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KKR Vs DC: एक ओवर में 6 चौके लगाने से शॉ सचिन नहीं बनेंगे!

शॉ को एक बार फिर से पाटिल के ही करियर से सबक लेने की जरूरत है.

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KKR Vs DC: एक ओवर में 6 चौके लगाने से शॉ सचिन नहीं बनेंगे!

शानदार उपलब्धि है एक ओवर में 6 चौके लगाना, लेकिन असाधारण कतई नहीं. और आईपीएल में तो और भी नहीं. ये तो अंजिक्या रहाणे भी कर चुके हैं. हां, सही सुना आपने, रहाणे ने भी. 18 गेंदों पर आईपीएल 2021 का सबसे तेज अर्धशतक लगाने के बावजूद अगर पृथ्वी शॉ का नाम आईपीएल के टॉप 10 सबसे तेज बल्लेबाजों में शुमार नहीं हो पाता है, तो आप समझ लें कि ऐसे रिकॉर्ड का कोई बहुत ज्यादा मोल नहीं.

इससे बेहतरीन कमाल तो टेस्ट मैचों में एक ओवर में 6 चौके लगाने का होता है जिसे शॉ के शहर मुंबई से आने वाले संदीप पाटिल ने किसी ऐसे वैसे नहीं बल्कि दुनिया के धुरंधर गेंदबाजों में से एक बॉव विलिस के एक ओवर में 6 चौके लगाये थे. बावजूद इसके पाटिल वो महानता का दर्जा भारतीय क्रिकेट में हासिल नहीं कर सके जिसकी हकदार शायद उनकी प्रतिभा थी.

शॉ को एक बार फिर से पाटिल के ही करियर से सबक लेने की जरूरत है. प्रतिभा और हैरतअंगेज शॉट्स होना एक अलग बात है, और खेल में अनुशासन और निरंतरता से महानता की राह पर धीरे-धीरे चलना अलग. शायद इसलिए सचिन तेंदुलकर बनना नामुमिकन है. पाटिल अगर अस्सी के दौर में ग्लैमर और मैदान के बाहर कई और बातों के चलते भटके तो शॉ अपने करियर के शुरुआत में ही विवादों के घेरे में आये.

2018 में ऑस्ट्रेलिया में उनके रवैये से विराट कोहली और रवि शास्त्री इतने नाराज हुए कि उन्हें जब मुंबई भेजा गया तो खास तौर पर सचिन तेंदुलकर को ये कहा गया कि वो शॉ के साथ कीमती समय बितायें और उन्हें बताए कि अभी उनके करियर की शुरुआत ही हुई है. तेंदुलकर ने शॉ को बताया कि बच्चे अभी बहुत आगे जाना है, अनुशासन और मेहनत ही तुम्हें वहां ले जाएगा. तेंदुलकर ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वो भी लंबे समय से शॉ के बारे में सुनते आ रहे थे कि कैसे स्कूली क्रिकेट में ये बच्चा उन्हीं की शैली में बडी-बडी पारियां खेल रहा है.

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शॉ ने अपने छोटे से ही सफर में कई उतार चढ़ाव देखें हैं. अगर कभी मौका मिले तो NETFLIX पर या फिर यूट्यूब में जाकर https://www.youtube.com/watch?v=I3FrbEheZ8Q 2011 क्रिकेट वर्ल्ड पर इस शानदार वीडियो डॉक्यूमेंट्री को देखियेगा तो आपको 10 साल के एक बच्चे की कहानी देखने को मिलेगी. बेहद मासूम लेकिन उतना ही मेहनती. पिता ने जिस कष्ट से उन्हें पाला और फिर कोच की भूमिका निभायी उसकी मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है और इसलिए शुरुआती कामयाबी के बाद शॉ का भटकाव बहुत लोगों को विचलित करने वाला लगा.

बहरहाल, भारतीय क्रिकेट के लिए तसल्ली की बात है कि शॉ उस दौर से वापस आ चुके हैं. उनमें अब वही भूख दिखाई दे रही है जो एक दशक पहले उस मासूम युवा बच्चे में दिखती थी जो हर कीमत पर भारत के लिए खेलना चाहता था.

ऑस्ट्रेलिया दौरे की नाकामी को भूलाकर पृथ्वी शॉ ने आईपीएल से ठीक पहले विजय हजारे ट्रॉफी में गजब कर दिया. अब उसी फॉर्म को वो आईपीएल में दोहरा रहे हैं. आलम ये है कि अपने सीनियर और साथी ओपनर शिखर धवन के साथ मिलकर उन्होंने जितने रन बनाये हैं वो दिल्ली के बाकि सारे बल्लेबाजों ने मिलकर बनायें हैं.
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लेकिन, शॉ भी जानते हैं कि ना सिर्फ एक ओवर में 6 चौके लगाने से कुछ होगा और ना ही 500 रन आईपीएल में बनाने से अगर उन्हें टी20 वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया में जगह नहीं मिलती है. और उनके साथ इस रेस में सबसे पहले और सबसे तगड़ा मुकाबला धवन ही हैं. अगर शॉ इस बार खुद को भटकने से रोक लेने में कामयाब होते हैं तो शायद इस वर्ल्ड कप में ना सही लेकिन भारतीय क्रिकेट में एक कामयाब किस्सा होने के लिए उन्हें कोई नहीं रोक पाये.

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