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Space से आ रहीं कुछ अजीब 'आवाज', समझने में जुटे अंतरिक्ष वैज्ञानिक क्या है राज?

FRB: Astronomers ने अंतरिक्ष से आने वाले अपने तरह के दूसरे रहस्मयी रेडियो सिग्नल का पता लगाया है.

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Space से आ रहीं कुछ अजीब 'आवाज', समझने में जुटे अंतरिक्ष वैज्ञानिक क्या है राज?
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हाल ही में खगोलविदों (Astronomers) ने अंतरिक्ष (Space) से आने वाले एक रहस्मयी रेडियो सिग्नल (radio signal) से जुड़ी नई जानकारी को साझा किया है. ऐसा रहस्यमयी सिग्नल अपनी तरह का दूसरा सिग्नल है. खगोलविदों के मुताबिक ऐसा अनुमान जताया गया है कि यह सिग्नल एक आकाशगंगा (गैलेक्सी) से आ रहा है जोकि पृथ्वी से लगभग 3 बिलियन (3 अरब) प्रकाश वर्ष दूर है. इन रेडियो सिग्नल को फास्ट रेडियो बर्स्ट (FRB) के नाम से जाना जाता है. शीर्ष खगोलविद और वैज्ञानिक इस तरह के सिग्नल को सुनने लिए हमेशा चौकन्ना रहते हैं.

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फास्ट रेडियो बर्स्ट (FRB) क्या है?

स्पेस यानी अंतरिक्ष में रेडियो तरंगों के मिलीसेकेंड लंबे बर्स्ट को फास्ट रेडियो बर्स्ट या FRB कहा जाता है. सरल शब्दों में कहा जाए तो FRB रेडियो तरंगों के चमकदार विस्फोट होते हैं जिनकी अवधि मिलीसेकंड की होती है, जिसके कारण उनका पता लगाना और आकाश में उनकी स्थिति का निर्धारित करना मुश्किल होता है. आमतौर पर अकेले रेडियो बर्स्ट सिर्फ एक बार निकलते हैं और ये रिपीट नहीं होते हैं. लेकिन ये कई बार रिपीट रेडियो वेव्स भेजने के लिए भी जाने जाते हैं. बार-बार निकलने वाले फास्ट रेडियो बर्स्ट से लगातार छोटी और एनर्जेटिक रेडियो तरंगें बाहर निकलती रहती हैं. हालांकि वैज्ञानिक अभी भी इस घटना (FRB) को पूरी तरह से नहीं समझ पाए हैं.

रेडियो खगोल विज्ञान में फास्ट रेडियो बर्स्ट या FRB एक क्षणिक रेडियो पल्स है, जिसकी लंबाई एक मिलीसेकंड के एक अंश से लेकर कुछ मिलीसेकंड तक होती है, जो कुछ रहस्यमयी उच्च-ऊर्जा खगोलीय प्रक्रिया के कारण होती है, जिसे अभी तक खोजा नहीं गया है.

खगोलविदों का अनुमान है कि एक एफआरबी औसतन एक मिलीसेकंड (एक सेकंड का एक हजारवां हिस्सा) में उतनी ही ऊर्जा छोड़ता है, जितनी कि सूर्य कई दिनों में छोड़ता है. चूंकि ये क्षणिक रेडियो पल्स पलक झपकते ही बहुत कम समय में गायब हो जाते है, इसलिए इन्हें ट्रैक करना और उनका निरीक्षण करना मुश्किल होता है.

पहली बार एफआरबी (FRB) को कब खोजा गया था?

वर्ष 2007 में पहले फास्ट रेडियो बर्स्ट को खोजा गया था और तभी से वैज्ञानिक इसके मूल स्रोत को खोजने की दिशा में काम कर रहे हैं.

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक एस्ट्रोनॉमर अपनी घरेलू आकाशगंगाओं में कुछ रेडियो बर्स्ट का पता लगाने में सक्षम हैं लेकिन उन्हें अभी तक इनके पीछे के वास्तविक कारण का पता नहीं चल पाया है.

