ऑस्ट्रेलिया में कंटेंट के लिए पैसा देने को गूगल तैयार, FB अड़ा

ऑस्ट्रेलिया के नए प्रस्तावित कानूनों के सामने झुका गूगल? फेसबुक क्या करेगा?

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ऑस्ट्रेलिया के नए प्रस्तावित कानूनों के सामने झुका गूगल? फेसबुक क्या करेगा?
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करीब एक महीना पहले गूगल ने कहा था कि उसे ऑस्ट्रेलिया के नए कंटेंट कानूनों की वजह से देश में अपना सर्च इंजन बंद करना पड़ सकता है. अब 17 फरवरी को गूगल ने ऑस्ट्रेलिया के बड़े न्यूज पब्लिशर्स के साथ तीन साल का एग्रीमेंट किया है, जिसमें वो न्यूज पब्लिशर्स को उनके कंटेंट के लिए पैसा देगा. एक तरह से इसे गूगल का ऑस्ट्रेलिया के नए कानूनों के सामने झुकने के तौर पर देखा जाएगा. प्रस्तावित नए कानूनों की बदौलत एक छोटे देश ने टेक जायंट को कंटेंट इस्तेमाल के लिए पैसा चुकाने पर मजबूर कर दिया.

हालांकि, एक दूसरे टेक जायंट फेसबुक ने एकदम उलट कदम उठाया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने कहा है कि वो ऑस्ट्रेलियाई पब्लिशर्स और यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर न्यूज स्टोरीज शेयर करने से रोकेगा.  

सर्च इंजन और सोशल मीडिया मार्केट में गूगल और फेसबुक की लगभग मॉनोपली चलती है. ऑस्ट्रेलिया और इन टेक कंपनियों के बीच तलवारें क्यों खिंची? गूगल ने क्या डील की है? हर सवाल का जवाब एक-एक करके समझते हैं.

गूगल और न्यूज पब्लिशर्स की डील क्यों हुई?

ऑस्ट्रेलियाई सरकार एक प्रस्तावित कानून को पास करने पर विचार कर रही है. इसका नाम न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड है. ये कानून गूगल और फेसबुक को न्यूज पब्लिशर्स का कंटेंट इस्तेमाल करने पर उन्हें पैसा देने पर मजबूर कर देगा.

पिछले हफ्ते एक सीनेट कमेटी ने सुझाव दिया कि इस प्रस्तावित कानून को संसद से पास किया जाए और कानून बनाया जाए.

अगर ये कानून बन जाता है तो गूगल और फेसबुक को ऑस्ट्रेलियाई पब्लिशर्स के साथ लाइसेंसिंग एग्रीमेंट करने के लिए 90 दिन दिए जाएंगे. ये एग्रीमेंट पब्लिशर्स के उस कंटेंट के लिए होगा जो गूगल सर्च रिजल्ट्स और फेसबुक की फीड में दिखता है.

अगर कोई डील नहीं होती है तो सरकार आर्बिट्रेटर नियुक्त करेगी और वो कंपनियों को बताएगा कि उन्हें कितना पैसा देना है. इस आर्बिट्रेटर का फैसला मानना ही पड़ेगा. मतलब अगर कंपनियां और न्यूज पब्लिशर्स खुद डील नहीं करेंगे तो सरकार दखल देगी. सांसदों ने कहा था कि अगर कंपनियां खुद डील कर लेंगी तो कानून को टाला जा सकता है.

गूगल की डील में क्या है?

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल ने ऑस्ट्रेलिया के दो सबसे बड़े फ्री-टू-एयर टीवी ब्रॉडकास्टर के साथ 47 मिलियन डॉलर सालाना की डील साइन की है. ये दोनों ब्रॉडकास्टर नाइन एंटरटेनमेंट और सेवन वेस्ट मीडिया हो सकते हैं.

इसके अलावा यूथ पर फोकस करने वाली डिजिटल मीडिया कंपनी जंकी मीडिया ने भी गूगल के साथ डील साइन की है.

