लॉकडाउन के बीच COVID-19 से लड़ने में मदद कर रहे ड्रोन

निगरानी के साथ सार्वजनिक जगहों को सैनिटाइज करने से लेकर दवा डिलीवरी ट्रायल तक  

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वीडियो एडिटर: विशाल गुप्ता और वरुण शर्मा

6 महीने पहले जब बेंगलुरु एक स्टार्ट-अप ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चर रिसर्च के लिए एक ड्रोन का प्रोटोटाइप डेवलप किया था, तो उन्हें उम्मीद नहीं थी कि कोरोनो वायरस के खिलाफ लड़ाई में इसका इस्तेमाल किया जाएगा. लॉकडाउन के बीच शहर की सड़कों पर कीटाणुनाशक स्प्रे करने के लिए अब उनके 6 ड्रोन बेंगलुरु जिला प्रशासन की तरफ से इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

बेंगलुरु देश के उन कई शहरों में से एक है, जहां कोरोनो वायरस के प्रकोप के दौरान अलग-अलग तरह की चुनौतियों से निपटने के लिए ड्रोन तैनात किए गए हैं. सैनिटाइजेशन के अलावा, राज्य प्रशासन भीड़ रोकने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है.

ऐसे ही गुजरात में भी एक ड्रोन कंपनी राज्य सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है और अपने ड्रोन का इस्तेमाल करके सड़कों और बाजारों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर बड़े जमावड़ों पर नजर रख रही है.

ड्रोनलैब के डायरेक्टर निखिल मेठिया बताते हैं कि सार्वजनिक जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग पर निगरानी के लिए उनकी कंपनी ड्रोन में AI तकनीक का भी इस्तेमाल कर रही है. ये ड्रोन रिहाइश बिल्डिंगों की छत पर लोगों के इक्कट्ठा होने की रिपोर्ट भी दे रहे हैं.

2 अप्रैल को अहमदाबाद पुलिस ने ड्रोन से दवाई डिलीवर करने के लिए ट्रायल रन भी किए.

अधिकारियों को अपनी सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराने के लिए 200 से ज्यादा ड्रोन ऑपरेटरों ने देशव्यापी नेटवर्क तैयार किया है और वॉलंटियर के तौर पर अपनी सेवाएं मुफ्त दे रहे हैं. लेकिन इन सब के बीच नागरिकों की निजता को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं. हालांकि, वालंटियर्स का कहना है कि ऑपरेटिंग प्रक्रिया के तहत वे कोई भी डेटा स्टोर नहीं कर रहे हैं.

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