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बच्चों की नजर से देखिए कैसा रहा कोरोना लॉकडाउन का एक साल

बच्चों ने सुनाए लॉकडाउन के किस्से, 1 साल में मस्ती भी और थोड़ा स्ट्रेस भी

Published

वीडियो एडिटर- दीप्ति रामदास

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भारत में वैक्सीनेशन के बीच एक बार फिर कोरोना के मामले बढ़ने शुरू हो चुके हैं. रोजाना करीब 40 हजार नए केस सामने आ रहे हैं. अब तक भी वायरस के संपर्क में आने से बचने के लिए लोग कई तरह की सावधानियां बरत रहे हैं. लेकिन इस बीते एक साल में तमाम लोगों के अलावा बच्चों पर भी लॉकडाउन और इस कोरोना वायरस का असर पड़ा है. स्कूल और दोस्तों से दूरियां बनाने और नई तरह की आदतों को सीखने को लेकर कहीं न कहीं बच्चों की मेंटल हेल्थ पर असर पड़ा है.

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कोरोना को दो चांटे लगा देती

क्विंट ने 16 साल से कम उम्र के कुछ बच्चों के साथ बातचीत की और समझा कि पिछले 1 साल में लॉकडाउन और तमाम ऐसी चीजों को लेकर उन पर क्या असर पड़ा है. बच्चों ने बताया कि इस दौरान उन्हें ऑनलाइन क्लासेस, केबिन फीवर और कोरोना के चलते परिवार के साथ ज्यादा टाइम बिताने का मौका मिला. पांच साल की सौम्या ने हमें बताया,

“मुझे गुस्सा आता है, मन होता है कि मैं बड़ी होती और ये कोरोना को दो चांटे लगाती”

इनमें से कई बच्चों ने कहा कि उन्हें ये सब सोचकर डर लगता है. कुछ बच्चों ने कहा कि उनके दिमाग में कोरोना का सोचते ही कीटाणुओं की पिक्चर आती है. कुछ बच्चों ने कहा कि वो अकेलापन फील कर रहे हैं, वहीं कुछ बच्चे फ्रस्ट्रेटेड फील कर रहे हैं.

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किसी को याद आई टीचर तो किसी ने सीख ली कुकिंग

11 साल के शुभांग ने कहा कि, बहुत घबराहट थी कि क्या हो गया अगर हमें कोरोना हो गया तो... उधर 7 साल के भानू को ये शिकायत है कि उनकी मम्मी ने लॉकडाउन के दौरान उन्हें ग्रीन-ग्रीन कुछ खिलाया. जिससे उन्हें घास जैसी फीलिंग आती थी. किसी ने परिवार के साथ रामायण देखी, तो किसी ने बताया कि वो अपनी टीजर को मिस कर रहे हैं.

बच्चों ने हमारे साथ बातचीत में कहा कि शुरुआत में तो लगा कि ऑनलाइन क्लास काफी अच्छी है. लेकिन फिर पता चला कि इतनी अच्छी पढ़ाई ऑनलाइन में नहीं हो सकती है, इससे डिस्ट्रैक्शन होता है. अब इस खाली वक्त में किसी ने कोरियन सीख ली तो किसी लड़के ने रोटी बनाना सीखा. वहीं पियानो, पेंटिंग, ट्यूशन और जरूरतमंद लोगों को पढ़ाने का काम भी इन बच्चों ने किया.

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