नागरिकता संशोधन बिल:2 नेशन थ्योरी पर अमित शाह का दावा कितना सच्चा?

नागरिकता संशोधन बिल:2 नेशन थ्योरी पर अमित शाह का दावा कितना सच्चा?

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वीडियो एडिटर: पूर्नेंदु प्रीतम

"At the stroke of the midnight hour, when the world sleeps, India will awake to life and freedom."

14 अगस्त 1947 की शाम जब पंडित जवाहर लाल नेहरू ने Indian Constituent Assembly में ये कहा था तब देश आजादी की खुशी मनाने की तैयारी कर रहा था. लेकिन ठीक 72 साल बाद 'इंडिया इज गोइंग टू अवेक विद लेस फ्रीडम' की आवाज गूंज रही है. देश के मुसलमानों में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर सवाल, टेंशन और भविष्य की फिक्र सता रही है.

सिटिजन अमेंडमेंट बिल लोकसभा से पास हो गया है. लोकसभा में बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में नागरिकता संशोधन बिल पर कहा,

‘यह बिल पेश करने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन स्वीकार कर लिया था.’

लेकिन सवाल है कि क्या सच में टू नेशन थ्योरी कांग्रेस की देन है? या फिर गृह मंत्री का सच, सच नहीं है. सवाल है कि क्या हालिया नागरिक संशोधन बिल इस देश की जड़ कमजोर कर रहा है? क्या नेशनल रेजिस्टर सिटिजंस मतलब NRC में छूट गए हिंदुओं को नागरिक संशोधन बिल के जरिए सहारा दिया जा रहा है. और अगर ऐसा है तो फिर मुसलमानों का क्या? अब अगर इस सेक्युलर भारत में हिंदू और मुसलमान के नाम पर अलग-अलग फैसले होंगे तो हम तो पूछेंगे ही जनाब ऐसे कैसे?

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लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान से भले ही देश के करोड़ो लोगों को तकलीफ हुई हो लेकिन पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना की आत्मा बहुत खुश हो रही होगी. साथ-साथ टू-नेशन के पैरोकार और बीजेपी के आदर्श विनायक दामोदर सावरकर की आत्मा को भी शांति मिली होगी. चलो कोई तो सालों बाद भी हमारी बातों को आगे बढ़ा रहा है.

मुहम्मद अली जिन्नाह की मुस्लिम लीग ने 1940 में भारत के मुसलमानों के लिए पाकिस्तान की शक्ल में अलग देश की मांग का प्रस्ताव पारित किया था. हालांकि सावरकर ने तो करीब 17 साल पहले 1923 में ही अपनी किताब ‘हिंदुत्व’ में भारत के हिंदू राष्ट्र होने की बात कही थी.

सावरकर ने नजरबंदी के दौरान अपनी किताब ‘हिंदुत्व’ लिखी थी, जब वो कुछ शर्तों के साथ अंडमान से लाकर रत्नागिरी जेल में रखे गए थे. सावरकर ने अपनी किताब में लिखा था ‘हिंदुत्व के लक्षण हैं- एक राष्ट्र, एक जाति तथा एक संस्कृति.’

यही नहीं आज से करीब 88 साल पहले 1937 में सावरकर ने अहमदाबाद में हिंदू महासभा के 19वें अधिवेशन में घोषणा की थी कि हिंदू और मुसलमान दो पृथक मतलब अलग राष्ट्र हैं.

दो नेशन थ्योरी पर क्या हैं इतिहासकार की राय

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने भी ट्वीट कर इतिहास के पन्नों से पर्दा उठाया है, उन्होंने कहा कि सावरकर ने 1943 में दो नेशन थ्योरी पर जिन्ना को समर्थन किया था. सावरकर ने कहा था,

“मुझे जिन्ना के दो राष्ट्र के सिद्धांत से कोई झगड़ा नहीं है. हम हिंदू खुद एक राष्ट्र हैं और ये ऐतिहासिक सच है कि हिंदू और मुसलमान दो राष्ट्र हैं.”

जाने-माने इतिहासकार श्रीनाथ राघवन ने भी अमित शाह के दावों का खंडन किया. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'कांग्रेस ने देश के बंटवारे को स्वीकार किया, न कि टू-नेशन थ्योरी को.' श्रीनाथ राघवन, लेखक और कारनेज इंडिया में सीनियर फेलो हैं.

स्वतंत्रता सेनानी और देश में गैर-कांग्रेसवाद की आवाज उठाने वाले समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया भी राइट विंग के टू-नेशन थ्योरी से साफ-साफ देश को आगाह कर चुके थे. अपनी किताब 'द गिल्टी मेन ऑफ इंडियाज पार्टिशन' में राम मनोहर लोहिया ने हिंदू राइट विंग के विभाजन में योगदान को समझाया है. उन्होंने लिखा है,

‘बंटवारे के लिए कट्टर हिंदूवाद के विरोध का कोई मतलब नहीं था, क्योंकि देश को विभाजित करने वाली शक्तियों में से एक यही हिंदू कट्टरता थी. ये वैसा ही है जैसे कोई अपराधी अपराध करने के बाद पीछे हट गया हो.’

राम मनोहर लोहिया ने लिखा है कि मौजूदा जनसंघ और उसके पूर्वजों ने देश के बंटवारे में ब्रिटेन और मुस्लिम लीग की मदद की.

ये तो हुई बात टू-नेशन की. अब सवाल है कि क्या नागरिक संशोधन बिल 2019 इस देश की सेक्यूलर जड़ों को कमजोर कर रहा है?

क्या जो देश सेक्यूलरिजम की नींव पर बना हो उसमें किसी एक धर्म का नेम प्लेट लगेगा तो उस देश की पहचान बदल नहीं जाएगी? रूप बदल नहीं जाएगा?

दूसरे देशों के सताए हुए हिंदू अल्पसंख्यकों से मोहब्बत अच्छी बात है लेकिन वहीं चीन और म्यांमार के सताए हुए अल्पस्ख्यक मुसलमान का क्या गुनाह है? ये दोहरा नजरिया क्यों? क्यों सेलेक्टिव एपरोच अपना रही है सरकार?

मैंने जो दलीलें दी हैं वो सब गलत भी मान लें और मान भी लें कि कांग्रेस ने विभाजन की गलती की थी तो क्यों वहीं गलती फिर से दोहराई जा रही है? सेक्यूलर भारत को कट्टर पाकिस्तान जैसा बनाने की सोचेंगे तो ये भारत खुद पूछेगा, जनाब ऐसे कैसे?

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