी है. सुप्रीम कोर्ट ने ये अधिकार जनता को दिया है. अब तक बाबरी मस्जीद के पक्ष में ज्यादा वोट पड़े हैं. हिंदुओ से अपील है कि राम मंदिर बनवाने के लिए इस लिंक पर जाकर https://goo.gl/GdA4kkI just voted. ज्यादा से ज्यादा वोट करें.’’

मैसेज के जरिए दावा किया जा रहा है कि यह वोटिंग कानूनी प्रक्रिया के तहत सुप्रीम कोर्ट करवा रहा है, लेकिन हमारी पड़ताल में यह लिंक फेक निकला.

SMHoaxslayer ने पड़ताल में पाया कि यह वोटिंग पोल पूरी तरह से फेक है और संप्रदायिकता फैलाने के इरादे से ऐसा किया जा रहा है. एक विज्ञापन को आधार बनाकर इस फेक वोटिंग लिंक को तैयार किया गया है.

इसी विज्ञापन के तर्ज पर फेक वोटिंग लिंक को तैयार किया गया है
इसी विज्ञापन के तर्ज पर फेक वोटिंग लिंक को तैयार किया गया है
(फोटो: Screenshot from SMhoaxslayer)

SMHoaxslayer ने अपनी पड़ताल में पाया कि इस विज्ञापन की वेबसाइट पर लिखा हुआ है कि इस लिंक का संबंध किसी राजनीतिक पार्टी या सरकारी संस्थान से नहीं है.

लोगों को सलाह है कि ऐसे लिंक से दूर रहें. यह लिंक पूरी तरह फेक है.

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