सऊदी अरब में साल 2017 में हुए ये बड़े बदलाव जो आप सोच भी नहीं सकते
सऊदी अरब में महिलाओं के लिए साल 2017 खुशखबरी वाला रहा है
सऊदी अरब में महिलाओं के लिए साल 2017 खुशखबरी वाला रहा है(फोटो: ट्विटर\@KellyAnneKFOX14)

सऊदी अरब में साल 2017 में हुए ये बड़े बदलाव जो आप सोच भी नहीं सकते

सऊदी अरब में शुक्रवार को हर तरफ एक खास तरह की उमंग देखी गई. इस्लाम की जन्मभूमि और इसके सर्वाधिक पवित्र स्थलों (मक्का-मदीना) वाले इस देश की पहचान अभी तक एक रूढ़िवादी राजशाही के रूप में रही है. लेकिन, इसी देश में हो रहे बदलावों के बीच शुक्रवार को खेल के स्टेडियमों में महिलाओं का स्वागत किया गया.

महिलाओं ने पहली बार स्टेडियम में ली एंट्री

सऊदी अरब की महिलाओं को शुक्रवार को पहली बार स्टेडियम में प्रोफेशनल फुटबॉल मैच देखने की अनुमति मिली है जो इस बात का इशारा कर रही है कि सऊदी अरब की महिलाएं 2018 में वो चीजें करती नजर आएंगी जो उनके लिए कभी ख्वाब भर था.

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(फोटो: ट्विटर\@FTdotnews)
फुटबॉल मैच देखने आईं सऊदी अरब की महिलाएं 

सऊदी अरब की महिलाओं को अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, शायद उन्हें चुनिंदा खेल खेलने की इजाजत मिले और वाहन चलाती तो वे नजर आएंगी हीं. ये प्रयास 21वीं सदी में सऊदी अरब को वैश्विक नेतृत्व के रूप में उभारने के लिए शहजादा मोहम्मद बिन सलमान के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों की श्रृंखला का हिस्सा हैं जिसकी एक कड़ी लैंगिक समानता से जाकर जुड़ती है.

2017 महिलाओं के लिए क्रांतिकारी रहा

सऊदी अरब में महिलाएं कर सकेंगी ड्राइविंग
सऊदी अरब में महिलाएं कर सकेंगी ड्राइविंग
(फोटो: ट्विटर\@KellyAnneKFOX14)

सऊदी अरब के लिए साल 2017 परिवर्तनकारी रहा जहां लैंगिक समानता में सुधार, आर्थिक विविधता को बढ़ावा, भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने और देश में आने वालों के लिए अधिक खुला और आकर्षक बनाने के लिए कई तरह की पहल शुरू की गईं.

कौन है इसके पीछे?

इसके पीछे दुनिया के सबसे कम उम्र के रक्षा मंत्री प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान हैं जिन्होंने 32 साल की उम्र में पिछले जून में क्राउन प्रिंस का पदभार संभाला था. इनकी ये पहल 'नेशनल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम 2020' और 'विजन 2030' का हिस्सा हैं जिसकी रूपरेखा उन्होंने पिछले साल खींची थी.

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान
(फोटोः Reuters)
  • सऊदी अरब के इस विजन पर दुनिया का ध्यान तब अधिक गया जब वहां लिंग समानता की पहल की गई. सऊदी अरब के इतिहास में पहली बार स्कूलों में लड़कियों को खेल में हिस्सा लेने और शारीरिक शिक्षा हासिल करने की अनुमति मिलेगी.
  • सऊदी अरब की महिलाओं को देश के कुछ स्टेडियम में प्रवेश करने की इजाजत दी गई है जिसे सऊदी अरब में पहले केवल पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था.
  • पिछले सितंबर में जारी एक शाही आदेश के तहत जून 2018 से महिलाओं को देश में वाहन चलाने का अधिकार होगा.
  • सामाजिक परिवर्तनों की इसी दिशा में जल्द ही पवित्र शहर मदीना की नगरपालिका को महिलाएं संचालित करती नजर आएंगी.