FRB की खोज किसने की थी?

स्पेस डॉट कॉम के अनुसार एफआरबी की खोज का श्रेय डेविड नारकेविक (ग्रेजुएट स्टूडेंट) और उनके सुपरवाइजर डंकन लोरिमर को दिया जाता है.

अब तक कितने FRB की खोज हो चुकी है?

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2007 में पहले एफआरबी की खोज हुई थी उसके बाद से जून 2021 तक 140 और एफआरबी ढूंढे जा चुके हैं.

अभी चर्चा में क्यों है?

साइंटिफिक जर्नल नेचर (Nature) में प्रकाशित शोधकर्ताओं के नए रिसर्च पेपर में बताया गया है कि नए FRB को 20190520B के नाम से जाना जाता है. रिसर्च पेपर के अनुसार खगोलविदों ने पृथ्वी से लगभग 3 अरब प्रकाश वर्ष दूर एक अन्य गैलेक्सी से आने वाले एक अजीब या रहस्यमयी रेडियो सिग्नल का पता लगाया है. यह दूसरा मौका है जब वैज्ञानिकों ने इस तरह के दोहराए जाने वाले संकेत का पता लगाया है.

खगोलविदों ने चीन में एक विशाल दूरबीन का उपयोग करते हुए यह दिलचस्प खोज की है. पेपर में बताया गया है कि FRB 20190520B का स्रोत "एक कॉम्पैक्ट, लगातार रेडियो स्रोत के साथ सह-स्थित है और उच्च विशिष्ट-स्टार-गठन की बौनी मेजबान आकाशगंगा से जुड़ा हुआ है." ऐसा अनुमान लगाया गया है कि सिग्नल किसी अन्य अज्ञात वस्तु के नजदीक है, जो कमजोर रेडियो सिग्नल उत्सर्जित कर रहा है. इस तरह का संयोजन इससे पहले केवल एक अन्य FRB में देखा गया है.

FRB 20190520B का पता कब और कहां से चला था? वैज्ञानिकों ने कैसे दिन-रात एक करके आंकड़े जुटाए?

नेशनल रेडियो एस्ट्रोनॉमी ऑब्जर्वेटरी (NRAO) द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार मई 2019 में FRB 190520B को चीन में फाइव-हंड्रेड-मीटर एपर्चर स्फेरिकल रेडियो टेलीस्कोप (FAST) द्वारा खोजा गया था. वहीं रिसर्च पेपर में बताया गया है कि वैज्ञनिकों ने लगातार पर इस नजर बनाए रखी और हर महीने ऑब्जर्वेशन के आधार पर इसका फॉलो-अप किया. वैज्ञानिकों ने अप्रैल 2020 से सितंबर 2020 के दौरान जो ऑब्जर्वेशन किया उसके अनुसार यह पता चला कि इसमें 75 बर्स्ट्स (फटने की घटना) हुए. FAST के द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक अन्य एफआरबी के उलट यह ऑब्जेक्ट लगातार बर्स्ट करते हुए कमजोर रेडियो तरंगों का उत्सर्जन करता है.

रिसर्चर्स ने अमेरिका के न्यू मैक्सिको में स्थित एक रेडियो खगोल विज्ञान वेधशाला (रेडियो एस्ट्रोनॉमी ऑब्जर्वेटरी) वेरी लार्ज एरे (VLA) का उपयोग करके FRB 20190520B की स्थिति का निर्धारण (लोकलाइज्ड) किया गया है. यह ऑब्जर्वेटरी अमेरिका के नेशनल साइंस फाउंडेशन के अंतर्गत आती है.

