भीमा कोरेगांव केस: 81 साल के वरवर राव को 29 महीने बाद मिली जमानत

वरवर राव को मेडिकल आधार पर छह महीने के लिए जमानत मिली

Published

वीडियो एडिटर: पूर्णेन्दु प्रीतम/विवेक गुप्ता

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 81 साल के कवि, विचारक, भीमा कोरेगांव केस के आरोपी वरवर राव को मेडिकल आधार पर छह महीने के लिए जमानत दी.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा-

“इतनी उम्र और तलोजा जेल में अपर्याप्त सुविधाओं को देखते हुए, ये राहत देने के लिए एक वास्तविक और फिट मामला था, और अगर मेडिकल आधार पर राव को जमानत नहीं मिलती है तो ये मानवाधिकार के सिद्धांत की रक्षा करने के उसके कर्तव्य एवं नागरिकों के जीवन एवं स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार से विमुख होने जैसे होगा.”

राव की जमानत के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट की शर्तें

  • मुंबई में रहें और स्पेशल NIA कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को न छोड़ें
  • जब भी तलब किया जाए NIA कोर्ट के लिए उपलब्ध रहें
  • किसी भी सबूत के साथ छेड़छाड़ न करें या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश न करें
  • अदालत के पास अपना पासपोर्ट जमा करें
  • मामले के बारे में मीडिया से बात नहीं करें

राव के अधिवक्ताओं ने उनकी न्यूरोलॉजिकल कंडिशन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए जमानत पर रिहा किए जाने को कहा था. अधिवक्ताओं ने तालोजा जेल अस्पताल में अपर्याप्त सुविधाएं और सुविधाओं की कमी के कारण 'क्रूर और अमानवीय व्यवहार' का सामना करने का भी ज़िक्र किया.

लेकिन एनआईए ने अपने तर्क में कहा कि उनके खिलाफ गंभीर मामला है और UAPA के तहत जिस पर आरोप लगा है उसे जमानत नहीं दी जा सकती है. अगर उनकी हालत खराब होती है तो सरकारी जेजे हॉस्पिटल में उनके इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं थीं.

सुप्रीम कोर्ट में अपील किए जाने तक बॉम्बे हाईकोर्ट को अपना फैसला तीन हफ्ते तक सुरक्षित रखने के NIA के अनुरोध को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया.

छह महीने की अवधि के आखिर में राव या तो आत्मसमर्पण कर सकते हैं या मेडिकल बेल को बढ़ाए जाने की गुजारिश कर सकते हैं

भीमा कोरेगांव केस की टाइमलाइन

28 अगस्त 2018

भीमा कोरेगांव केस में वरवर राव गिरफ्तार हुए. उनकी गिरफ्तारी के बाद से कोविड रिस्क से जुड़ी बेल एप्लिकेशन समेत तमाम जमानत अर्जी खारिज हुई.

21 फरवरी 2019

NIA ने राव और अन्य आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की.

18 नवंबर 2020

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नानावती अस्पताल में विशेषज्ञों के देखभाल में इलाज और वरवर के स्वास्थ्य के आकलन के लिए उनके ट्रांसफर का आदेश दिया.

8 फरवरी 2021

एक अन्य आरोपी रोना विल्सन के वकील ने NIA के स्पेशल कोर्ट में आर्सेनल कंसल्टिंग रिपोर्ट जमा की. रिपोर्ट में दावा है कि गिरफ्तारी के दो साल पहले से ही विल्सन के लैपटॉप के साथ मालवेयर के जरिए छेड़छाड़ की गई. ऐसा करने के लिए उपयोग किया गया मालवेयर कथित तौर पर वरवर राव की
ईमेल आईडी की तरह दिख रहा था. इन हमलों के परिणामस्वरूप इसमें 'विभिन्‍न डॉक्यूमेंट' डाले गए थे. अन्य सह अभियुक्तों के कंप्यूटरों से भी छेड़छाड़ की गई थी.

इस तरह के अटैक के शिकार सिर्फ विल्सन ही नहीं थे. अटैकर ने इसी तरह के सर्वर्स और आईपी एड्रेस को दूसरे आरोपियों तक पहुंचाया था और ये सब 4 साल तक होता रहा. विल्सन के लैपटॉप पर करीब 22 महीनों तक सेंधमारी होती रही. भारत के दूसरे हाईप्रोफाइल मामलों में भी आरोपियों को इसी तरह से टारगेट किया गया.
आर्सेनल कंसल्टिंग रिपोर्ट

10 फरवरी 2021

विल्सन के वकील ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर SIT से स्वतंत्र जांच, UAPA के तहत लगाए गए सेक्शन को रद्द करने, मुआवजा और सभी आरोपियों की तुरंत रिहाई की मांग की . मामले को सूचीबद्ध किया जाना बाकी है.

22 फरवरी 2021

वरवर राव को जमानत मिली.

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