सबसे महत्वपूर्ण डील गूगल ने न्यूज कॉर्प के साथ की है. न्यूज कॉर्प ऑस्ट्रेलिया में सर्कुलेशन के हिसाब से न्यूजपेपर्स का सबसे बड़ा मालिक है. ये रुपर्ट मर्डोक की कंपनी है. डील 17 फरवरी को हुई है लेकिन इसकी वित्तीय जानकारी सार्वजानिक नहीं की गई है.  

तीन साल की इस डील में न्यूज कॉर्प आउटलेट्स के लिए एक सब्सक्रिप्शन प्लेटफॉर्म बनाने का भी प्रावधान है. इसके अलावा गूगल ऐड से आने वाले रेवेन्यू भी साझा किया जाएगा.

फेसबुक ने क्या कहा?

ऑस्ट्रेलियाई सरकार के कड़े प्रस्तावित कानून को लेकर फेसबुक अड़ गया है. उसने न्यूज पब्लिशर्स को प्लेटफॉर्म पर स्टोरीज शेयर करने से रोक दिया है.

फेसबुक ऑस्ट्रेलिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विलियम ईस्टन ने अपने बयान में कहा, "प्रस्तावित कानून हमारे प्लेटफॉर्म और उन पब्लिशर्स के बीच के संबंधों को गलत तरीके से पेश करता है जो फेसबुक का इस्तेमाल न्यूज कंटेंट शेयर करने के लिए करते हैं."

ईस्टन ने कहा कि प्रस्तावित कानून इस बात पर विचार नहीं करता कि सोशल मीडिया पब्लिशर्स तक पाठकों को पहुंचाता है.

“लोग अपनी न्यूज फीड पर जो कंटेंट देखते हैं, न्यूज कंटेंट उसमें 4 फीसदी से भी कम है लेकिन पिछले साल ऑस्ट्रेलियाई पब्लिशर्स को लगभग 5.1 बिलियन फ्री रेफरल मिले जिनकी कीमत करीब 315 मिलियन डॉलर है.”
विलियम ईस्टन, फेसबुक ऑस्ट्रेलिया के मैनेजिंग डायरेक्टर

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसका नतीजा ये हुआ कि 18 फरवरी को ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स की फेसबुक फीड खाली रही. पीएम स्कॉट मॉरिसन ने कंपनी के इस कदम पर लिखा, "फेसबुक का ऑस्ट्रेलिया को अनफ्रेंड करने का कदम उतना ही घमंड भरा है जितना ये प्लेटफॉर्म निराशाजनक है."

मॉरिसन ने कहा कि फेसबुक ने स्वास्थ्य संबंधी और इमरजेंसी सेवाओं जैसी महत्वपूर्ण जानकारी भी रोक दी है. हालांकि, फेसबुक ने कहा था कि वो सिर्फ पब्लिशर्स और यूजर्स को न्यूज शेयर करने से रोकेगा.

दूसरे देश भी टेक कंपनियों के खिलाफ खड़े होंगे?

गूगल का ऑस्ट्रेलियाई पब्लिशर्स के साथ डील करना दुनियाभर के देशों के लिए उदाहरण बन सकता है. CNET की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपियन संसद के एक सदस्य ने पिछले हफ्ते कहा था कि आगे आने वाले कानून में ऑस्ट्रेलियाई कोड जैसे ही प्रावधान जोड़ने की उम्मीद है.

एक कैनेडियन मंत्री ने भी ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देकर गूगल और फेसबुक पर पब्लिशर्स को पैसे चुकाने को लेकर जोर डालने की वकालत की है.

यूरोपियन संसद ने 2019 में एक कॉपीराइट डायरेक्टिव को मंजूरी दी थी, जिसमें एक प्रावधान था जिसका इस्तेमाल सदस्य देश एक फ्रेमवर्क के तौर पर कर सकते थे. इससे वो टेक प्लेटफॉर्म्स को पब्लिशर्स को पैसा देने के लिए मजबूर कर सकते थे.  

फ्रांस इस प्रावधान का इस्तेमाल करने वाला पहला सदस्य देश था. फ्रांस में कानून पास किया गया और पिछले महीने गूगल फ्रेंच पब्लिशर्स को पैसा देने को राजी हुआ है.

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