नेशनल साइंस फाउंडेशन को दिए गए बयान में इस स्टडी के सह-लेखकों में से एक कैल्टेक के केसी लॉ का कहना है कि "इस तरह (20190520B) की विशेषताएं एक अन्य एफआरबी से मिलती-जुलती हैं. जिसकी स्थिति का निर्धारण 2016 में वेरी लार्ज एरे (VLA) द्वारा किया गया था."
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इससे पहले किस FRB में दिखी थी ऐसी विशेषता?

इससे पहले इस तरह का ऑब्जेक्ट 2016 में खोजा गया था, जिसे FRB 121102 के नाम से जाना जाता है. शोधकर्ताओं के अनुसार इस ऑब्जेक्ट के गुण (प्रॉपर्टीज) FRB 20190520B से मिलते-जुलते हैं.

सीएनएन को दिए गए बयान में केसी लॉ ने कहा है कि "अब हमारे पास ऐसे दो बर्स्ट हैं, और ये दोनों कुछ बहुत जरूरी सवाल भी अपने साथ खड़े करते हैं. अब हमें वाकई में इस दोहरे रहस्य को एक्सप्लेन करने की जरूरत है. इसके साथ ही यह पता लगाना है कि FRB और लगातार रेडियो स्रोत कभी-कभी एक साथ क्यों पाए जाते हैं." गौरतलब है कि पहले का FRB भी लगातार रेडियो स्रोत के करीब रहा है.

आगे कौन से सवाल हैं, इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

शोधकर्ताओं ने जो थ्योरी दी है उसके अनुसार FRB 190520 एक "न्यूबॉर्न" की तरह है. इसका मतलब है कि यह (एफआरबी) अभी भी सुपरनोवा विस्फोट द्वारा निकाले गए घने पदार्थ से घिरा हुआ है, जो न्यूट्रॉन तारे को पीछे रह गया है." नई रिसर्च की थ्योरी के अनुसार एक बार जब मटेरियल समाप्त हो जाएगा, तो बर्स्ट होने के संकेत भी कम हो जाएंगे.

खगोलविदों का अनुमान है कि या तो दो अलग-अलग तंत्र हो सकते हैं जो एफआरबी का उत्पादन करते हैं या उन्हें उत्पन्न करने वाली वस्तुएं उनके विकास के विभिन्न चरणों में अलग-अलग कार्य कर सकती हैं. खगोलविदों के अनुसार FRB 190520 की एक विशेषता उनके और पृथ्वी के बीच मटेरियल का अध्ययन करने के लिए FRB की उपयोगिता पर सवाल उठाती है.

खगोलविदों के अनुसार दूर की वस्तुओं द्वारा उत्सर्जित रेडियो तरंगों पर हस्तक्षेप करने वाली सामग्री (मटेरियल) के प्रभाव से खगोलविदों को कमजोर मटेरियल के बारे में जानने में मदद मिलती है. जब रेडियो तरंगें मुक्त इलेक्ट्रॉनों वाले अंतरिक्ष से गुजरती हैं, तो उच्च-आवृत्ति तरंगें निम्न-आवृत्ति तरंगों की तुलना में अधिक तेज़ी से यात्रा करती हैं.

शोधकर्ताओं के अनुसार भले ही इससे जुड़ी कई बाते सामने आ चुकी हैं लेकिन अभी भी कुछ सवालों के जवाब देने की जरूरत है. इस शोध में जुटे एक अन्य सह-लेखक वेस्ट वर्जीनिया विश्वविद्यालय की सारा बर्क-स्पोलार ने अपने एक बयान में कहा है कि “एफआरबी क्षेत्र अभी बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है और हर महीने नई खोजें सामने आ रही हैं. हालांकि, बड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं और यह ऑब्जेक्ट (खोजी गईं एफआरबी) हमें उन सवालों के बारे में चुनौतीपूर्ण सुराग दे रही हैं." नेचर में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार नई खोज ने नए सवालों को जन्म दिया है क्योंकि अब खगोलविदों का मानना है कि दो तरह के एफआरबी हो सकते हैं.

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