देश की इस पहल का दुनिया ने खुले दिल से स्वागत किया और 2017 में सऊदी अरब, संयुक्त राष्ट्र महिला अधिकार आयोग में चार साल के लिए चुना गया.

मार्च 2018 में खुलेगा पहला सिनेमाघर
मार्च 2018 में खुलेगा पहला सिनेमाघर
(फोटोः Reuters)

सामाजिक ही नहीं आर्थिक कारण भी

सामाजिक परिवर्तन के अलावा सऊदी अरब के उदारवादी रवैया अपनाने के पीछे ठोस आर्थिक कारण भी है और वो ये है कि कार्यस्थल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी अर्थव्यवस्था में तेजी लाएगी और भ्रष्टाचार का मुकाबला करेगी. 'नेशनल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम 2020' का मकसद महिलाओं और युवाओं के लिए खेल और मनोरंजन के माध्यम से रोजगार के अधिक अवसर प्रदान कर अर्थव्यवस्था को बढ़ाना है.

देश को मनोरंजन के स्थान के रूप में और अधिक उदार बनाने के लिए म्यूजिक कन्सर्ट और पिछले साल आयोजित कॉमिक-कॉन इवेंट की अनुमति अर्थव्यवस्था और समाज के सुधार करने के प्रयासों का हिस्सा है जिसे प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इस्लाम के 'नरम' चेहरे के तौर पर पेश करना चाहा.

भ्रष्टाचार विरोधी कार्यक्रम पर पूरी दुनिया की नजर

सऊदी अरब में चल रहे राष्ट्रव्यापी भ्रष्टाचार-रोधी कार्यक्रम के तहत पिछले साल नवंबर में 4र मंत्रियों, बड़े उद्यमियों और 11 शहजादों को गिरफ्तार किया गया जिसमें पूर्व शाह अब्दुल्ला के बेटे और अरबपति अल वलीद बिन तलाल भी शामिल थे.

इससे न केवल क्राउन प्रिंस और अधिक मजबूत होकर उभरे बल्कि स्पष्ट रूप से एक संदेश गया कि कानून से शाही परिवार को कोई छूट नहीं है. अब तक ये इस देश में कल्पना से परे था जहां इब्न सऊद के वंशज खुद को ही कानूनी संस्था के रूप में पेश करते रहे हैं.

प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, शाह सलमान के चुने गए उत्तराधिकारी हैं और साथ ही आर्थिक मामलों और विकास परिषद के प्रमुख भी हैं.

जून 2017 में क्राउन प्रिंस के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद मोहम्मद बिन सलमान ने कट्टरपंथ और आतंकवाद के खिलाफ अपना इरादा जाहिर किया और आतंकवाद के कथित समर्थन पर कतर को बहिष्कृत करने के फैसले का नेतृत्व किया. अक्टूबर में उन्होंने संदेश दिया कि 'नरम इस्लाम' की ओर वापसी देश के आधुनिकीकरण की उनकी योजनाओं पर फोकस है.

आतंक के खिलाफ लड़ाई का ऐलान

मिस्र में हुए आतंकवादी हमले के बाद मोहम्मद बिन सलमान ने आतंकवाद के खिलाफ युद्ध की घोषणा की. इस हमले में तीन सौ लोग मारे गए थे. 41 सदस्यीय आतंक रोधी इस्लामी सैन्य गठबंधन की रियाद में नवंबर में हुई उद्घाटन बैठक में शहजादे ने कहा, "हम ऐसे तत्वों को इस्लाम की छवि बिगाड़ने की इजाजत नहीं दे सकते."

ये सारी परियोजनाएं प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के राजशाही के चेहरे को मूलभूत रूप से बदल देने के इरादे को पेश कर रही हैं.

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